देश की खबरें | महाराष्ट्र डीसीपीआर 2034 में संशोधन करें, सुरक्षा नियामक को शामिल करें : अदालत

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मुंबई, 11 अप्रैल बंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार को 2034 डेवलपमेंट कंट्रोल एंड प्रमोशन रेगुलेशन (डीसीपीआर) में संशोधन करने का निर्देश दिया, ताकि आग और अन्य मानव निर्मित आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील इमारतों के लिए सुरक्षा नियमों को शामिल किया जा सके।

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एमजी सेवलीकर की पीठ ने राज्य की इस दलील पर भी सवाल उठाया कि 2009 में मंत्रालय की इमारत में आग लगने के कारण वह 2008 से सुरक्षा नियमों को लागू करने में असमर्थ रहा है। आग में संबंधित रिकॉर्ड नष्ट हो गए थे।

उच्च न्यायालय ने कहा, “राज्य की उदासीनता हालात बता रही है। अपने हलफनामे में राज्य मंत्रालय में आग का उल्लेख करता है जिसमें 2009 से सभी दस्तावेज नष्ट हो गए थे। राज्य का कहना है कि उसकी ओर से कोई जानबूझकर चूक नहीं की गई थी, लेकिन आग के कारण रिकॉर्ड नष्ट होने से मुद्दा अनसुलझा रहा।”

पीठ ने कहा, “यह एक और मामला है जहां राज्य अपनी पूर्ण निष्क्रियता को सही ठहराने में पूरी तरह विफल रहा है। आग के बावजूद, राज्य को 2034 विकास योजना के साथ आने में मुश्किल नहीं हुई।”

अदालत अधिवक्ता आभा सिंह और आदित्य प्रताप सिंह द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मानव निर्मित आपदाओं की चपेट में आने के लिहाज से संवेदनशील इमारतों में अग्नि सुरक्षा और अन्य विशेष सुरक्षा नियमों को लागू करने की मांग की गई थी।

शहर में 2008 में हुए 26/11 के आतंकी हमलों के बाद महाराष्ट्र सरकार द्वारा विशेष सुरक्षा नियमों का मसौदा तैयार किया गया था।

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