देश की खबरें | अन्न भाग्य योजना: कर्नाटक सरकार चावल के लिए केंद्रीय एजेंसियों से कर रही बातचीत

बेंगलुरु, 24 जून कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार ने ‘अन्न भाग्य योजना’ के तहत गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) रहने वाले परिवारों को पांच किलोग्राम अतिरिक्त चावल प्रदान करने के वास्ते तीन केंद्रीय एजेंसियों से चावल की अपूर्ति के लिए निविदा आमंत्रित की है।

सिद्धरमैया का यह बयान केंद्र सरकार की ओर से कर्नाटक को चावल देने से इनकार के एक दिन बाद आया है।

उन्होंने कहा कि इन एजेंसियों के साथ कीमत को लेकर बातचीत की जा रही है।

उन्होंने केंद्र सरकार की इस बात के लिए आलोचना की कि उसने उस योजना के लिए कर्नाटक सरकार को चावल देने से इनकार कर दिया जो चुनाव के दौरान कांग्रेस द्वारा दी गई पांच गारंटी में से एक है और जिसे कर्नाटक में कांग्रेस के सत्ता में आने के तुरंत बाद शुरू किया जाना था।

मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ मर्यादित (एनसीसीएफ), केंद्रीय भंडार और राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन फेडरेशन (एनएएफईडी) से निविदा मांगी है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम उनसे बातचीत कर रहे हैं। आज बातचीत होगी और इसके बाद हमें चावल की मात्रा और गुणवत्ता का पता चलेगा और चावल की कीमत तय की जाएगी।’’

खुले बाजार से खरीद के बारे में पूछे जाने पर सिद्धरमैया ने कहा कि निविदा जारी की जानी है जिसमें समय लगेगा। वैकल्पिक उपाय के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में रागी और मक्के का भंडार छह महीने तक के लिए है जिसे अधिक से अधिक दो किलोग्राम दिया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘दो किलोग्राम रागी पुराने मैसुरु में दी जा सकती है और दो किलोग्राम मक्का उत्तरी कर्नाटक में दिया जा सकता है, लेकिन तब भी हमें तीन किलोग्राम चावल की जरूरत होगी। हमारे पास रागी और मक्के का इतना भंडार नहीं है कि सालभर इनकी आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।’’

उन्होंने पर्याप्त भंडार होने के बावजूद चावल देने से इनकार करने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केवल समस्या बढ़ाने के लिए हमें चावल देने के लिए राजी नहीं है।

सिद्धरमैया ने कहा कि राज्य मुफ्त में चावल नहीं मांग रहा है वह इसके लिए भुगतान करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से पहले ही पांच किलोग्राम गेहूं मिल रहा है जिसपर 36.70 रुपये प्रति किलोग्राम की लागत आ रही है, ऐसे में यदि चावल दिया गया तो कर्नाटक सरकार उसी हिसाब से भुगतान करेगी।

पांच गारंटी में शामिल ‘अन्न भाग्य’ योजना को एक जुलाई से शुरू किया जाना है, लेकिन अपर्याप्त चावल भंडार के कारण तय तारीख पर इसकी शुरुआत नहीं भी हो सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की योजना एक जुलाई से मुफ्त चावल देने की है, लेकिन हमें चावल नहीं मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक को 2.29 लाख मीट्रिक टन चावल की दरकार है जो किसी राज्य के पास नहीं है। सिद्धरमैया ने कहा कि तेलंगाना धान देने पर सहमत हुआ है, चावल नहीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का कहना है कि वह 1.5 लाख मीट्रिक टन चावल दे सकता है, लेकिन केवल एक महीने के लिए, पर सवाल यह है कि अगले महीने से क्या होगा।

केंद्रीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री पीयूष गोयल द्वारा कथित तौर पर राज्य को चावल देने से इनकार करने के बाद मुख्यमंत्री ने केंद्र के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त किया।

कर्नाटक के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री के एच मुनियप्पा ने शुक्रवार को नयी दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, ‘‘पीयूष गोयल ने कहा है कि केंद्र हमें चावल नहीं दे सकता।’’

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