जरुरी जानकारी | जलवायु परिवर्तन को लेकर कार्रवाई करने से भारत के लिए 11,000 अरब डॉलर के अवसर पैदा होंगे: रिपोर्ट
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. डेलॉयट इकनॉमिक्स इंस्टिट्यूट की एक नयी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को निरंतर जलवायु परिवर्तन के कारण अगले 50 वर्षों में 35,000 अरब डॉलर की आर्थिक क्षमता के नुकसान को रोकने के लिए इस समय कार्रवाई करनी चाहिए।
नयी दिल्ली, 29 अगस्त डेलॉयट इकनॉमिक्स इंस्टिट्यूट की एक नयी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को निरंतर जलवायु परिवर्तन के कारण अगले 50 वर्षों में 35,000 अरब डॉलर की आर्थिक क्षमता के नुकसान को रोकने के लिए इस समय कार्रवाई करनी चाहिए।
'इंडियाज टर्निंग पॉइंट: हाऊ क्लाइमेट एक्शन कैन ड्राइव अवर इकनॉमिक फ्यूचर' शीर्षक वाली रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत आर्थिक क्षमता के नुकसान के बजाय कैसे इसी अवधि में, बढ़ते वैश्विक तापमान को सीमित करके और दुनिया का 'डीकार्बनाइजेशन का निर्यात' कर अपनी क्षमता को हासिल करके 11,000 अरब डॉलर का आर्थिक मूल्य प्राप्त कर सकता है।
डीकार्बनाइजेशन का मतलब कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम करना होता है।
डेलॉइट इंडिया के चेयरपर्सन अतुल धवन ने कहा, "हमारे पास जलवायु परिवर्तन के रुख के बदलने की खातिर जरूरी फैसले लेने को 10 वर्ष की छोटी सी अवधि है। कोई भी जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से सुरक्षित नहीं है, लेकिन भारत के लिए यह नेतृत्व करने का और यह दिखाने का अवसर है कि कैसे जलवायु परिवर्तन को लेकर कार्रवाई लागत से जुड़ी नहीं है बल्कि इसका संबंध सतत आर्थिक वृद्धि से है।"
उन्होंने कहा कि ऐसे में जब भारत 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना चाहता है, विकास को गति देने के लिहाज से ना केवल विदेशी एवं घरेलू निवेश महत्वपूर्ण होंगे, बल्कि देश को अपनी महत्वाकांक्षाओं को जलवायु विकल्पों के साथ जोड़ने के लिए भी इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए।
रिपोर्ट के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन को लेकर कोई कार्रवाई ना किए जाने से, इस सदी के अंत तक औसत वैश्विक तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक की वृद्धि हो सकती है।
इसमें कहा गया है कि इससे लोगों के लिए जीना और काम करना कठिन हो जाएगा, क्योंकि जब समुद्र का स्तर बढ़ता है, फसल की पैदावार गिरती है, बुनियादी ढांचे को नुकसान होता है, और अन्य चुनौतियाँ सामने आती हैं, जिनसे हाल के दशकों में देश द्वारा हासिल की गयी आर्थिक प्रगति एवं समृद्धि खतरे में पड़ जाएगी।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)