देश की खबरें | दिल्ली में अतिक्रमण विरोधी अभियान से नफरत का महौल बन रहा : वाम दल

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. वाम दलों ने बृहस्पतिवार को दिल्ली के नगर निकाय द्वारा शुरू अतिक्रमण विरोधी अभियान के खिलाफ प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा और आरएसएस ‘विध्वंसक बुलडोजर राजनीति’ कर रहे हैं व अवैध निर्माण हटाने के नाम पर नफरत का माहौल पैदा कर रहे हैं।

नयी दिल्ली, 24 अप्रैल वाम दलों ने बृहस्पतिवार को दिल्ली के नगर निकाय द्वारा शुरू अतिक्रमण विरोधी अभियान के खिलाफ प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा और आरएसएस ‘विध्वंसक बुलडोजर राजनीति’ कर रहे हैं व अवैध निर्माण हटाने के नाम पर नफरत का माहौल पैदा कर रहे हैं।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी -मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा- माले) के करीब 100 कार्यकर्ता बृहस्पतिवार को जंतर मंतर पर जमा हुए और केंद्र सरकार से ऐसी गतिविधियों को रोकने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी, पार्टी नेता बृंदा करात और भाकपा-माले की पोलित ब्यूरो सदस्य कविता कृष्णन भी मौजूद थीं।

भाकपा-माले के दिल्ली सचिव रवि राय ने कहा, ‘‘ भाजपा और आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ) दिल्ली में अतिक्रमण हटाने के नाम पर नफरत का माहौल पैदा कर रहे हैं। हमने यह जहांगीरपुरी में देखा था और अब वे ऐसी ही गतिविधि राष्ट्रीय राजधानी के अन्य इलाकों में करने की योजना बना रहे हैं। हम सरकार से ऐसी गतिविधि को खत्म करने की मांग कर रहे हैं।’’

अधिकारियों ने बताया कि भाजपा शासित दक्षिण दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) ने मंगलवार को अपने चार जोन में अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की और अस्थायी ढांचों और गैर कानूनी होर्डिंग को हटाया जबकि वाहनों को जब्त कर करीब पांच किलोमीटर लंबी सड़क को अतिक्रमण से मुक्त किया।

यह कार्रवाई भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता के पत्र के बाद की गई है। गुप्ता ने दक्षिण दिल्ली और पूर्वी दिल्ली नगर निगम को 20 अप्रैल को पत्र लिखकर अपने अपने इलाकों से ‘‘रोहिंग्या, बांग्लादेशियों और असमाजिक तत्वों’’ द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाने की मांग की थी।

उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह उत्तर दिल्ली नगर निगम ने 16 अप्रैल को दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प के केंद्र रहे जहांगीरपुरी इलाके में अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया था जिसकी बड़े पैमाने पर आलोचना हुई। हालांकि, उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद वहां ‘ध्वस्तीकरण’ की कार्रवाई रोक दी गई।

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