देश की खबरें | शिवाजी के राज्याभिषेक की 350वीं वर्षगांठ: 115 पेंटिंग के जरिए उनके जीवन और विरासत को दर्शाया गया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मराठा शासक छत्रपति शिवाजी के भव्य राज्याभिषेक की 350वीं वर्षगांठ के अवसर पर राजधानी दिल्ली में एक मराठी पिता-पुत्र की जोड़ी द्वारा करीब 16 वर्षों की मेहनत से बनाए गए 115 तैल चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई है जिनमें मराठा योद्धा के जीवन और विरासत को दर्शाया गया है।

नयी दिल्ली, सात जून मराठा शासक छत्रपति शिवाजी के भव्य राज्याभिषेक की 350वीं वर्षगांठ के अवसर पर राजधानी दिल्ली में एक मराठी पिता-पुत्र की जोड़ी द्वारा करीब 16 वर्षों की मेहनत से बनाए गए 115 तैल चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई है जिनमें मराठा योद्धा के जीवन और विरासत को दर्शाया गया है।

केंद्रीय संस्कृति सचिव गोविंद मोहन ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (एनजीएमए) में आयोजित इस प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसमें दीपक गोरे के संग्रह को प्रदर्शित किया गया। मोहन ने बताया कि गोरे ने इस संग्रह को संस्कृति मंत्रालय को "उपहार में देने पर सहमति व्यक्त की है"। इसे दिल्ली में स्थायी रूप से संजोए जाने की योजना है।

संस्कृति सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष 'नौसेना दिवस' के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया था, जहां उन्होंने गोरे की पेंटिंग देखी थी। ‘‘उन्होंने इसकी प्रशंसा करते हुए इस 'संग्रह की प्रदर्शनी' लगाने की बात कही थी। इसके छह महीने बाद आज दिल्ली में यह प्रदर्शनी आप सबके सामने है। ’’

उन्होंने आगे कहा, "गोरे की सहमति के बाद अब हम इस संग्रह को अपने पास रखेंगे। उन्होंने इसे संस्कृति मंत्रालय को देने पर सहमति जताई है। आईजीएनसीए मूल रूप से हमारी तरफ से वह एजेंसी होगी जो इस संग्रह को प्रदर्शित करेगी।"

मोहन ने कहा कि लोकसभा चुनाव में 293 सीटें जीतकर भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार हैं। इसी शपथ ग्रहण समारोह की पृष्ठभूमि में ही यह प्रदर्शनी आयोजित की गई है।

गोरे को पेंटिग को लेकर जिज्ञासा 1996 में लंदन और पेरिस के संग्रहालयों की यात्रा के दौरान हुई। यूरोपीय तेल चित्रों की भव्यता को देखने के बाद, उन्होंने स्थानीय संस्कृति और कथाओं को दर्शाते हुए पेंटिंग बनाने की कल्पना की। इस परियोजना की शुरुआत 2000 में हुई थी और प्रसिद्ध पिता-पुत्र कलाकार जोड़ी श्रीकांत चौगुले और गौतम चौगुले के साथ साझेदारी करते हुए गोरे ने इसे शुरू किया। फिर प्रसिद्ध इतिहासकार बलवंत मोरेश्वर पुरंदरे से मुलाकात के बाद उन्होंने शिवाजी की विरासत पर काम करने का मन बनाया। 2016 में ये परियोजना पूरी हुई और 115 उत्कृष्ट कृतियों के संग्रह का अनावरण किया गया।

दिल्ली में इस अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के सदस्य सचिव सच्चिदानंद जोशी, एनजीएमए के महानिदेशक संजीव किशोर गौतम, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल और भारतीय नौसेना के कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

स्वाती

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