देश की खबरें | परिसीमन प्रक्रिया पर अमित शाह का दावा ‘विश्वसनीय’ नहीं: मुख्यमंत्री सिद्धरमैया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का यह दावा कि जनसंख्या जनगणना के आधार पर किए जाने वाले परिसीमन में दक्षिणी राज्यों को नुकसान नहीं होगा तो उनके इस दावे पर ‘‘विश्वास नहीं किया जा सकता है।’’

बेंगलुरु, 27 फरवरी कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का यह दावा कि जनसंख्या जनगणना के आधार पर किए जाने वाले परिसीमन में दक्षिणी राज्यों को नुकसान नहीं होगा तो उनके इस दावे पर ‘‘विश्वास नहीं किया जा सकता है।’’

सिद्धरमैया ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि उन्होंने दक्षिणी राज्यों में भ्रम पैदा करने के उद्देश्य से यह बयान दिया है।

उन्होंने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब अमित शाह ने बुधवार को दक्षिणी राज्यों को आश्वासन दिया था कि वे परिसीमन के कारण ‘एक भी संसदीय सीट’ नहीं गंवाएंगे।

मुख्यमंत्री ने एक बयान में कहा, ‘‘गृह मंत्री की अस्पष्ट टिप्पणियों से ऐसा लगता है कि या तो उनके पास उचित जानकारी का अभाव है या फिर कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश सहित दक्षिणी राज्यों को नुकसान पहुंचाने की जानबूझकर मंशा है। ’’

सिद्धरमैया ने कहा कि यदि केंद्र सरकार वास्तव में दक्षिणी राज्यों के लिए निष्पक्षता सुनिश्चित करना चाहती है तो गृह मंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या परिसीमन प्रक्रिया हालिया जनसंख्या के आंकड़ों या लोकसभा सीट की वर्तमान संख्या के आधार पर होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि यदि हालिया जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन किया गया तो यह दक्षिणी राज्यों के साथ घोर अन्याय करना होगा। इस तरह की अनुचितता को रोकने के लिए संवैधानिक संशोधनों के बाद 1971 की जनगणना को आधार मानकर परिसीमन प्रक्रियाएं की गई थीं।’’

मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के अनुसार, ‘‘दक्षिणी राज्यों ने पिछले 50 वर्षों में जनसंख्या वृद्धि को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया है और विकास के मामले में उल्लेखनीय प्रगति की है। तो वहीं, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्यप्रदेश जैसे उत्तरी राज्य जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने में विफल रहे हैं और विकास में पिछड़ रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘परिणामस्वरूप, यदि जनगणना के नवीनतम आंकड़ों के आधार पर परिसीमन किया जाएगा तो कर्नाटक सहित दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीट की संख्या में कमी या स्थिरता देखी जा सकती है जबकि उत्तरी राज्यों को अधिक सीटें मिलेंगी।’’ सिद्धरमैया ने पूछा, ‘‘किसी भी स्थिति में दक्षिणी राज्यों को नुकसान ही उठाना पड़ेगा। क्या गृह मंत्री को इसकी जानकारी नहीं है?’’

उन्होंने परिसीमन के प्रभाव पर किए गए कई अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा कि इन अध्ययनों के अनुसार, यदि परिसीमन केवल हालिया जनगणना के आंकड़ों (2021 या 2031) के आधार पर किया जाता है तो कर्नाटक में लोकसभा सीट की संख्या 28 से घटकर 26 हो जाने की संभावना है। इसी तरह, आंध्र प्रदेश की सीटें 42 से घटकर 34, केरल की 20 से घटकर 12 तथा तमिलनाडु की 39 से घटकर 31 हो जाएंगी।

सिद्धरमैया ने हैरानी जताते हुए दावा किया ‘‘उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीट की संख्या 80 से बढ़कर 91 हो जाएगी, बिहार में 40 से बढ़कर 50 हो जाएगी तथा मध्य प्रदेश में 29 से बढ़कर 33 हो जाएगी। यह अन्याय नहीं तो और क्या है?’’

उन्होंने इसे ‘‘अस्वीकार्य’’ करार देते हुए कहा कि यदि कर्नाटक सहित दक्षिणी राज्यों के साथ परिसीमन प्रक्रिया में निष्पक्ष व्यवहार किया जाना है तो इस प्रक्रिया को 1971 की जनगणना के आधार पर या केवल जनसंख्या के आंकड़ों पर निर्भर हुए बिना आनुपातिक रूप से लोकसभा सीट की संख्या में वृद्धि की जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘‘परिसीमन के लिए नरेन्द्र मोदी की केंद्र सरकार द्वारा दिखाए जा रहे असाधारण उत्साह को देखते हुए ऐसा लगता है कि उनका असली इरादा दक्षिणी राज्यों के लोगों को उनकी पार्टी के प्रभुत्व का विरोध करने के लिए दंडित करना है।’’

सिद्धरमैया ने कर्नाटक विधानसभा के लिए चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा अध्यक्ष जे. पी. नड्डा द्वारा दी गई चेतावनी का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि कर्नाटक के लोग भाजपा का समर्थन नहीं करेंगे तो राज्य को नरेन्द्र मोदी की शुभकामनाएं नहीं मिल पाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमारे राज्य के खिलाफ केंद्र सरकार द्वारा की गई हर कार्रवाई इस कथन को सत्य साबित करती है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में दक्षिणी राज्यों की आवाज को दबाने तथा राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें अपनी चिंताएं जाहिर करने से रोकने के लिए केंद्र की भाजपा नीत सरकार ने अब ‘‘परिसीमन का नया हथियार’’ अपना लिया है।

मुख्यमंत्री ने कन्नड़ लोगों से जाति, धर्म और राजनीतिक विचारधारा के मतभेदों को दूर रखने तथा केंद्र सरकार द्वारा राज्य पर किए जा रहे अन्याय के खिलाफ एक स्वर में एकजुट होने का आग्रह किया।

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