विदेश की खबरें | थरूर के नेतृत्व में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को पनामा जाएगा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. कांग्रेस सांसद शशि थरूर के नेतृत्व में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल किसी भी प्रकार के आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने का भारत का मजबूत संदेश लेकर मंगलवार से पनामा की यात्रा करेगा।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

पनामा सिटी, 26 मई कांग्रेस सांसद शशि थरूर के नेतृत्व में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल किसी भी प्रकार के आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने का भारत का मजबूत संदेश लेकर मंगलवार से पनामा की यात्रा करेगा।

प्रतिनिधिमंडल गुयाना से यहां पहुंचेगा।

पनामा, निकारागुआ और कोस्टा रिका में स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ के जरिए बताया कि तीन दिवसीय यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल पनामा के नेतृत्व एवं मीडिया, रणनीतिक समुदाय, भारतीय प्रवासी समुदाय और पनामा में भारत के मित्रों के साथ संवाद करेगा।

उसने कहा कि यह यात्रा भारत की एकता और भाईचारे का मजबूत संदेश देने के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के उसके सामूहिक संकल्प को भी रेखांकित करेगी।

इस प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों में सरफराज अहमद (झारखंड मुक्ति मोर्चा), जी एम हरीश बालयोगी (तेलुगु देशम पार्टी), शशांक मणि त्रिपाठी (भारतीय जनता पार्टी), भुवनेश्वर कलिता (भारतीय जनता पार्टी), मिलिंद देवरा (शिवसेना), तेजस्वी सूर्या (भारतीय जनता पार्टी) और अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत तरनजीत संधू शामिल हैं।

भारत के कूटनीतिक प्रयासों के तहत सात प्रतिनिधिमंडल दुनियाभर के देशों की 33 राजधानियों की यात्रा कर रहे हैं ताकि विशेष रूप से 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के मद्देनजर आतंकवाद को लेकर भारत की प्रतिक्रिया और पाकिस्तान की मंशा के बारे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अपनी बात रखी जा सके।

पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है।

पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने छह मई की देर रात पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ढांचों पर सटीक हमले किए थे, जिसके बाद पाकिस्तान ने आठ, नौ और 10 मई को भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमले करने का प्रयास किया था।

भारतीय पक्ष ने पाकिस्तानी कार्रवाइयों का कड़ा जवाब दिया। दोनों पक्षों के सैन्य अभियानों के महानिदेशकों के बीच 10 मई को बातचीत के बाद सैन्य संघर्ष को रोकने पर सहमति बनी थी।

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