देश की खबरें | बेटियों की सुरक्षा और संरक्षा के लिए 'आरोहिणी इनीशिएटिव' प्रशिक्षण एक फरवरी से

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तर प्रदेश सरकार राज्‍य के सभी 746 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में बेटियों की सुरक्षा और संरक्षा के लिए 'आरोहिणी इनीशिएटिव' प्रशिक्षण की शुरुआत करने जा रही है जिसके तहत वंचित वर्ग की बेटियों में उनके जीवन में होने वाली घटनाओं की समझ पैदा करने के साथ ही अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने के लिए सक्षम बनाने का प्रयास किया जाएगा। रविवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गयी।

लखनऊ, 29 जनवरी उत्तर प्रदेश सरकार राज्‍य के सभी 746 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में बेटियों की सुरक्षा और संरक्षा के लिए 'आरोहिणी इनीशिएटिव' प्रशिक्षण की शुरुआत करने जा रही है जिसके तहत वंचित वर्ग की बेटियों में उनके जीवन में होने वाली घटनाओं की समझ पैदा करने के साथ ही अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने के लिए सक्षम बनाने का प्रयास किया जाएगा। रविवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गयी।

बयान के अनुसार, बेटियों को सक्षम बनाने के लिए कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की पूर्णकालिक शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जो न सिर्फ बेटियों को शिक्षित करेंगी बल्कि उनके लिए मददगार भी होंगी। शिक्षकों का प्रशिक्षण एक फरवरी से लखनऊ में शुरू होगा।

बयान में महानिदेशक (स्कूल शिक्षा) विजय किरण आनंद ने बताया, ‘‘आरोहिणी कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जेंडर सेंसटाइजेशन (लैंगिक संवेदनशीलता पैदा करना) है जो कि तीन चरणों में होगा। इसके तहत पहले शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके लिए एक फरवरी से हर कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की दो शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके बाद ये शिक्षक विद्यालय की छात्राओं को शिक्षित करेंगी। शिक्षकों के साथ-साथ ये संस्था भी बेटियों को डिबेट एवं अन्य गतिविधियों के माध्यम से प्रोत्साहित करेगी। तीसरा, समुदाय के स्तर पर काम होगा। इसमें लोगों में लैंगिक संवेदनशीलता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।’’

बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत पूरे प्रदेश में 746 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय हैं, जिनमें से 56 को 12वीं कक्षा तक उच्चीकृत किया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी इस पूरे कार्यक्रम की समय-समय पर समीक्षा करेंगे।

‘स्टडी हॉल एजुकेशन फाउंडेशन’ की ओर से इस कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहीं प्रियंका ने बताया, ‘‘आरोहिणी जेंडर (लिंग) आधारित कार्यक्रम है। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में वंचित वर्ग की बेटियां पढ़ने आती हैं, जिनके परिवारों में लैंगिक भेद-भाव काफी ज्यादा होता है। इस कार्यक्रम के तहत हमारा उद्देश्य है कि हम बच्चियों को उनके जीवन के विषय में समझा पाएं और उन्हें उनकी लड़ाई के लिए खुद ही सशक्त बना सकें।’’ एक फरवरी से शुरू हो रहे कार्यक्रम में चयनित शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

समग्र शिक्षा अभियान और एनजीओ के बीच जो एमओयू हुआ है उसके अनुसार, संस्था द्वारा समस्त 746 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों से दो पूर्णकालिक शिक्षकों (1492 शिक्षकों को वरीयता के आधार पर) को राज्य स्तरीय बालिका सुरक्षा एवं संरक्षण तथा सामुदायिक जागरूकता के मुद्दे पर प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

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