जरुरी जानकारी | देश में प्राकृतिक संसाधनों का लेखा-जोखा हो रहा तैयार, हरित आर्थिक वृद्धि को मिलेगी रफ्तार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. सरकारी लेखांकन मानक सलाहकार बोर्ड (गसब) खनिज एवं ऊर्जा समेत विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों का लेखा-जोखा तैयार कर रहा है। इन आंकड़ों के आधार पर सरकार न केवल सुविचारित नीतिगत निर्णय ले सकेगी बल्कि इससे हरित जीडीपी के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।

नयी दिल्ली, 15 जुलाई सरकारी लेखांकन मानक सलाहकार बोर्ड (गसब) खनिज एवं ऊर्जा समेत विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों का लेखा-जोखा तैयार कर रहा है। इन आंकड़ों के आधार पर सरकार न केवल सुविचारित नीतिगत निर्णय ले सकेगी बल्कि इससे हरित जीडीपी के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।

एक वरिष्ठ लेखा परीक्षक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि राज्यों के प्राकृतिक संसाधनों के सही और जिम्मेदार उपयोग में मदद के लिये एक लेखांकन प्रणाली विकसित करने का प्रयास किया गया है। इससे सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा।

गसब के चेयरमैन एवं उप नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के श्रीनिवासन ने इस नई पहल के बारे में यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘गसब चार प्रमुख प्राकृतिक संसाधनों...खनिज और ऊर्जा संसाधन, जल संसाधन, भूमि संसाधन और वानिकी एवं वन्य जीव संसाधनों का लेखा तैयार कर रहा है। इस पहल का मकसद संसाधनों की उपलब्धता, उनसे मिलने वाले राजस्व की संभावना, संबद्ध लागत और अगली पीढ़ी को ध्यान में रखते हुए सतत विकास को आगे बढ़ाना है।’’

गसब की इस पहल से राज्यों में मौजूद संसाधनों के बारे में समूचा ब्योरा एक जगह उपलब्ध होगा तथा रॉयल्टी दरों के आकलन के साथ राज्यों के राजस्व हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। साथ ही यह संसाधनों के सतत उपयोग तथा भविष्य के राजस्व का सटीक आकलन के साथ अवैध खनन रोकने में भी मददगार होगा।

आधिकारिक बयान के अनुसार गसब ने जुलाई 2020 में एनआरए पर एक अवधारणा पत्र तैयार किया था जिसमें लघु, मध्यम और दीर्घकालीन लक्ष्यों की परिकल्पना की गयी है। इसका पहला लक्ष्य खनिज और ऊर्जा संसाधनों पर संपत्ति लेखा-जोखा तैयार करना है।

सभी 28 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश (जम्मू-कश्मीर) के लिये 2020-21 का संपत्ति खाता तैयार कर लिया गया है। इसमें 34 प्रमुख खनिजों, 58 लघु खनिजों एवं सभी चार जीवाश्म ईंधनों का पूरा विवरण दिया गया है।

श्रीनिवासन ने कहा कि खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों के बारे में रिपोर्ट तैयार करने का काम तेजी से जारी है और इसके इस साल नवंबर तक आ जाने की उम्मीद है। इसमें 2019-20 से लेकर 2021-22 तक की अवधि को शामिल किया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि खनिज और ऊर्जा संसाधनों के बारे में पूरी जानकारी डैशबोर्ड पर भी उपलब्ध होगी। श्रीनिवासन ने कहा, ‘‘राज्यों में उपलब्ध खनिज और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के आंकड़ों से न केवल सरकार सोच-विचार कर नीतिगत निर्णय ले सकेगी बल्कि इससे हरित जीडीपी के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।’’

मध्यम अवधि के लक्ष्य के तहत खनिज और ऊर्जा संसाधनों पर 2022-23 से 2024-25 तक के आंकड़ों के साथ जल, भूमि और वानिकी संसाधनों का लेखा-जोखा तैयार किया जाएगा।

भारत ने 25 सितंबर, 2016 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 'सतत विकास एजेंडा 2030' पर हस्ताक्षर किए थे। इसके अंतर्गत प्राकृतिक संसाधन लेखांकन की तैयारी जरूरी है। इसे 190 से अधिक देशों ने मंजूरी दी हुई है।

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