देश की खबरें | सुरंग में फंसे सभी 41 श्रमिक 16 दिन बाद सकुशल बाहर आए

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तराखंड में सिलक्यारा सुरंग में करीब 17 दिन तक फंसे रहे सभी 41 श्रमिकों को विभिन्न एजेंसियों के संयुक्त बचाव अभियान के तहत मंगलवार को सकुशल बाहर निकाल लिया गया ।

उत्तरकाशी, 28 नवंबर उत्तराखंड में सिलक्यारा सुरंग में करीब 17 दिन तक फंसे रहे सभी 41 श्रमिकों को विभिन्न एजेंसियों के संयुक्त बचाव अभियान के तहत मंगलवार को सकुशल बाहर निकाल लिया गया ।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार 60 मीटर के बचाव शॉफ्ट में स्टील के पाइप से इन मजदूरों को बिना पहिये वाले स्ट्रेचर के बाहर निकाला गया।

अधिकारियों ने बताया कि श्रमिकों को एक-एक करके 800 मिमी के उन पाइपों से बनाए गए रास्ते से बाहर निकाला गया जिन्हें अवरूद्ध सुरंग में फैले 60 मीटर मलबे में ड्रिल करके अंदर डाला गया था ।

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के जवानों द्वारा मजदूरों को बाहर निकाले जाने के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री जनरल (सेवानिवृत्त) वीके सिंह भी मौजूद रहे ।

बाहर निकल रहे श्रमिकों को मुख्यमंत्री ने अपने गले लगाया तथा उनसे बातचीत की । बचाव कार्य में जुटे लोगों के साहस की भी उन्होंने जमकर सराहना की ।

मजदूरों को बाहर निकाले जाने के बाद सुरंग के बाहर खड़ी एंबुलेंस के जरिए उन्हें सिलक्यारा से 30 किलोमीटर दूर चिन्यालीसौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया जहां श्रमिकों के लिए 41 बिस्तरों का वार्ड तैयार रखा था ।

इन मजदूरों के बाहर निकलने पर वहां खुशी का माहौल बन गया । लोगों ने एक दूसरे को गले लगाया। कुछ स्थानीय लोगों ने पटाखे भी छोड़े। सुरंग के बाहर कुछ लोगों ने ‘हर हर महादेव’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाये। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और धामी के प्रशंसा में भी नारे लगाये।

वहां से मजदूरों को सामुदायिक स्वास्थ्य ले जाये जाने से पहले उनका सुरंग के अंदर त्वरित स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।

चारधाम यात्रा मार्ग पर निर्माणाधीन साढ़े चार किलोमीटर लंबी सिलक्यारा—बड़कोट सुरंग के 12 नवंबर को एक हिस्सा ढहने से उसमें फंस गए श्रमिकों को निकालने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चला रहे बचावकर्मियों को 17 वें दिन यह सफलता मिली ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी श्रमिक की स्थिति नाजुक नहीं है लेकिन श्रमिकों को घर भेजे जाने से पहले उन्हें कुछ समय के लिए चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाएगा । उन्होंने कहा कि सबसे छोटे श्रमिक को सबसे पहले बाहर निकाला गया ।

प्रधानमंत्री मोदी ने सिलक्यारा अभियान की सफलता के लिए बचावकर्मियों की सराहना की । उन्होंने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैं इस बचाव अभियान से जुड़े सभी लोगों के जज्बे को सलाम करता हूं । उनकी बहादुरी और संकल्पशक्ति ने हमारे श्रमिक भाइयों को नया जीवन दिया है । इस मिशन में शामिल हर किसी ने मानवता और टीमवर्क की एक अदभुत मिसाल पेश की है ।’’

उन्होंने इस बात पर भी संतोष जताया , ‘‘ लंबे इंतजार के बाद अब हमारे ये साथी अपने प्रियजनों से मिलेंगे ।’’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस मिशन की सफलता पर बधाई दी है ।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि श्रमिकों और उनके परिजनों के चेहरे की खुशी ही उनकी 'ईगास और बग्वाल'(दीवाली के दस दिन बाद पहाड़ों में मनाई जाने वाली दीवाली) है ।

उन्होंने अभियान के सफल होने का श्रेय बचाव दल की तत्परता, तकनीक का सहयोग, अंदर फंसे श्रमिक बंधुओं की जीवटता, प्रधानमंत्री द्वारा की जा रही पल- पल निगरानी और बौखनाग देवता की कृपा को दिया ।

उन्होंने कहा कि बचाव अभियान से जुड़े एक-एक सदस्य का वह हृदय से आभार प्रकट करते हैं जिन्होंने देवदूत बनकर इस अभियान को सफल बनाया।

बाद में मीडिया से बातचीत में धामी ने कहा कि सिलक्यारा सुरंग में फंसे रहे सभी श्रमिकों को सरकार एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता देगी।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा श्रमिकों के अस्पताल में इलाज और उनके घर जाने तक की पूरी व्यवस्था भी सरकार द्वारा की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बचाव अभियान की सफलता के लिए स्थानीय देवता बाबा बौखनाग की कृपा को भी श्रेय दिया और कहा कि सिलक्यारा में उनका भव्य मंदिर बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने बाबा बौखनाग का मंदिर बनाने की मांग उठाई है जिसे सरकार पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जल्द मंदिर निर्माण की कार्रवाई शुरू कर दी जाए।

सोलह दिन कई केंद्रीय और राज्य एजेंसियों द्वारा युद्धस्तर पर चलाए गए अभियान में कई बाधाएं आयीं लेकिन अंतत: सफलता हाथ लगी । सुरंग में मलबा हटाने के लिए सबसे पहले जेसीबी लगाई गई लेकिन ऊपर से मलबा गिरने के कारण इसमें सफलता नहीं मिली जिसके बाद अमेरिकी ऑगर मशीन मंगाकर मलबे में ‘ड्रिलिंग’ शुरू की गई।

हांलांकि, मलबे के अंदर 47 मीटर ड्रिलिंग करने के बाद ऑगर मशीन के हिस्से मलबे के अंदर फंस गए और बचाव अभियान में बाधा आ गयी । मशीन के हिस्सों को हैदराबाद से प्लाज्मा कटर मंगाकर काटकर अलग किया गया और उसके बाद सोमवार को 'रैट होल माइनिंग' तकनीक की मदद से हाथ से ड्रिलिंग शुरू की गई जिसके बाद मंगलवार को मलबे में पाइप को आरपार करने में सफलता मिल गयी ।

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