देश की खबरें | अन्ना नगर हादसा: विस्थापित परिवारों के आगे अंधकारमय भविष्य
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नयी दिल्ली, 20 जुलाई मध्य दिल्ली के अन्ना नगर में भारी बारिश के चलते जो दस घर ढह गए थे, उनमें रहने वाले परिवार अब बेघर हैं, सिर पर न छत है और न भविष्य से कोई आस।
देश में कोरोना वायरस के कारण लगे लॉकडाउन के कारण ये परिवार पहले ही आय के साधन कम होने के कारण परेशानियों से जूझ रहे थे।
रविवार को आईटीओ के नजदीक तथा डब्ल्यूएचओ के निर्माणाधीन मुख्यालय के पीछे स्थित झुग्गी बस्ती में भारी बारिश के चलते करीब दस मकान ढह गए थे। यह बस्ती एक नाले के पास है। रविवार सुबह नाला उफान पर था जिसके कारण कई घर, पेड़ तथा दुकानें इसमें बह गईं।
विस्थापित लोगों ने अधिकारियों द्वारा इंद्रप्रस्थ मेट्रो स्टेशन के निकट लगाए तंबुओं में शरण ले रखी है।
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उनमें से एक जुनैद (25) कहते हैं, ‘‘इन तंबुओं में हम कब तक रहेंगे? यह तो अस्थायी है। हमें रहने के लिए घर या कोई स्थायी व्यवस्था चाहिए। कोरोना वायरस के कारण जब अधिकारी घरों के भीतर रहने पर जोर दे रहे हैं ऐसे में हम बेघर हैं।’’
तंबुओं के भीतर दो पंखे और दरियां हैं।
विस्थापित परिवार के लोगों का कहना है कि रात को उनकी आंखों से नींद गायब रही क्योंकि भविष्य अंधकारमय लग रहा है।
एक व्यक्ति ने कहा, ‘‘हमारा सबकुछ बह गया, अब पैसा भी नहीं है। जो कपड़े पहन रखे हैं बस वही बचे हैं।’’
दो मंजिला घर में अपने संयुक्त परिवार के साथ रहने वाली मंगला (26) ने कहा, ‘‘हम शांति से कैसे सो सकते हैं? हमारा घर चला गया। महामारी क्या काफी नहीं थी? जरूरी सामान खरीदने के लिए भी पैसा नहीं है। अपने दो बच्चों को मैंने अपनी मां के पास छोड़ा है, एक बच्चा महज दो साल का है जिसे मैंने अपने पास तंबू में रखा है।’’
विस्थापित हुए दस परिवारों को जिला मजिस्ट्रेट (मध्य) कार्यालय की ओर से मुआवजा दिया गया।
जिला मजिस्ट्रेट (मध्य) निधि श्रीवास्तव ने बताया, ‘‘रविवार सुबह जो दस परिवार घर गिरने के कारण विस्थापित हुए, उन्हें 25,000-25,000 रूपये का मुआवजा दिया गया।
हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें मुआवजा नहीं मिला।
रेखा रानी (40) ने कहा, ‘‘हमें मुआवजे की रकम नहीं मिली। रविवार को घटना के बाद हमने नजदीक के मंदिर में शरण ली थी, तंबू में हम बाद में गए।’’
कई लोगों के घरों में दरार आ गई जिसके बाद वे भी तंबुओं में चले गए।
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