देश की खबरें | विवाद के बीच पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने एक और विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति की नियुक्ति की
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कोलकाता, छह सितंबर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने विश्वविद्यालयों में कार्यवाहक कुलपति की नियुक्ति को लेकर विवाद के बीच एक अन्य राज्य विश्वविद्यालय में अंतरिम कुलपति की नियुक्ति की है। ये विश्वविद्यालय कई महीनों से नेतृत्व की कमी से जूझ रहे हैं।
बोस ने इससे पहले प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय, मौलाना अबुल कलाम आजाद प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल (एमएकेएयूटी) और बर्धमान विश्वविद्यालय सहित सात विश्वविद्यालयों के कार्यवाहक कुलपतियों की नियुक्ति की थी।
बोस ने मंगलवार रात नव स्थापित कन्याश्री विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति के रूप में प्रोफेसर काजल डे के नाम की घोषणा की।
उनकी ओर से यह घोषणा, पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उन पर तीखा हमला किए जाने के कुछ ही घंटों बाद की गई। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्यपाल पर राज्य की शिक्षा प्रणाली में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था और चेतावनी दी थी कि अगर राज्यपाल ऐसे ही काम करना जारी रखेंगे तो वह राजभवन के बाहर धरने पर बैठेंगी।
राजभवन ने एक बयान में कहा, ‘‘कुलाधिपति ने आज प्रो. काजल डे को कन्याश्री विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल का कुलपति (कार्यवाहक) नियुक्त किया।’’
काजल डे, बोस द्वारा नियुक्त किए जाने के बाद से मार्च से डायमंड हार्बर महिला विश्वविद्यालय के अंतरिम कुलपति के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहीं थीं। वह नेताजी सुभाष मुक्त विश्वविद्यालय में गणित की प्रोफेसर थीं।
सूत्रों ने कहा कि आठ अन्य विश्वविद्यालयों के अंतरिम कुलपतियों के नाम को भी अंतिम रूप दे दिया गया है और नियुक्ति पत्र ‘‘जल्द ही जारी किए जाएंगे’’।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सदस्य एवं पार्टी प्रवक्ता शांतनु सेन ने आरोप लगाया कि बोस ‘‘दिल्ली में भाजपा नेताओं को खुश करने के लिए निर्वाचित सरकार को दरकिनार कर समानांतर प्रशासन चला रहे हैं।’’
सेन ने कहा, ‘‘वह (बोस) अपने पूर्ववर्ती (जगदीप धनखड़) के नक्शेकदम पर चल रहे हैं। इन चीजों को करने से उन्हें लगता है कि उन्हें धनखड़ की तरह ही पुरस्कृत किया जाएगा। बोस एक समानांतर प्रशासन चला रहे हैं और राज्य को चुनौती दे रहे हैं, जो बेहद निंदनीय है।’’
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में अपने विवादास्पद कार्यकाल के बाद धनखड़ को देश के उपराष्ट्रपति के रूप में चुना गया था। धनखड़ के राज्यपाल रहने के दौरान कई मुद्दों पर उनका ममता बनर्जी नीत सरकार के साथ लगातार टकराव होता रहा था।
सेन ने कहा कि बोस अंतरिम कुलपतियों की नियुक्ति में सभी मानदंडों का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के रूप में 10 साल से कम अनुभव वाले लोग, और जो अकादमिक पृष्ठभूमि से नहीं हैं, उन्हें नियमों की अनदेखी करके और योग्य लोगों को दरकिनार करके अंतरिम कुलपति के रूप में नियुक्त किया जा रहा है। इस तरह के कृत्य निंदनीय हैं और उनके अधिकार क्षेत्र के बाहर के हैं।’’
इस मामले को लेकर बोस पर निशाना साधते हुए बनर्जी ने मंगलवार को आरोप लगाया था कि राज्य द्वारा नियुक्त खोज समिति की अनदेखी करके राज्यपाल अपनी इच्छा के अनुसार अंतरिम कुलपतियों की नियुक्ति कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कुलपतियों को पांच सदस्यीय खोज समिति द्वारा सुझाए गए नामों में से चुना जाना चाहिए। बनर्जी ने आरोप लगाया कि बोस समिति के सुझावों की परवाह किए बिना अपनी इच्छा से लोगों को नियुक्त कर रहे हैं।
उन्होंने ‘‘जैसे को तैसा’’ की कार्रवाई का वादा किया और राज्यपाल के निर्देशों का पालन करने वाले सभी विश्वविद्यालयों का कोष रोकने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा था, ‘‘मैं भी देखती हूं कि आप इन कुलपतियों को वेतन कैसे देते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम इसे जारी नहीं रहने देंगे। अगर राज्यपाल सोचते हैं कि वह मुख्यमंत्री से बड़े हैं, तो हम उनसे लड़ेंगे। उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि उन्हें उस पद के लिए नामित किया गया है।’’
बनर्जी ने कहा, ‘‘अगर (राज्य सरकारों के) अधिकारों को छीनकर संघवाद में हस्तक्षेप किया गया, तो मैं राजभवन के बाहर धरने पर बैठने के लिए मजबूर हो जाऊंगी। हम अन्याय नहीं होने देंगे, पश्चिम बंगाल जानता है कि कैसे लड़ना है। इंतजार करें और देखें।’’
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने कहा कि टीएमसी ने शैक्षणिक संस्थानों का राजनीतिकरण कर दिया है और हर जगह अपने ही लोगों को पद पर बैठा दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘राज्यपाल विभिन्न राज्य विश्वविद्यालयों में फैली अराजकता को खत्म करने के लिए छात्रों के हित में काम कर रहे हैं। स्थिति के समग्र सुधार के लिए उनका सहयोग करने के बजाय, टीएमसी उन्हें निशाना बना रही है।’’
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