नयी दिल्ली, 17 फरवरी भारत, अमेरिका के जवाबी शुल्क को लेकर वहां कानून बनने के बाद इस बारे में गौर करेगा। एक अधिकारी ने सोमवार को यह बात कही।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की है।
अधिकारी ने कहा कि हालांकि वे जवाबी शुल्क दर से संबंधित विधेयक की बातों से अवगत हैं, लेकिन अधिनियम बनने के बाद यह क्या आकार लेगा, इसपर चीजें साफ नहीं हैं।
यह पूछे जाने पर कि क्या भारत विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में अमेरिका के जवाबी शुल्क को चुनौती देने की योजना बना रहा है, अधिकारी ने कहा, ‘‘हम जवाबी शुल्क अधिनियम की रूपरेखा नहीं जानते हैं... इसलिए अधिनियम के अमल में आने के बाद ही हम उस पर निर्णय करेंगे।’’
अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों की राय है कि ये शुल्क वास्तव में डब्ल्यूटीओ नियमों के अनुरूप नहीं हैं।
अमेरिका ने इस्पात और एल्युमीनियम पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने का ऐलान किया है।
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि अमेरिका जो जवाबी शुल्क लगाएगा, वह उस कानून के तहत है जो उन्होंने अपनी कांग्रेस में पेश किया है और यह विधेयक उनकी प्रवर समिति के पास है।
अधिकारी ने कहा, ‘‘जब यह लागू होगा तब हम देखेंगे।'' उन्होंने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय उद्योग जगत के साथ संबंधित पक्षों के साथ परामर्श करने की योजना बना रहा है। शुल्क लगाये जाने के बाद लागत लाभ विश्लेषण किया जाएगा।’’
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