सिडनी, आठ मार्च (द कन्वरसेशन) क्या होगा यदि हमने आपसे कहा कि चैटजीपीटी जैसी कृत्रिम मेधा (एआई) प्रणाली वास्तव में चीजों को सीखती नहीं है? हमने जिन लोगों से बात की, उनमें से कई लोग यह सुनकर वाकई हैरान रह गए।
यहां तक कि एआई प्रणाली भी अक्सर आपको विश्वास के साथ बतायेगी कि ये सीखने की प्रणालियां हैं। कई रिपोर्ट और यहां तक कि अकादमिक दस्तावेज भी यही कहते हैं। लेकिन यह एक गलत धारणा के कारण है - या यूं कहें कि एआई में ‘‘सीखने’’ से हमारा क्या मतलब है।
फिर भी, अधिक सटीक रूप से यह समझना कि एआई प्रणाली को कैसे और कब सीखते हैं (और कब नहीं सीखते हैं)।
एआई प्रणाली सीखती नहीं है – कम से कम इंसानों की तरह तो नहीं।
एआई के बारे में कई गलतफहमियां ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से पैदा होती हैं जिनका मनुष्यों पर लागू होने पर एक निश्चित अर्थ होता है, जैसे सीखना। हम जानते हैं कि मनुष्य कैसे सीखते हैं, क्योंकि हम हर समय ऐसा करते हैं। हमारे पास अनुभव होते हैं; हम कुछ ऐसा करते हैं, जो विफल हो जाता है; हम कुछ नया देखते हैं; हम कुछ आश्चर्यजनक पढ़ते हैं; और इस प्रकार हम याद रखते हैं, हम चीजों को करने के तरीके को अद्यतन या बदलते हैं।
एआई प्रणाली इस तरह से नहीं सीखती हैं। एआई प्रणाली को किसी खास अनुभव से नहीं सीखते हैं, जिससे वे चीजों को उसी तरह समझ सकें जिस तरह हम इंसान समझते हैं। बल्कि ये डाटा से पैटर्न को ‘एनकोड’ करके “सीखते” हैं - केवल गणित का उपयोग करके। यह प्रशिक्षण प्रक्रिया के दौरान होता है, जब उन्हें बनाया जाता है।
बड़े मॉडल लें, जैसे कि जीपीटी-4, वह तकनीक जो चैटजीपीटी को शक्ति प्रदान करती है।
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