देश की खबरें | दिल्ली में आंधी से करीब 100 पेड़ उखड़े, विशेषज्ञों ने नगर निकाय की अनदेखी को बताया जिम्मेदार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार तड़के आई आंधी में 100 से 200 पेड़ उखड़ गए, जिससे पर्यावरणविदों के बीच अनियंत्रित शहरी विकास को लेकर नयी चिंता पैदा हो गई है।
नयी दिल्ली, दो मई राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार तड़के आई आंधी में 100 से 200 पेड़ उखड़ गए, जिससे पर्यावरणविदों के बीच अनियंत्रित शहरी विकास को लेकर नयी चिंता पैदा हो गई है।
शहर में भारी बारिश के कारण दिल्ली नगर निगम को पेड़ गिरने की 53 शिकायतें प्राप्त हुईं, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद को ऐसी 24 शिकायतें प्राप्त हुईं, जबकि लोक निर्माण विभाग को पेड़ों के उखड़ने या टहनियों के गिरने की कम से कम 200 शिकायतें प्राप्त हुईं।
दिल्ली के विभिन्न हिस्सों से अब भी पेड़ गिरने की खबरें आ रही हैं।
विशेषज्ञों ने पेड़ों के कमजोर होने के लिए उनके आधार पर अनियंत्रित कंक्रीट निर्माण को जिम्मेदार ठहराया।
दिल्ली के पर्यावरणविद् वरहीन खन्ना ने कहा, ‘‘पेड़ के आधार के चारों ओर लगा सीमेंट पेड़ को गिरने का कारण बनता है। यह पानी और हवा को जड़ों तक पहुंचने से रोकता है और तने को फैलने से रोकता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मानसून के दौरान, नमी बढ़ने के कारण पेड़ों के तने को फैलने की जरूरत होती है, लेकिन सीमेंट के कारण ऐसा नहीं हो पाता। जड़ें कमजोर हो जाती हैं, जिससे पेड़ अपना संतुलन खो देता है। अगर आस-पास खुदाई करने से जड़ें कट जाती हैं, तो गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
खन्ना ने गिरे हुए पेड़ों को स्वयं पनपने देने के बजाय उन्हें काटने और हटाने में जल्दबाजी करने के लिए नगर निकायों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘‘अधिकारियों के पास इन पेड़ों को बचाने के लिए संसाधन तो हैं, लेकिन इच्छाशक्ति की कमी है। मित्रवत् ढंग से थोड़ा समझाने और उदाहरण कायम करने से अधिकारियों को मनाया जा सकता है - और जब वे काम करते हैं तो सफलता दर अधिक होती है।’’
हरित कार्यकर्ता भवरीन कंधारी ने पर्यावरण विनाश के लिए वर्षों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा, ‘‘प्राथमिक कारणों में से एक है पेड़ों के आधार के आसपास अनियंत्रित कंक्रीट निर्माण, जो महत्वपूर्ण पोषक जड़ों के विकास को रोकता है और आधार को कमजोर करता है। निर्माण से संबंधित मिट्टी का संघनन, बार-बार खुदाई, और पुरानी जड़ प्रणाली समस्या को और भी बदतर बना देती है।’’
कंधारी ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के 2013 के आदेश में सभी प्राधिकारियों को पेड़ों के चारों ओर एक मीटर के दायरे से कंक्रीट हटाने का निर्देश दिया गया था - लेकिन इस निर्देश का अभी भी ठीक से पालन नहीं हो रहा है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘‘जब तक सरकार पेड़ों के स्वास्थ्य को अपनी शहरी योजना में शामिल नहीं करती और मौजूदा नियमों को लागू नहीं करती, तब तक ये घटनाएं बढ़ती ही रहेंगी।’’
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