देश की खबरें | कैग की नियुक्ति की मौजूदा प्रक्रिया को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर केंद्र से जवाब तलब

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उस जनहित याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा जिसमें भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की नियुक्ति केवल कार्यपालिका और प्रधानमंत्री द्वारा करने के मौजूदा चलन को असंवैधानिक घोषित किए जाने का अनुरोध किया गया है।

नयी दिल्ली, 17 मार्च उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उस जनहित याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा जिसमें भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की नियुक्ति केवल कार्यपालिका और प्रधानमंत्री द्वारा करने के मौजूदा चलन को असंवैधानिक घोषित किए जाने का अनुरोध किया गया है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि हमें अपने संस्थानों पर भरोसा करना चाहिए।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन’ द्वारा दायर की गयी जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया और उसे इसी मुद्दे पर लंबित मामले के साथ संलग्न कर दिया।

पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 148 में किसी भी प्रभाव से सुरक्षा प्रदान करते हुए कैग की नियुक्ति का प्रावधान है।

पीठ ने कहा, ‘‘अंततः हमें अपनी संस्थाओं पर भरोसा करना होगा। अनुच्छेद 148 भी उसी तरह सुरक्षा प्रदान करता है जिसतरह की सुरक्षा उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को प्राप्त है।’’

एनजीओ की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि सवाल संस्था की स्वतंत्रता का है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र जैसे राज्यों, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में है, में कैग की लेखा परीक्षा को बाधित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक कैग की नियुक्ति काफी हद तक स्वतंत्र थी, लेकिन केंद्र, राज्यों और सार्वजनिक उपक्रमों की योजनाओं का ऑडिट करने वाली संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता को हाल में बाधित किया जा रहा है।

जनहित याचिका में न्यायालय से यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि राष्ट्रपति कैग की नियुक्ति प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के प्रधान न्यायाधीश वाली एक स्वतंत्र और तटस्थ चयन समिति के परामर्श से तथा पारदर्शी तरीके से करें।

इसमें कहा गया है कि कैग की नियुक्ति का निर्देश सूचना आयोगों और केंद्रीय सतर्कता आयोग सहित अन्य निकायों की नियुक्ति के समान होना चाहिए।

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