जरुरी जानकारी | प्राकृतिक गैस के दाम में 25 प्रतिशत कटौती, रिकार्ड निचले स्तर पर पहुंचे दाम

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. सरकार ने बुधवार को प्राकृतिक गैस के दाम में 25 प्रतिशत कटौती कर दी। इस कटौती के बाद गैस के दाम 1.79 डालर के रिकार्ड निचले स्तर पर पहुंच गये। इसका असर सार्वजनिक क्षेत्र की गैस उत्पादक कंपनी ओएनजीसी, आयल इंडिया के राजस्व पर पड़ेगा।

नयी दिल्ली, 30 सितंबर सरकार ने बुधवार को प्राकृतिक गैस के दाम में 25 प्रतिशत कटौती कर दी। इस कटौती के बाद गैस के दाम 1.79 डालर के रिकार्ड निचले स्तर पर पहुंच गये। इसका असर सार्वजनिक क्षेत्र की गैस उत्पादक कंपनी ओएनजीसी, आयल इंडिया के राजस्व पर पड़ेगा।

पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ट (पीपीएसी) ने कहा कि प्राकृतिक गैस के दाम घटाकर मौजूदा 2.39 डालर से घटाकर 1.79 डालर प्रति दस लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमबीटीयू) कर दिये गये हैं।

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नये दाम एक अक्टूबर से छह माह के लिये लागू रहेंगे। उसके बाद फिर इनकी समीक्षा होगी।

प्राकृतिक गैस के दाम में इससे पहले अप्रैल में इसमें 26 प्रतिशत की कटौती की गई थी। गहरे समुद्र जैसे मुश्किल क्षेत्रों से गैस का उत्पादन करने वाले उत्पादकों के लिये भी गैस का दाम 5.61 डालर से घटाकर 4.06 डालर प्रति एमबीटीयू कर दिया गया है।

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देश में प्राकृतिक गैस के दाम हर छह महीने में तय किये जाते हैं। हर साल एक अप्रैल और एक अक्ट्रबर को को इसकी समीक्षा की जाती है। ये दाम अमेरिका, कनाडा और रूस जैसे गैस अधिशेष वाले देशों में चल रहे दाम के आधार पर तय किये जाते हैं।

प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल बिजली घरों, उर्वरक कारखानों और वाहनों के लिये सीएनजी बनाने में किया जाता है। गैस के दाम रिकार्ड निचले स्तर पर पहुंचने से जहां एक तरफ ओएनजीसी और आयल इंडिया जैसे प्रमुख गैस उत्पादक कंपनियों को राजस्व का नुकसान होगा वहीं दूसरी तरफ बिजल कारखानों की उत्पादन लागत कम होगी। सीएनजी और पाइप के जरिये घरों में पहुंचने वाली प्राकृतिक गैस के दाम कम होंगे।

ओएनजीसी सूत्रों ने कहा कि 2017- 18 में गैस कारोबार में उसे 4,272 करोड़ रुपये का घाटा हुआ जो कि चालू वित्त वर्ष के दौरान 6,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाने का अनुमान है। सरकार ने नवंबर 2014 में प्राकृतिक गैस का दाम तय करने का नया फार्मूला तय किया। यह फार्मूला उन देशों के प्रचलित दाम पर आधारित है जहां गैस का उत्पादन उनकी जरूरत से ज्यादा होता है। इस फार्मूले पर अमल के बाद से ही ओएनजीसी को उसके 6.50 करोड़ घनमीटर प्रतिदिन गैस उत्पादन पर घाटा उठाना पड़ा है।

सूत्रों ने बताया कि ओएनजीसी ने हाल में सरकार को भेजे एक संदेश में कहा है कि नये क्षेत्रों से गैस उत्पादन की लागत 5 से 9 डालर प्रति एमबीटीयू के बीच पड़ती है। सूत्रों ने कहा कि पिछले साल कंपनी के गैस कारोबार से हुये घाटे की भरपाई कचचे तेल के कारोबार से हो गई लेकिन इस साल कच्चे तेल के दाम भी पहले से ही भारी दबाव में चल रहे हैं। इससे कंपनी के लिये उसकी परिचालन लागत को पूरा करना भी मुश्किल होगा।

भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने 2014 में गैस मूल्य निर्धारण का नया फार्मूला तय किया था, उसकी के आधार पर हर छह महीने में दाम की समीक्षा की जाती है। उससे पहले कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने मई 2010 में बिजली और उर्वरक कारखनों को बेची जाने वाली गैस का दाम 1.79 डालर से बढ़ाकर 4.20 डालर प्रति एमबीटीयू कर दिया था। संप्रग सरकार ने 2014 में लागू करने के लिए एक नये फार्मूले को मंजूरी दी लेकिन राजग ने सत्ता में आने पर इसे खारिज कर दिया।

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