देश की खबरें | वायरस : अदालत ने बीएमसी से कहा इमारतों को इस्तेमाल करने से पहले अनुमित लेनी होगी

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मुंबई, नौ जून बम्बई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को बृहन्मुंबई नगर निगम को उपनगरीय माहुल में 11 खाली रिसेटलेमेंट इमारतों में पानी और बिजली कनेक्शन देने की अनुमति दी है लेकिन कहा है कि इसे कोरोना वायरस संदग्धों के निलये पृथक—वास केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने से पहले निगम को अदालत की अनुमति लेनी होगी ।

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एस एस शिंदे की खंडपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुये यह अनुमति प्रदान की। यह याचिका एक विचाराधीन कैदी की मांग शारदा तेवार और एक गैर सरकारी संगठन घर बचाओ घर बनाओ आन्दोलन ने दायर की थी। यह कैदी आर्थर रोड जेल में बंद है । याचिका में बीएमसी की उस योजना को चुनौती दी गयी है जिसमें माहुल स्थित इस इमारत को पृथक—वास केंद्र बनाने की बात कही गयी है ।

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इस याचिका में दावा किया गया है कि यह सभी इमारत उनलोगों के पुनर्वास के लिये बनाया गया था, जो बीएमसी की विभिन्न विकास योजनाओं के कारण प्रभावित हुये थे । इन योजनाओं के बारे में उच्च न्यायालय एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने बसने के योग्य नहीं बताया था ।

याचिका के अनुसार माहुल भारी औद्योगिक इलाका है जहां हिंदुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड की रिफाइनरी, राष्ट्रीय केमिकल एवं फर्टीलाइजर, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र स्थित है । इसके अलावा निजी औद्योगिक इकाईयां भी स्थित है ।

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बीएमसी ने भी एक याचकिा दायर कर माहुल इलाके में स्थित एवरस्माइल काम्पलेक्स के तीन इमारतों एवं अम्बपाडा एसआरए की आठ इमारतों को पृथक—वास केंद्र के तौर पर इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी है ।

बीमएसी के अधिवक्ता ए एस शखारे ने मंगलवार को अदालत से कहा कि निगम तत्काल इन इमारतों का इस्तेमाल नहीं करना चाहता है, निगम यह चाहता है कि बिजली और पानी की अपूर्ति के साथ इमारत को इसके लिये तैयार किया जाये ।

अधिवक्ता ने कहा कि हम इन इमारतों को जरूरत के समय के लिये तैयार रखना चाहते हैं । कोविड—19 मरीजों की संख्या उस वार्ड विशेष में बढ रही है और पृथक—वास केंद्र समय की जरूरत है ।'

उन्होंने कहा कि अदालत का आदेश प्राप्त करने के बाद इमारत को तैयार करने में पांच से दस दिन का वक्त लगेगा ।

याचिकाकर्ता की अधिवक्ता रोनिता भट्टाचार्य बेक्टर ने बीमएसी की याचिका का विरोध किया और कहा कि इमारतों में वेंटिलेशन खराब है और वहां वायु प्रदूषण के कारण सांस की समस्या होती है।

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