सलेम, पांच दिसंबर केंद्र के तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के बाहर प्रदर्शन कर रहे किसानों को अपना समर्थन देते हुए द्रमुक ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया कि वह उनके साथ वार्ता करें और तीनों कानूनों को वापस लें।
द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने किसानों को अपना समर्थन देते हुए राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन किया। ये किसान करीब 10 दिनों से राष्ट्रीय राजधानी के बाहद धरना दे रहे हैं।
यह भी पढ़े | Farmers Protest: अभिनेता दिलजीत दोसांझ की मांग, कहा- किसानों की मांगे माने सरकार.
तमिलनाडु विधानसभा में नेता विपक्ष स्टालिन ने यहां प्रदर्शन का नेतृत्व किया जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। यह मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी का गृह जिला भी है।
अपने संबोधन में स्टालिन ने कहा कि किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आश्वासन के अभाव समेत कई अन्य मांगों को लेकर कानून का विरोध कर रहे हैं।
यह भी पढ़े | West Bengal: आसनसोल में बीजेपी की रैली पर हमला- 7 कार्यकर्ता घायल, टीएमसी पर आरोप.
स्टालिन ने कहा, “दलालों को हटाने के नाम पर यह कानून किसानों को उन बड़े कारोबारियों, बहुराष्ट्रीय निर्यातकों और संस्थाओं के गुलाम बना देंगे जिनके पास बड़े गोदाम हैं।”
उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या इसमें प्रत्यक्ष खरीद केंद्र बरकरार रहेंगे और उचित दर की दुकानों से आवश्यक वस्तुओं का वितरण आदि भी जारी रहेगा?
स्टालिन ने पूछा कि कोविड-19 महामारी के दौरान इन कानूनों को पारित कराने की “हड़बड़ी” क्या थी?
उन्होंने जानना चाहा कि क्या इस कानून में कृषि कर्ज, खाद सब्सिडी और खेतिहर मजदूरों के लिये न्यूनतम रोजगार गारंटी का प्रावधान है।
उन्होंने कहा, “इनमें से एक भी नहीं है। इसलिये किसान इसका विरोध कर रहे हैं और हम भी।”
उन्होंने कहा, “जब तक तीनों कानून वापस नहीं ले लिये जाते, प्रदर्शन जारी रहना चाहिए। प्रधानमंत्री को किसानों को आमंत्रित कर उनसे बातचीत करनी चाहिए।”
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY