नयी दिल्ली, 26 मार्च भारत में अगले दशक में 13-15 करोड़ नए रूम एयर कंडीशनर (एसी) जुड़ने की उम्मीद है, जिससे वर्ष 2035 तक देश की अधिकमत बिजली की मांग 180 गीगावाट (जीडब्ल्यू) से अधिक बढ़ सकती है और इससे बिजली प्रणाली पर दबाव पड़ेगा। बुधवार को प्रकाशित एक अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला गया है।
बर्कले में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (यूसी) में भारत ऊर्जा और जलवायु केंद्र (आईईसीसी) द्वारा किए गए अध्ययन में कहा गया है कि सबसे तेजी से विकसित हो रही यह प्रमुख अर्थव्यवस्था अगले 10 वर्षों में रूम एसी की ऊर्जा दक्षता को दोगुना करके गंभीर बिजली की कमी से बच सकती है और उपभोक्ताओं के 2.2 लाख करोड़ रुपये (26 अरब डॉलर) तक बचा सकती है।
अध्ययन में कहा गया है कि भारत सालाना 1-1.5 करोड़ नए एसी जोड़ता है। नीतिगत हस्तक्षेप के बिना, अकेले एसी वर्ष 2030 तक 120 गीगावाट और वर्ष 2035 तक 180 गीगावाट बिजली की अधिकतम मांग को बढ़ा सकते हैं, जो अनुमानित कुल मांग का लगभग 30 प्रतिशत है।
अध्ययन के प्रमुख लेखक और यूसी बर्कले के फैकल्टी निकित अभ्यंकर ने कहा, ‘‘यह वृद्धि भारत की बिजली आपूर्ति से आगे निकल रही है और वर्ष 2026 की शुरुआत में ही बिजली की गंभीर कमी हो सकती है।’’
पिछले साल, अखिल भारतीय अधिकतम बिजली की मांग 30 मई को 250 गीगावाट को पार कर गई थी, जो अनुमानों से 6.3 प्रतिशत अधिक थी। जलवायु परिवर्तन से प्रेरित गर्मी का तनाव बिजली की मांग को बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में से एक है।
भारत की कुल बिजली खपत में घरेलू क्षेत्र की हिस्सेदारी वर्ष 2012-13 में 22 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2022-23 में 25 प्रतिशत हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा आर्थिक वृद्धि और बढ़ते तापमान के कारण शीतलन की बढ़ती आवश्यकता के कारण है।
वर्ष 2024 की गर्मियों में, रिकॉर्ड तोड़ तापमान के बीच कमरे के एयर कंडीशनर की बिक्री में साल-दर-साल 40 से 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ऑक्सफोर्ड इंडिया सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट में चल रहे एक शोध के अनुसार, कुल आबादी के हिसाब से सबसे बड़ी एसी की मांग भारत से आएगी। इसके बाद चीन, नाइजीरिया, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, ब्राजील, फिलिपीन और अमेरिका का स्थान आएगा।
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