जर्मनी में बीमारी के कारण ज्यादा छुट्टी क्यों लेते हैं लोग

जर्मनी में बीमारी के कारण ली जाने वाली छुट्टियों पर लगाम कसी जा रही है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

जर्मनी में बीमारी के कारण ली जाने वाली छुट्टियों पर लगाम कसी जा रही है. आलोचकों और कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार का ध्यान इस मामले में बीमारी से ज्यादा रोग के लक्षण पर है.2024 में जर्मनी में नौकरी करने वाले लोगों ने साल में औसतन 22 दिन की छुट्टी बीमारी की वजह से ली थी. दूसरे देशों की तुलना में यह काफी ज्यादा है. स्वास्थ्य बीमा कंपनियों के संघ ने यह आंकड़े दिए हैं. 2022 में खासतौर से बीमारी की सूचना देने की व्यवस्था इलेक्ट्रॉनिक होने के बाद से यह संख्या तेजी से बढ़ी है. यह व्यवस्था कर्मचारियों की कम दिनों की छुट्टी को बेहतर ढंग से दर्ज करने के लिए शुरू की गई थी.

चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने सुधारों का नया पैकेज लागू करने की योजना बनाई है. इसमें टेलिफोन पर दी जाने वाली सिक रिपोर्ट की व्यवस्था खत्म कर दी गई है. कर्मचारियों को छुट्टी के पहले दिन से ही डॉक्टर के लिखवा कर मेडिकल सर्टिफिकेट देना पड़ेगा. फिलहाल बीमारी के चौथे दिन से मेडिकल सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ती है.

सरकार का कहना है कि कामगारों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए किए जा रहे उपायों में यह भी शामिल है. जर्मनी की अर्थव्यवस्था बीते कई सालों के कमजोर विकास और आबादी की बढ़ती औसत उम्र की वजह से मुश्किलों का सामना कर रही है.

कर्मचारियों पर दबाव

हालांकि बीमारी, मानसिक स्वास्थ्य और श्रम बाजारों पर रिसर्च करने वाले गहरी समस्याओं की ओर ध्यान दिला रहे हैं. नर्सिंग, केयर वर्क और शिक्षा जैसे रोजगार के क्षेत्रों में खासतौर से लोग ज्यादा छुट्टी ले रहे हैं. रिसर्चरों का कहना है कि इन रोजगारों में लंबे समय से कम कर्मचारी, कम वेतन, करियर के विकास की कमजोर संभावनाएं और भावनात्मक रूप से ज्यादा चुनौतीपूर्ण होना कर्मचारियों के खराब मानसिक स्वास्थ्य की वजह बन रहा है.

साल 2024 के लिए जुटाए गए आंकड़े बताते हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक कार्यों में काम करने वाली महिलाओं ने औसतन 27 दिन की छुट्टी ली. बीकेके के आंकड़े बताते हैं कि टीचरों के लिए यह संख्या 24 थी जबकि वित्तीय क्षेत्र में 18 और संचार में 16.

डुसेलडॉर्फ यूनिवर्सिटी में एमेरिटस प्रोफेसर योहानेस जिगरिस्ट का कहना है, "इसके लिए पूरी तरह से डिप्रेशन में जाना ही जरूरी नहीं है. यह खराब काम की परिस्थिति की वजह से पैदा हुई अत्यधिक थकान या फिर शारीरिक और मानसिक रूप से ऊब जाने की स्थिति भी हो सकती है."

लोगों की बीमारी के मामलों में केवल 4.8 फीसदी मामले ही मानसिक समस्याओं से जुड़े होते हैं. हालांकि अगर वे इस वजह से बीमार हुए तो औसतन 28 दिनों की छुट्टी उन्हें लेनी पड़ती है. जर्मनी की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा कंपनी एओके के मुताबिक मानसिक बीमारियों की वजह से छुट्टी लेने के मामले 2014 के बाद से 47 फीसदी बढ़ गए हैं. सांस से जुड़ी बीमारियों के बाद से यह दूसरी सबसे बड़ी समस्या है जिसके कारण लोग छुट्टी लेते हैं.

ज्यादा जिम्मेदारी कम पुरस्कार

स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और सामाजिक कार्य ऐसे क्षेत्र हैं जहां काम करने वाले लोगों में सबसे ज्यादा मानसिक समस्याओं का पता चल रहा है. जिगरिस्ट का कहना है, "उनके पास नौकरी में बहुत ज्यादा जिम्मेदारियां हैं, उन्हें पेशेवर काम के साथ ही सामाजिक मेलजोल का भी ध्यान रखना पड़ता है. और उन्हें ना सिर्फ भावनात्मक समस्याओं बल्कि शारीरिक दबावों से भी जूझना पड़ता है, जिसमें हिंसा भी शामिल है. इसके साथ ही अकसर ये लोग कम आय और कमजोर सामाजिक आर्थिक स्थिति वाले लोग होते हैं."

विशेषज्ञों का कहना है कि इससे काम और पुरस्कार के बीच एक असंतुलन पैदा होता है. रोजगार से जुड़े स्वास्थ्य के मुद्दों पर रिसर्च करने वाली एक अंतरराष्ट्रीय संगठन का कहना है कि यह असंतुलन मानसिक स्वास्थ्य के लिए समस्या और लंबे समय के लिए उनकी अनुपस्थिति का कारण बनता है.जर्मनी के स्कूलों से हाल ही में इस समस्या से जुड़े सबूत मिले हैं.

2024 में जर्मन स्कूल बैरोमीटर ने पता लगाया कि लगभग आधे टीचरों ने उनके स्कूलों के छात्रों में मनोवैज्ञानिक या शारीरिक हिंसा की शिकायतें दर्ज कराईं. दूसरी तरफ लगभग एक तिहाई ने हफ्ते के बीच कई बार अत्यधिक थकान होने की बात कही.

नर्सिंग के क्षेत्र में यही हाल है. कर्मचारियों की भारी कमी के बावजूद हाल की रिसर्चों से पता चला है कि यहां आय में बढ़ोत्तरी बहुत सीमित है खासतौर से अस्पतालों और सार्वजनिक संस्थानों में.

दुरुपयोग के संकेत नहीं हैं

इन सबका यह मतलब नहीं है कि छुट्टी की समस्या को सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य से ही जोड़ा जा सकता है. बीमारी के नाम पर छुट्टी के कई कारण हैं. इनमें आबादी, काम की जगह की परिस्थितियां, सामाजिक प्रथाएं और संस्थागत फर्क शामिल हैं जिनकी वजह से इनकी अंतराष्ट्रीय स्तर पर तुलना नहीं की जा सकती.

जर्मनी में बीमार होने पर पहले छह हफ्ते तक पूरी तनख्वाह मिलती है. यह दुनिया के लिहाज से काफी उदार है. हालांकि ओईसीडी के सात देशों में पूरे समय के कर्मचारी बीमारी के नाम पर ज्यादा छुट्टी लेते हैं. इन देशों में नॉर्वे, स्लोवेनिया, स्पेन, फिनलैंड, फ्रांस, पुर्तगाल और बेल्जियम शामिल हैं.

ओईसीडी रिसर्चर सोफिया मालिनाई डोमाक का कहा है, "हम कह सकते हैं कि बीमारी की छुट्टी के नियम कई कारणों में से एक हैं लेकिन हमें बीमारी की छुट्टियों की तुलना देशों के बीच करने में हमें इसे ज्यादा महत्व देने से सावधान रहना होगा." जर्मनी में छुट्टी लेने की प्रवृत्ति पर रिसर्च कर रही बहुत सी संस्थाओं को इसके व्यापक पैमाने पर दुरुपयोग के सबूत नहीं मिले हैं.

स्वास्थ्य बीमा कंपनी डीएके और आईजीईएस इंस्टीट्यूट की एक रिसर्च में पता चला कि 2022 के बाद छुट्टियां लेने के लिए बेहतर इलेक्ट्रॉनिक रिपोर्टिंग और असाधारण रूप से सांस की बीमारियों का बहुत बढ़ना और कोविड का संक्रमण जिम्मेदार थे. उसके बाद से बीमारी रहने वाले दिन लगभग स्थिर हैं.

रिसर्च में इस बात के कोई सबूत नहीं मिले कि 2020 में टेलिफोन पर बीमार होने की जानकारी देने की जो व्यवस्था बनाई गई उसकी वजह से लोगों ने ज्यादा छुट्टी ली हो.

सरकार के प्रस्तावों की मजदूर संघ आलोचना कर रहे हैं. उनका कहना है कि इससे कामगारों के प्रति "अविश्वास की संस्कृति" बढ़ेगी. दूसरी तरफ डॉक्टरों ने भी इसे पहले से ही दबाव झेल रहे मेडिकल सेवाओं के लिए "पूरी तरह हानिकारक" बताया है. इसके जवाब में सरकार ने कहा है कि कंपनियों को यह तय करने की आजादी होगी कि वे नए नियम को लागू करना चाहते हैं या फिर बीमारी के चौथे दिन से मेडिकल सर्टिफिकेट की मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखना चाहते हैं.

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