देश की खबरें | आप सरकार आईएएस अधिकारियों को बना रही ‘बलि का बकरा’: कांग्रेस, शिअद

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चंडीगढ़, एक सितंबर कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने शुक्रवार को मांग की कि सभी ग्राम पंचायतों को भंग करने के फैसले के संबंध में दो आईएएस अधिकारियों को ‘बलि का बकरा’ बनाने की कोशिश करने के बजाय पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और संबंधित मंत्री को खुद इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

एक दिन पहले ही पंजाब सरकार ने अपने रुख को पलटते हुए उच्च न्यायालय में कहा था कि वह राज्य में सभी ग्राम पंचायतों को भंग करने की अपनी अधिसूचना वापस ले रही है। उसके कुछ ही घंटे बाद उसने इस फैसले को लेकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के दो वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया था।

ग्राम विकास एवं पंचायत मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने बृहस्पतिवार को कहा था कि राज्य सरकार ने ग्राम विकास एवं पंचायत विभाग के सचिव और निदेशक को पंचायतों को भंग करने के संबंध में ‘तकनीकी दृष्टि से त्रुटिपूर्ण निर्णय’ लेने को लेकर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को ‘नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए’’ और ‘सीधे-सीधे इस्तीफा’ दे देना चाहिए।

बाजवा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘ यह शर्मनाक है कि पंचायतों को भंग करने के फैसले पर दस्तखत करने वाले भगवंत मान ने खुद को और अपने मंत्री को बचाने के लिए दो नौकरशाहों को बलि का बकरा बनाया। यदि मुख्यमंत्री में नैतिकता बची है , उन्हें ही नैतिक जिम्मेदारी लेना चाहिए और इस्तीफा दे देना चाहिए।’’

वरिष्ठ शिअद नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी आप नीत पंजाब सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘पोलपट्टी खुल गयी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंचायत राज मंत्री लालजीत भुल्लर पंजाब में कार्यकाल पूरा होने से छह महीने पहले पंचायतों को भंग करने के फैसले पर दस्तखत करने और उसे लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि पंजाब की आप सरकार दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को निलंबित कर उन्हें बलि का बकरा बनाने का प्रयत्न कर रही है। असली गुनहगार पंचायत राज मंत्री और मुख्यमंत्री हैं जो पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के यह स्पष्ट करने के बाद पीछे हट गये कि वह इस फैसले को निरस्त करने जा रहा है।’’

मजीठिया ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमत्री और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को मान और भुल्लर को ‘‘इस तानाशाही फैसले से लोकतंत्र की हत्या करने’’ को लेकर उनके पद से बर्खास्त कर देना चाहिए।

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