देश की खबरें | एआईएमपीएलबी ने पूजा स्थल अधिनियम 1991 को चुनौती देने वाली याचिकाओं के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के कानून के कुछ प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया है।
नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के कानून के कुछ प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया है।
इस कानून के तहत 15 अगस्त, 1947 को धार्मिक स्थलों की जो स्थिति थी या उसका जो चरित्र था, उसमें बदलाव के लिए याचिका दायर करना या दावा करना निषिद्ध किया गया है।
अपनी वादकालीन याचिका में एआईएमपीएलबी ने शीर्ष अदालत को बताया कि पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 भारतीय राजनीति के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के अनुरूप एक ‘प्रगतिशील कानून’ है और विभिन्न वर्गों के लोगों के बीच सद्भाव, सार्वजनिक शांति और समरसता को बढ़ावा देता है।
प्रधान न्यायाधीश उदय उमेश ललित की अध्यक्षता वाली पीठ 11 अक्टूबर को 1991 के कानून के कुछ प्रावधानों की वैधता पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करने वाली है।
मुस्लिम संगठन ने अधिवक्ता एमआर शमशाद के माध्यम से दायर अपनी अर्जी में दलील दी है कि यह अधिनियम लोगों के किसी भी वर्ग के सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता है और यह संविधान की मूलभूत विशेषताओं पर आधारित है, जो संशोधन योग्य नहीं हैं।
एआईएमपीएलबी ने कहा है कि उक्त अधिनियम को निरस्त करने या इसके मूल उद्देश्यों और/या सिद्धांतों को नष्ट करने का कोई भी प्रयास ‘असंवैधानिक और अमान्य’ होगा।
'विश्व भद्र पुर्जारी पुरोहित महासंघ' और अन्य के मामले में दायर हस्तक्षेप याचिका में दावा किया गया है कि कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई से केवल जमीनी स्तर पर समस्याएं पैदा होंगी। बोर्ड ने आरोप लगाया है कि वादकारियों का एक ‘‘राजनीतिक एजेंडा’’ है।
याचिका में कहा गया है कि इस अधिनियम की परिकल्पना विभिन्न वर्गों के लोगों के बीच सद्भाव को बढ़ावा देने और सार्वजनिक व्यवस्था के उल्लंघन को रोकने तथा सार्वजनिक शांति और सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए की गई है।
एआईएमपीएलबी का दावा है कि इतिहास में ऐसे असंख्य उदाहरण हैं जहां जैन और बौद्ध पूजा स्थलों को हिंदू मंदिरों में, मुस्लिम पूजा स्थलों को गुरुद्वारों में तथा हिंदू पूजा स्थलों को मस्जिदों में परिवर्तित कर दिया गया है।
मुस्लिम निकाय ने आगे कहा कि अधिनियम का उद्देश्य पूजा स्थलों से संबंधित पुराने दावों को समाप्त करना था।
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