देश की खबरें | चीन की हरकतों से समुचित तरीके से निपटने में सक्षम हैं भारत के सशस्त्र बल: जनरल बिपिन रावत

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एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, तीन सितंबर प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत के सशस्त्र बल चीन की आक्रामक गतिविधियों से ‘‘समुचित तरीकों’’ से निपटने में सक्षम हैं। उनकी यह टिप्पणी पूर्वी लद्दाख के कुछ इलाकों में यथास्थिति को बदलने के चीन के नये सिरे से किये गए प्रयासों की पृष्ठभूमि में आयी है।

अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम में एक संवाद सत्र में जनरल रावत ने कहा कि क्षेत्रीय मामलों से निपटने की भारत की नीति को भरोसेमंद सैन्य शक्ति और प्रभाव का समर्थन नहीं देने का मतलब ‘क्षेत्र में चीन के दबदबे को स्वीकार कर लेना’ निकाला जाएगा।

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उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वह पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच किसी तरह के संभावित संघर्ष की स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश करता है तो उसे ऐसे किसी दुस्साहस के लिए ‘‘भारी नुकसान’’ उठाना होगा।

जनरल रावत ने ऑनलाइन कार्यक्रम में कहा, ‘‘भारत चीन की कुछ आक्रामक हरकतों को देखता आ रहा है, पर हम इनसे समुचित ढंग से निपटने में सक्षम हैं।’’

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उन्होंने इस दौरान वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अमन-चैन बनाये रखने के लिए दोनों देशों के बीच तय प्रोटोकॉल का जिक्र किया।

सीडीएस ने कहा कि तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में एक राजमार्ग पुनर्निर्माण परियोजना को पूरा करने तथा रणनीतिक रेलवे मार्ग के विकास समेत चीन की बुनियादी संरचना परियोजनाओं पर भारत नजर रख रहा है और भविष्य की रणनीति तैयार करने में उनके निहितार्थों पर विचार किया जा रहा है।

चीन ने चार दिन पहले पैंगोंग लेक के सदर्न बैंक में भारतीय क्षेत्र पर कब्जा जमाने की असफल कोशिश की थी, जबकि उसी समय दोनों पक्ष सीमा विवाद के समाधान के लिए कूटनीतिक तथा सैन्य वार्ता में मशगूल थे। इसके बाद पूर्वी लद्दाख में तनाव और बढ़ गया।

भारत ने पैंगोंग लेक के सदर्न बैंक के सामरिक महत्व वाले अनेक ऊंचे क्षेत्रों को अपने नियंत्रण में ले लिया है तथा भविष्य में चीन की किसी भी गतिविधि को नाकाम करने के लिए फिंगर 2 और फिंगर 3 क्षेत्रों में मौजूदगी को बढ़ाया है।

जनरल रावत ने कहा कि पाकिस्तान, चीन के साथ भारत के सीमा विवाद का फायदा उठा सकता है। उन्होंने कहा कि इससे उत्तरी सीमा क्षेत्र में भारत के लिए थोड़ी समस्या पैदा हो सकती है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए हमने पर्याप्त सावधानियां बरती हैं ताकि पाकिस्तान ऐसा कोई दुस्साहस नहीं करे और वे अपने मिशन में कामयाब नहीं हो सकें। वास्तव में अगर वे किसी तरह के दुस्साहस का प्रयास करते हैं तो भारी नुकसान उठा सकते हैं।’’

प्रमुख रक्षा अध्यक्ष ने इस बारे में भी विस्तार से बात की कि पाकिस्तान किस तरह भारत के खिलाफ छद्म युद्ध छेड़ रहा है, जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ करवा रहा है और देश के अन्य हिस्सों में भी आतंकवाद फैलाने के प्रयास कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘उत्तरी मोर्चे पर और पश्चिमी मोर्चे पर भी पाकिस्तान के साथ हमारी अशांत सीमाएं हैं। इसलिए हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से हमारी सेना एक महत्वपूर्ण कारक बनी रहेगी। हमारे सशस्त्र बलों को फौरी संकट से निपटने के लिए और उसी समय भविष्य के लिए तैयार रहना होगा।’’

जनरल रावत ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तान के साथ चीन के आर्थिक सहयोग तथा उसके सतत सैन्य, आर्थिक एवं कूटनीतिक समर्थन को देखते हुए भारत को सर्वोच्च स्तर की तैयारियां रखनी होंगी।

पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि भारत परमाणु से लेकर अर्द्ध-परंपरागत तक हर संभावित संघर्ष के सर्वाधिक जटिल खतरों और चुनौतियों का सामना कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रवाद के बारे में गलतफहमी के कारण अस्थिरता से पैदा होने वाली प्रमुख भू-रणनीतिक चुनौतियां संघर्ष को जन्म देती हैं। पाकिस्तान द्वारा छेड़े गये छद्म युद्ध ने भारत के खिलाफ आतंकवाद को भड़काने के साथ ही क्षेत्रीय एकीकरण के भारत के प्रयासों को बाधित किया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘पूर्वी एशिया, दक्षिण पूर्वी एशिया तथा दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री लूटपाट, समुद्री आतंकवाद, मानव तस्करी और जैव आतंकवाद जैसे गैर-परंपरागत खतरों समेत अन्य घटनाक्रमों का भारत के हितों पर सीधा असर होता है।’’

भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के बीच चतुष्कोणीय गठबंधन पर रावत ने कहा कि नयी दिल्ली का मानना है कि यह समूह हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए अच्छी व्यवस्था है।

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