देश की खबरें | मालेगांव विस्फोट मामले में सभी आरोपी बरी, प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरोहित ने दिया अदालत को धन्यवाद

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित ने 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में उन्हें बरी करने के विशेष अदालत के आदेश की बृहस्पतिवार को सराहना की।

मुंबई, 31 जुलाई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित ने 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में उन्हें बरी करने के विशेष अदालत के आदेश की बृहस्पतिवार को सराहना की।

इस विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई थी और 101 अन्य घायल हो गए थे।

पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकु ने कहा कि बरी होना सिर्फ़ उनकी ही नहीं, बल्कि 'भगवा की जीत है।

उन्होंने यह भी कहा कि उनके जीवन के 17 साल बर्बाद गए और भगवान उन लोगों को सज़ा देंगे जिन्होंने 'भगवा' का अपमान करने की कोशिश की।

फैसले के बाद ठाकुर, पुरोहित और अन्य पांच आरोपियों ने विशेष एनआईए न्यायाधीश ए के लाहोटी और अपने वकीलों को धन्यवाद दिया।

ठाकुर ने अदालत को बताया कि 2008 में इस मामले में गिरफ्तारी के बाद से उनका जीवन बर्बाद हो गया था और वह केवल इसलिए जीवित रह पाईं क्योंकि वह एक सन्यासी थीं।

उन्होंने कहा, "यह केस सिर्फ मैंने नहीं लड़ा, बल्कि भगवा ने लड़ा। मेरा पूरा जीवन कलंकित कर दिया गया था।"

ठाकुर ने अदालत से कहा, "आज भगवा की विजय हुई है, न्याय की जीत हुई है। जिसने भी भगवान को बदनाम किया है, भगवान उसे सजा देगा।"

पुरोहित ने कहा कि उन्हें इस मामले में फंसाया गया है और उन्होंने कहा कि वह पहले की तरह और उसी जोश के साथ देश की सेवा करते रहेंगे।

उन्होंने कहा, "कोई भी जांच एजेंसी गलत नहीं है; इन एजेंसियों में काम करने वाले लोग ही गलत हैं। यह देश महान है। हमें ध्यान रखना चाहिए कि गलत लोग ऊंचे पदों पर न पहुंचें और हमारे जैसे लोगों को कष्ट न पहुंचाएं।"

पुरोहित ने कहा कि वह संगठन और राष्ट्र की सेवा करना जारी रखेंगे।

पुरोहित को मुकदमा लंबित रहने तक सेना में बहाल कर दिया गया था।

मुंबई से लगभग 200 किलोमीटर दूर मालेगांव शहर में 29 सितंबर 2008 को एक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल में लगाए गए विस्फोटक उपकरण में विस्फोट होने से छह लोगों की मौत हो गयी थी और 101 अन्य लोग घायल हो गए थे।

विशेष अदालत ने मामले में सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया और कहा कि उनके खिलाफ कोई विश्वसनीय और ठोस सबूत नहीं है।

अदालत ने कहा कि कोई भी धर्म हिंसा नहीं सिखाता है। उसने कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन अदालत सिर्फ धारणा के आधार पर दोषी नहीं ठहरा सकती।

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