देश की खबरें | उत्तराखंड में 395 गांव आपदा प्रभावितः उत्तराखंड सरकार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तराखंड सरकार ने बुधवार को राज्य विधानसभा को सूचित किया कि प्रदेश में 395 आपदा प्रभावित गांवों को चिन्हित किया गया है जिनमें से प्रथम चरण में 73 गांवों के पुनर्वास की योजना है ।
गैरसैंण, तीन मार्च उत्तराखंड सरकार ने बुधवार को राज्य विधानसभा को सूचित किया कि प्रदेश में 395 आपदा प्रभावित गांवों को चिन्हित किया गया है जिनमें से प्रथम चरण में 73 गांवों के पुनर्वास की योजना है ।
इस संबंध में एक चर्चा का जवाब देते हुए प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि आपदा प्रभावित चिन्हित 385 गांवों में से 215 का भूसर्वेंक्षण किया जा चुका है ।
उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में राज्य के 73 गांवों के पुनर्वास की योजना है जिनमें से फरवरी तक 29 गांवों को पुनर्वासित किया गया है।
मंत्री ने कहा कि हिमालय की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों के कारण आपदा का खतरा बना रहता है ।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन सचिव की अध्यक्षता में ग्लेशियरों के लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी का गठन किया है जो सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी ।
कौशिक ने कहा कि उत्तराखंड पहला राज्य है जो रूड़की स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के साथ मिलकर भूकंप के पूर्वचेतावनी तंत्र पर कार्य कर रहा है।
मंत्री ने कहा कि प्रदेश में एक ' डॉप्लर ' लगाया गया है तथा इस तरह का एक और लगाने की प्रक्रिया चल रही है जिससे बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं की समय से सूचना मिल सकेगी । वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान की मदद से गंगोत्री ग्लेशियर इलाके की निगरानी की जा रही है।
इससे पहले, नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने प्राकृतिक आपदाओं से सबक न लिए जाने पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि 2013 में केदारनाथ में ''हमारी व्यवस्था असहाय दिखी और उसके बाद 2021 में तपोवन हादसे में भी यही स्थिति दिखी । ''
उन्होंने कहा कि जहां केदारनाथ हादसे ने पूरे देश को झंकझोरा था वहीं तपोवन हादसे ने उत्तराखंड को झंकझोर दिया है ।
इस संबंध में पूर्व सूचना तंत्र की आवश्यकता पर जोर देते हुए हृदयेश ने कहा कि ऐसी व्यवस्था बनायी जानी चाहिए जिससे आपदा से पहले ही संकेत मिल जाएं और जन और धन की हानि रोकी जा सके।
उन्होंने क्षतिपूर्ति और पुनर्वास के मानकों को भी बेहतर बनाने की जरूरत बताई जिससे लोग अपने क्षेत्रों, खासतौर से, सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों से पलायन न करें ।
कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे की शुरूआत धारचूला के विधायक हरीश धामी ने की जिसपर ममता राकेश, करण माहरा, गोविंद सिंह कुंजवाल सहित अन्य सदस्यों ने भी अपनी बात रखी ।
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