ताजा खबरें | बौद्धिक संपदा अधिकार विकास के लिये शीर्ष स्तरीय संस्थान स्थापित किया जाए : संसदीय समिति

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. संसद की एक समिति ने बौद्धिक संपदा के संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया और देश में बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) विकास के लिये एक विशेष शीर्ष स्तरीय संस्थान स्थापित करने की सिफारिश की ।

नयी दिल्ली, 23 जुलाई संसद की एक समिति ने बौद्धिक संपदा के संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया और देश में बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) विकास के लिये एक विशेष शीर्ष स्तरीय संस्थान स्थापित करने की सिफारिश की ।

भारत में बौद्धिक संपदा अधिकार व्यवस्था की समीक्षा विषय पर वाणिज्य विभाग संबंधी संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट में यह बात कही गई है । यह रिपोर्ट शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में पेश की गई ।

रिपोर्ट के अनुसार, समिति सिफारिश करती है कि देश में बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) विकास के लिये एक विशेष शीर्ष स्तरीय संस्थान की स्थापना की जानी चाहिए जो आर्थिक और सामाजिक विकास के लिये आईपीआर की पूरी क्षमता का विश्लेषण और दोहन करने में एक बहु अनुशासनात्मक दृष्टिकोण रखेगा ।

इसमें कहा गया है, ‘‘ यह संस्था आईपीआर पेशेवरों और नीति एवं कानून, रणनीति विकास, प्रशासन और प्रवर्तन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों के एक समूह को विकसित करने में सहायता करेगी । ’’

समिति की राय है कि आईपीआर नीति की समीक्षा की जानी चाहिए । नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्रों में नए और उभरते तरीकों के मद्देनजर नीति का पुनर्मूल्यांकन जरूरी है ।

रिपोर्ट में कहा गया है कि समीक्षा में नीति के कार्यान्वयन में मौजूदा चुनौतियों और इसके प्रभावी निष्पादन के लिये किये जाने वाले सुधारात्मक उपायों की पहचान करने के लिये भी प्रमुखता प्राप्त की गई है ।

इसमें कहा गया है, ‘‘ समिति विभाग से जल्द से जल्द आईपीआर नीति की समग्र समीक्षा करने की सिफारिश करती है ।’’

समिति ने यह भी सिफारिश की है कि नीति की समीक्षा के उद्देश्य से देश के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार पर अधिक ध्यान देने, आईपीआर पर जागरूकता अभियानों का आयोजन करने, अनुसंधान और विकास गतिविधियों में वृद्धि पर व्यापक सलाह, बौद्धिक संपाद वित्त पोषण को प्रोत्साहित करने जैसे बदलाव करना चाहिए ।

रिपोर्ट के अनुसार, समिति यह नोट करते हुए व्यथित है कि भारत में केवल 24,936 पेटेंट प्रदान किये गए जो क्रमश: अमेरिका और चीन में दिये गए 3,54,430 और 4,52,804 पेटेंटों की तुलना में काफी कम है ।

इसमें कहा गया है कि पिछले चार वर्षो में भारत में पेटेंट की संख्या में वृद्धि की दर अमेरिका और चीन की तुलना में प्रभावशाली नहीं रही ।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में पेटेंट कम संख्या में दायर किया जाना और अनुदान अनुसंधान एवं विकास गतिविधि पर कम खर्च चिंता का विषय है ।

समिति ने यह भी कहा कि जालसाजी और चोरी सहित बौद्धिक संपदा अपराध के खतरे बढ़े हैं जिन्हें उचित उपाय करके, विनियमित करके और चतुराई से निपटाया जाना चाहिए । इसके लिये राज्य पुलिस बलों में आईपीआर प्रकोष्ठों को मजबूत बनाया जाना चाहिए ।

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