देश की खबरें | भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करे एएसआई: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय

इंदौर, 11 मार्च मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने सोमवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को निर्देश दिया कि वह धार जिले के विवादास्पद भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करे।

एएसआई के संरक्षित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को हिन्दू वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला की मस्जिद बताता है।

उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति एस.ए. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्र ने सभी संबद्ध पक्षों की दलीलों पर गौर करने के बाद जारी आदेश में कहा, ‘‘ इस अदालत ने केवल एक निष्कर्ष निकाला है कि भोजशाला मंदिर-सह-कमाल मौला मस्जिद परिसर का जल्द से जल्द वैज्ञानिक सर्वेक्षण और अध्ययन कराना एएसआई का संवैधानिक और कानूनी दायित्व है।’’

युगल पीठ ने यह निर्देश ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ नामक संगठन की याचिका मंजूर करते हुए दिया।

अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनकर इस याचिका पर अपना फैसला 19 फरवरी को सुरक्षित रख लिया था। 11 मार्च (सोमवार) को यह फैसला सुनाया गया।

युगल पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को तय की।

एएसआई के सात अप्रैल 2003 को जारी आदेश के अनुसार जारी व्यवस्था के मुताबिक हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार भोजशाला में पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुस्लिमों को हर शुक्रवार इस जगह नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है।

एएसआई के करीब 21 साल पुराने आदेश को चुनौती देते हुए ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की ओर से अदालत में कहा गया कि यह फरमान भोजशाला परिसर की वैज्ञानिक जांच के बगैर जारी किया गया था और नियम-कायदों के मुताबिक किसी भी मंदिर में नमाज अदा किए जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

एएसआई की ओर से उच्च न्यायालय में बहस के दौरान कहा गया कि उसने 1902 और 1903 में भोजशाला परिसर की स्थिति का जायजा लिया था और इस परिसर की वैज्ञानिक जांच की मौजूदा गुहार को लेकर उसे कोई भी आपत्ति नहीं है।

मुस्लिम समुदाय भोजशाला परिसर को कमाल मौला की मस्जिद बताता है। इस मस्जिद से जुड़ी ‘मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी’ ने एएसआई द्वारा भोजशाला परिसर की वैज्ञानिक जांच के लिए ‘‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’’ की दायर अर्जी पर आपत्ति जताई गई थी।

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