देश की खबरें | प्राथमिकी से संबंधित सभी जमानत अर्जियां उच्च न्यायालय की एक ही पीठ के समक्ष जाएंगी : शीर्ष अदालत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि एक प्राथमिकी पर आधारित सभी जमानत अर्जियां उच्च न्यायालयों में एक ही न्यायाधीश या पीठ के समक्ष जानी चाहिए ताकि विचारों में एकरूपता सुनिश्चित हो सके।

नयी दिल्ली, सात फरवरी उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि एक प्राथमिकी पर आधारित सभी जमानत अर्जियां उच्च न्यायालयों में एक ही न्यायाधीश या पीठ के समक्ष जानी चाहिए ताकि विचारों में एकरूपता सुनिश्चित हो सके।

न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने शीर्ष अदालत के तीन न्यायाधीशों की पीठ के जुलाई 2023 के आदेश का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि आदेशों में एकरूपता के लिए एक प्राथमिकी से संबंधित सभी मामलों को उच्च न्यायालय के एक ही न्यायाधीश के समक्ष भेजना उचित है।

पीठ ने कहा, ‘‘इसलिए हम स्पष्ट करते हैं कि यदि किसी विशेष उच्च न्यायालय में जमानत अर्जियां अलग-अलग एकल न्यायाधीशों/पीठों को भेजी जाती हैं, तो उस स्थिति में एक प्राथमिकी से संबंधित सभी अर्जियों को एक न्यायाधीश/एक पीठ के समक्ष रखा जाना चाहिए।’’

अदालत ने कहा कि इससे एक प्राथमिकी से संबंधित विभिन्न अर्जियों पर सुनाए गए आदेशों में एकरूपता सुनिश्चित होगी। हालांकि, यह निर्देश तब लागू नहीं होगा जब रोस्टर में बदलाव के कारण जमानत के मामलों पर गौर करने वाले न्यायाधीश जमानत के मामलों की नहीं बल्कि अन्य मामलों की सुनवाई करेंगे।

अदालत ने कहा, ‘‘हालांकि, हम उम्मीद करते हैं कि विचारों में एकरूपता बनाए रखने के लिए, बाद में दायर अर्जियों पर सुनवाई करने वाले न्यायाधीश, उसी प्राथमिकी से संबंधित जमानत अर्जियों पर सुनवाई करने वाले पहले के न्यायाधीशों द्वारा जताए गए विचारों को उचित महत्व देंगे।’’

पीठ ने यह आदेश उस याचिका पर पारित किया जिसमें कहा गया था कि याचिकाकर्ता की जमानत अर्जी पिछले तीन महीने से झारखंड उच्च न्यायालय में लंबित है।

याचिकाकर्ता के वकील ने उच्च न्यायालय में उसी न्यायाधीश के समक्ष लंबित मामले पर शीर्ष अदालत के आदेश का हवाला दिया और दलील दी कि उनके मुवक्किल की जमानत अर्जी उच्च न्यायालय के एक अन्य न्यायाधीश के समक्ष रखी गई थी, जबकि एक सह-आरोपी के मामले में एक अलग न्यायाधीश ने आदेश पारित किया था।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि एक ही प्राथमिकी से संबंधित अर्जियों को अलग-अलग पीठों को सौंपने से एक विषम स्थिति पैदा हो गई, जहां कुछ पीठों ने जमानत दे दी और अन्य ने अलग दृष्टिकोण अपनाया।

पीठ ने कहा कि अधिकांश उच्च न्यायालयों में रोस्टर प्रणाली का पालन किया जाता है और एक निश्चित अवधि के बाद न्यायाधीशों की नियुक्ति बदल जाती है। पीठ ने कहा कि जमानत मामलों की सुनवाई करने वाले एकल न्यायाधीश अगले रोस्टर में पीठ का हिस्सा हो सकते हैं।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

MI vs CSK, IPL 2026 33rd Match Toss Winner Prediction: वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नई सुपरकिंग्स के बीच कौन होगा टॉस का बॉस? मैच से पहले जानें कौनसी टीम मार सकती हैं बाजी

Satta Bazar Mein Aaj Kaunsi Team Favourite? वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नई सुपरकिंग्स के बीच रोमांचक मुकाबले को लेकर सट्टा बाजार का माहौल गर्म, मैच के दिन ये टीम बनी फेवरेट

Chhattisgarh Horror: छत्तीसगढ़ में रूह कंपा देने वाली वारदात, पत्नी की हत्या कर कटा हुआ सिर लेकर गांव में घूमा शख्स; पुलिस ने किया गिरफ्तार

MI vs CSK, IPL 2026 33rd Match Stats And Preview: मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नई सुपरकिंग्स मुकाबले के बीच आज होगा रोमांचक मुकाबला, आज के मैच में बन सकते हैं ये अनोखे रिकॉर्ड