विदेश की खबरें | नागोर्नो-काराबाख में लड़ाई रोकने के लिए अजरबैजान और आर्मीनिया में संघर्ष विराम

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. संघर्ष विराम की घोषणा होने के करीब एक घंटे के बाद आर्मीनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशियान ने कहा कि इलाके में शत्रुता के महौल में ‘तेजी से कमी आई’ है।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

संघर्ष विराम की घोषणा होने के करीब एक घंटे के बाद आर्मीनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशियान ने कहा कि इलाके में शत्रुता के महौल में ‘तेजी से कमी आई’ है।

अजरबैजान के अधिकारियों ने बताया कि अलगाववादी अधिकारियों द्वारा हथियार डालने की घोषणा किए जाने के बाद उसने मंगलवार को शुरू अपने सैन्य अभियान को रोक दिया है।

हालांकि, अब तक स्पष्ट नहीं है कि क्या कुछ इलाकों में लड़ाई जारी है या बंद हो गई है।

अजरबैजान ने मंगलवार को पहाड़ी नागोर्नो-काराबाख में आर्मीनियाई ठकानों को तोप से निशाना बनाया था। यह अजरबैजान का हिस्सा है और 1990 में अलगाववादी युद्ध के बाद से ही इलाके पर आर्मीनियाई मूल के बलों का कब्जा है।

हालिया लड़ाई में कई लोगों के मारे जाने और बड़ी संख्या में घायल होने की भी खबर है। नागोर्नो-काराबाख कई महीनों से खाद्यान्न की कमी का सामना कर रहा है और मानवीय संकट से गुजर रहा है और बढ़ी दुश्मनी ने उसकी समस्या और बढ़ा दी थी।

तोपों से किए जा रहे हमले से अजरबैजान और आर्मीनिया के बीच पूर्ण युद्ध होने की आशंका पैदा हो गई थी जो गत तीन दशक से सोवियत संघ के पतन के बाद से ही नागोर्नो-काराबाख के पहाड़ी क्षेत्र के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 2020 में दोनों देशों के बीच इस इलाके को लेकर करीब छह सप्ताह तक युद्ध चला था।

इस संघर्ष में रूस और तुर्किये जैसी क्षेत्रीय शक्तियों की भी संलिप्तता है। तुर्किये अजरबैजान का समर्थन करता है जबकि रूस की मध्यस्थ की भूमिका है और उसकी मध्यस्थता की वजह से 2020 लड़ाई समाप्त हुई थी। रूस के शांतिरक्षक इलाके में निगरानी के लिए तैनात हैं और दोनों पक्ष ने कहा कि रूसी शांति रक्षकों ने मौजूदा समझौते पर पहुंचने में मदद की है।

अजरबैजान के अधिकारियों और नागोर्नो-काराबाख के जातीय आर्मीनियाई अधिकारियों के बीच इलाके को दोबारा अजरबैजान में ‘मिलाने’ को लेकर बृहस्पतिवार को बातचीत होने वाली है।

अजरबैजान के रक्षा मंत्रालय के कहा कि समझौते का दृष्टिकोण है कि आर्मीनियाई सेना की टुकड़ी और उपकरण नागोर्नो-काराबाख से हटाई जाए और स्थानीय लड़ाकों का निरस्त्रीकरण किया जाए।

आर्मीनिया के प्रधानमंत्री पशियान ने कहा कि उनकी सरकार ने चर्चा या समझौते के लिए वार्ता में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन क्षेत्र के अलगाववादी अधिकारियों द्वारा लिए गए फैसले पर ‘संज्ञान लिया है।’

अजरबैजान ने आरोप लगाया कि आर्मीनिया अलगावादी युद्ध समाप्त होने के बाद से इलाके में तस्करी करके हथियार लाए हैं। उसने दावा किया कि इसकी वजह से उसने नागोर्नो-काराबाख को आर्मीनिया से जोड़ने वाली सड़क बंद की जिससे खाने-पीने के सामान और दवाओं की कमी हुई।

अजरबैजान ने बुधवार को सैन्य अभियान की जानकारी देते हुए कई शिकायतें की थी जिनमें आर्मीनियाई सेना द्वारा इलाके में उसके ठिकानों पर हमला, बारूदी सुरंग बिछाना और तोड़-फोड़ के कृत्य को अंजाम देना शामिल है।

आर्मीनिया के विदेश मंत्रालय ने नागोर्नो-काराबाख में उसके सैनिक या सैन्य साजो सामान होने से इनकार किया है। उसने कहा कि तोड़फोड़ और बारूदी सुरंग की खबर ‘‘झूठ’’ है। आर्मीनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशियान ने आरोप लगाया कि अजरबैजान का मुख्य उद्देश्य आर्मीनिया को मुश्किल में डालना है।

अजरबैजान का कहना था कि वह केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है। हलांकि नागोर्नो-काराबाख के अर्मीनियाई मूल के अधिकारियों ने एक बयान में बताया कि क्षेत्र की राजधानी स्टेप्नाकेर्ट और इलाके के गांवों में मंगलवार को ‘भारी गोलाबारी’ की गई।

संघर्ष विराम से पहले स्टेप्नाकेर्ट के आसपास बुधवार सुबह कुछ मिनटों के अंतराल पर नियमित तौर पर धमाकों की आवाजें सुनाई दे रही थी। कुछ धमाके शहर के नजदीक हो रहे थे जबकि बाकी आसपास के शहरों में हो रहे थे।

स्टेप्नाकेर्ट में तबाही सड़कों पर देखी जा सकती है जहां दुकानों की खिड़कियों में लगे शीशे टूट गए हैं और क्षतिग्रस्त वाहन सामने पड़े थे।

नागोर्नो-काराबाख के मानवाधिकार लोकायुक्त गेघन स्टेपनयन ने बुधवार को कहा कि लड़ाई में सात असैन्य नागरिकों सहित कुल 32 लोगों की मौत हुई और 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

अजरबैजान के महाभियोजक कार्यालय ने बताया कि नागोर्नो-काराबाख में अजरबैजान नियंत्रित शुशा शहर में आर्मीनियाई बलों ने गोलाबारी की जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई। इस दावे की स्वतंत्र तौर पर पुष्टि की जा सकती है।

रूस के रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि नागोर्नो-काराबाख इलाके में मौजूद उसके शांतिरक्षकों ने दो हजार असैन्य लोगों को सुरक्षित निकाला है। हालांकि, उसने यह नहीं बताया कि सुरक्षित निकाले गए लोगों को कहां ले जाया गया है।

आर्मीनिया की राजधानी येरेवान में मंगलवार को हजारों की संख्या में लोग एकत्र हुए और उन्होंने सड़क जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने नागोर्नो-काराबाख में आर्मीनियाई मूल के लोगों की रक्षा करने की मांग की। इस दौरान उनकी पुलिस के साथ झड़प भी हुई।

रूस की सरकारी समाचार एजेंसी ने खबर दी है कि बुधवार को संघर्ष विराम की घोषणा होने के कुछ समय बाद येरेवान के मुख्य हिस्से में लोग एकत्र हो रहे हैं।

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