ताजा खबरें | जल जीवन मिशन की घोषणा के बाद 6.40 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल से जल कनेक्शन दिए गए : सरकार

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. सरकार ने संसद की एक समिति को बताया कि जल जीवन मिशन की घोषणा के बाद 6.40 करोड़ ग्रामीण परिवारों (33.40 प्रतिशत) को नल से जल कनेक्शन उपलब्ध कराये गए हैं।

नयी दिल्ली, 10 फरवरी सरकार ने संसद की एक समिति को बताया कि जल जीवन मिशन की घोषणा के बाद 6.40 करोड़ ग्रामीण परिवारों (33.40 प्रतिशत) को नल से जल कनेक्शन उपलब्ध कराये गए हैं।

सरकार ने बताया कि अब तक देश भर के 19.14 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 9.63 करोड़ (50.30 प्रतिशत) परिवारों के पास पीने योग्य जल की आपूर्ति होने की सूचना है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद परबतभाई सवाभाई पटेल की अध्यक्षता वाली जल संसाधन संबंधी स्थायी समिति के 16वें प्रतिवेदन में अंतर्विष्ट सिफारिशों पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई रिपोर्ट में यह बात कही गई है। यह रिपोर्ट शुक्रवार को लोकसभा में पेश की गई।

जल संसाधन विभाग ने समिति को मिशन के बारे में बताया कि गोवा, हरियाणा और तेलंगाना राज्य तथा अंडमान निकोबार, दादरा नगर हवेली एवं दमन दीव और पुडुचेरी संघ राज्य क्षेत्रों ने सभी ग्रामीण परिवारों को नल से जल की आपूर्ति उपलब्ध करा दी है।

इसमें कहा गया है कि आज तक देश के 108 जिलों और 1.53 लाख गांवों के प्रत्येक ग्रामीण परिवारों को अपने घरों मे नल से जल मिलना शुरू हो गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकारों ने कार्यक्रम के कार्यान्वयन के दौरान अन्य बातों के साथ असमान भौगोलिक भूभाग, बिखड़ी हुई ग्रामीण बसावटों, भूजल स्थिति, प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों, संवैधानिक/अन्य मंजूरी प्राप्त करने में देरी, कोविड महामारी, मुद्रास्फीति जैसे बाधाओं को इंगित किया है जिससे कार्यक्रम के कार्यान्वयन और निधियों की उपयोगिता में विलंब हो रहा है।

इसके अलावा राज्य द्वारा समतुल्य निधि जारी करने में विलंब और उनकी अनुपलब्धता के कारण भी निधि के उपयोग में देरी हुई है।

विभाग ने बताया कि इस मुद्दे को हल करने के लिये सम्मेलनों, कार्यशालाओं, वीडियो कांफ्रेस के माध्यम से समीक्षा बैठकें और क्षेत्र का दौरा समय समय पर आयोजित की जा रही हैं ।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019-20 में जल जीवन मिशन के लिये 10,000.66 करोड़ रुपये आवंटित किये गए और पूरी राशि का उपयोग हुआ। वर्ष 2021-22 में 11 हजार करोड़ रूपये आवंटित हुए और इनका उपयोग किया गया। वर्ष 2021-22 में मिशन के लिये 45,011 करोड़ रूपये आवंटित हुए और 40,125 करोड़ रुपये का उपयोग हुआ।

रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने इस बात पर ध्यान दिया कि वर्ष 2021-22 में जल जीवन मिशन के तहत बजट अनुमान में 50,011 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे जिसे संशोधित अनुमान में घटाकर 45,011 करोड़ रुपये कर दिया गया और वास्तविक खर्च केवल 28,238 करोड़ रुपये था।

समिति ने यह भी पाया कि केवल हिमाचल प्रदेश, मणिपुर और मेघालय ने केंद्रीय आवंटन का शत प्रतिशत उपयोग किया जबकि 11 राज्यों त्रिपुरा, अरूणाचल प्रदेश, गुजरात, केरल, सिक्किम, नगालैंड, असम, ओडिशा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और मिजोरम ने 50 प्रतिशत से 75 प्रतिशत राशि का उपयोग किया।

कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पंजाब, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने 25 प्रतशत से कम राशि का उपयोग किया।

समिति ने कहा कि निधियों का कम उपयोग वित्तीय विवेक और राजकोषीय अनुशासन की कमी को दर्शाता है। समिति ने सरकार से इस संबंध में की गई कार्रवाई से अवगत कराने का आग्रह किया था।

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