प्रयागराज (उप्र), तीन जुलाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी के ‘सर्व सेवा भवन’ के ध्वस्तीकरण के आदेश के खिलाफ किसी तरह की राहत से सोमवार को इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को निचली अदालत में इस मामले से संबद्ध लंबित वाद में अपनी शिकायत रखनी चाहिए।
‘अखिल भारत सर्व सेवा संघ’ संगठन द्वारा दायर रिट याचिका का निस्तारण करते हुए न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने कहा, ‘‘तथ्यों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर विचार करते हुए हम इस रिट याचिका को स्वीकार करने के इच्छुक नहीं हैं। हालांकि, याचिकाकर्ता के पास निचली अदालत में लंबित मूल वाद में यह आवेदन दाखिल करने का विकल्प खुला है।’’
‘अखिल भारत सर्व सेवा संघ’ ने अदालत से जिलाधिकारी, वाराणसी द्वारा 26 जून, 2023 को पारित आदेश और 27 जून, 2023 को उत्तर रेलवे प्रशासन द्वारा जारी ध्वस्तीकरण का नोटिस रद्द करने का अनुरोध किया था।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, 1948 में स्थापित सर्व सेवा भवन, महात्मा गांधी, जय प्रकाश नारायण और विनोभा भावे की विरासत है। इसे भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद द्वारा स्थापित किया गया था। महात्मा गांधी के विचारों का प्रचार-प्रसार करने के लिए वाराणसी के राजघाट में ‘सर्व सेवा संघ’ के भवन का निर्माण विनोबा भावे की देखरेख में किया गया था।
हालांकि, बाद में जिस जमीन पर यह भवन स्थित है, उसकी मिल्कियत को लेकर याचिकाकर्ता और उत्तर रेलवे के बीच विवाद पैदा हो गया।
वाराणसी के जिलाधिकारी ने भी यह कहते हुए उत्तर रेलवे के पक्ष में निर्णय किया कि जिस जमीन पर भवन स्थित है वह उत्तर रेलवे का है। इसलिए ध्वस्तीकरण का आदेश उत्तर रेलवे द्वारा पारित किया गया।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY