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शेख हसीना से जुड़े हैं भारत-बांग्लादेश संबंधों के तार!

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भारत-बांग्लादेश के आपसी संबंधों में तनाव बढ़ता जा रहा है.

शेख हसीना से जुड़े हैं भारत-बांग्लादेश संबंधों के तार!
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भारत-बांग्लादेश के आपसी संबंधों में तनाव बढ़ता जा रहा है. अब तीन अन्य मामलों में उनके साथ उनके पुत्र और पुत्री को भी सजा सुनाई गई है.बीते 17 नवंबर को बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने उनको मौत की सजा सुनाई थी. अब बांग्लादेश की एक अन्य अदालत ने राजधानी ढाका में भूखंडों के आवंटन में कथित भ्रष्टाचार के तीन अलग-अलग मामलों में उनको कुल 21 साल की सजा सुनाई है. इसी मामले में उनके पुत्र सजीब वाजेद जॉय को पांच साल की सजा के अलावा एक लाख बांग्लादेशी टका का जुर्माना भरने और पुत्री साइमा आजाद पुतुल को पांच साल की सजा सुनाई है.

इससे एक ओर जहां हसीना की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं वहीं बांग्लादेश की अंतरिम सरकार हसीना के प्रत्यर्पण के लिए हसीना पर दबाव बढ़ाने में जुटी है. इससे भारत के साथ उसके आपसी संबंधो में और तनाव पैदा होने की आशंका है. इसकी वजह यह है कि भारत ने फिलहाल हसीना के प्रत्यर्पण के सवाल पर चुप्पी साध रखी है.

हसीना के प्रत्यर्पण पर जोर

शेख हसीना के मामले में न्यायाधिकरण की सजा के एलान के बाद ही बांग्लादेश के विधि सलाहकार नजरूल ने औपचारिक तौर पर कहा था कि सरकार हसीना एक बार फिर भारत से हसीना के प्रत्यर्पण का अनुरोध करेगी. उसके बाद विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में भारत सरकार से यह अपील की गई.

अब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने कहा है कि उसने हसीना के प्रत्यर्पण का औपचारिक अनुरोध किया है और इस पर भारत के जवाब का इंतजार कर रही है. विदेश मंत्रालय के सलाहकार एम.तौहीद हुसैन ने राजधानी ढाका में पत्रकारों को बताया, "बीते सप्ताह नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग के जरिए हसीना के प्रत्यर्पण की मांग करते हुए भारत सरकार को एक औपचारिक पत्र सौंपा गया है. हमें उनके जवाब का इंतजार है."

उनका कहना था कि इससे पहले भी यह अनुरोध किया गया था. तब कोई जवाब नहीं मिला था. लेकिन न्यायाधिकरण की ओर से सजा सुनाए जाने के बाद हालात बदल गए हैं.

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विधि सलाहकार आसिफ नजरूल ने बताया है कि अंतरिम सरकार भगोड़े अपराधियों को वापस लाने के लिए बेह स्थित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की शरण लेने पर भी विचार कर रही है.

दूसरी ओर, भारत ने प्रत्यर्पण का अनुरोध मिलने की बात तो स्वीकार करते हुए कहा है कि न्यायिक और कानूनी नजरिए से इस पर विचार किया जा रहा है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को दिल्ली में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान इससे संबंधित सवाल पर कहा कि भारत शांति, लोकतंत्र और स्थिरता समेत बांग्लादेश के हितों के लिए कृतसंकल्प है.

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असर

अब भारत और बांग्लादेश के राजनीतिक हलकों में इस सवाल पर बहस शुरू हो गई है कि शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा दोनों देशों के आपसी संबंधों पर क्या और कितना असर डाल सकता है? खासकर तीन महीने बाद बांग्लादेश में आम चुनाव होने हैं. उसे ध्यान में रखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि निर्वाचित सरकार के सत्ता संभालने के बाद भारत के प्रति उसका क्या रवैया रहेगा और क्या शेख हसीना का मुद्दा दोनों देशों के आपसी संबंधों में रोड़ा बन सकता है?

बीते साल हसीना सरकार के पतन के बाद सत्ता संभालने वाली अंतरिम सरकार के साथ भारत के संबंधों में आई गिरावट किसी से छिपी नहीं है.

ऐसे में अब इस बात पर कयास लगाए जा रहे हैं कि हसीना के मुद्दे पर अब द्विपक्षीय संबंध किस दिशा में बढ़ेंगे. हसीना को मौत की सजा मिलने के बाद बांग्लादेश सरकार ने कहा था कि वो भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग करेगी. उसके मुताबिक, सरकार ने औपचारिक तौर पर भारत के समक्ष यह मांग उठाई है.

इसबीच, बांग्लादेश के सुरक्षा सलाहकार खलीलुर रहमान दिल्ली में सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के साथ भी बैठक कर चुके हैं. हालांकि इस बैठक में हसीना के प्रत्यर्पण पर चर्चा हुई या नहीं इसका पता नहीं चल सका.

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क्या कहते हैं जानकार?

शेख हसीना के मुद्दे का भारत और बांग्लादेश संबंधों पर क्या असर होगा, इस पर विश्लेषकों की राय बंटी हुई है. उनका कहना है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के सत्ता में रहते दोनों देशों के संबंध स्वाभाविक होने की उम्मीद कम ही है. इसी वजह से भारत सरकार प्रत्यर्पण के सवाल पर चुप्पी साधे ही रहेगी.

राजनीतिक विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती डीडब्ल्यू से कहते हैं, "भारत सरकार को बांग्लादेश में चुनाव के बाद सत्ता संभालने वाली सरकार का इंतजार रहेगा. शेख हसीना और आपसी संबंधों का मुद्दा वहां सत्ता में आने वाली नई सरकार की नीतियों और नजरिए पर निर्भर होगा."

उनका कहना था कि प्रत्यर्पण एक जटिल मुद्दा है. खासकर जब यह पता हो कि प्रत्यर्पित व्यक्ति को दूसरे देश में भेजने पर उसकी जान को खतरा है तो कोई फैसला करते समय इसे ही अहमियत दी जाती है. इस मामले में तो हसीना को बांग्लादेश लौटते ही फांसी की सजा दे दी जाएगी. इसलिए सरकार इस मुद्दे पर इंतजार करो और देखो की नीति पर आगे बढ़ेगी.

बांग्लादेश के मुक्ति युद्ध और उसके बाद करीब चार दशक तक दोनों देशों के विभिन्न पहलुओं को कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार तापस मुखर्जी डीडब्ल्यू से कहते हैं, "प्रत्यर्पण संधि में कई ऐसे प्रावधान हैं जिनका सहारा लेकर बारात हसीना को बांग्लादेश भेजने से इंकार सकता है. लेकिन फिलहाल वह इस मामले को टालने की कोशिश करेगा. बांग्लादेश में चुनाव के बाद नई सरकार के सत्ता में आने के बाद ही इस मामले पर कोई फैसला होने की संभावना है."

विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में हसीना और भारत-बांग्लादेश संबंधों में तीन मुद्दों की भूमिका अहम होगी. पहला यह कि वहां चुनाव के बाद कैसी सरकार सत्ता में आती है. दूसरा यह कि वह सरकार भारत के साथ कैसा संबंध रखना चाहती है और आखिरी मुद्दा यह है कि शेख हसीना और उनकी अवामी लीग की बांग्लादेश की राजनीति में कैसी सक्रियता रहती है. भारत में रहते हुए भी हसीना अपने समर्थकों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करती रही हैं और वहां की अंतरिम सरकार इस पर नाराजगी जता चुकी है.

फरवरी चुनाव के लिए जोड़-तोड़

राजनीतिक विश्लेषक शिखा मुखर्जी डीडब्ल्यू से कहती हैं, "बांग्लादेश में नई सरकार भी हसीना के प्रत्यर्पण की मांग उठा सकती है. लेकिन इस मुद्दे पर जोर देने से आपसी संबंधों में और कड़वाहट पैदा होगी. दोनो देश चाहें तो हसीना के मुद्दे को अलग रख कर आपसी संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं. लेकिन यह सब वहां सत्ता में आने वाली सरकार के नजरिए पर निर्भर है."

बांग्लादेश में फरवरी में होने वाले आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न राजनीतिक संगठनों ने चुनाव-पूर्व तालमेल की कोशिशें शुरू कर दी हैं. हसीना की अवामी लीग के चुनाव लड़ने से पहले ही पाबंदी लगाई जा चुकी है. ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि वहां अगला चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी होने की उम्मीद कम ही है. वैसी हालत में चुनी गई नई सरकार भी शायद हसीना के मुद्दे को कायम रखते हुए भारत पर दबाव बढ़ाने का प्रयास करेगी. वैसी हालत में दोनों देशों के बीच कड़वाहट और बढ़ेगी ही.

(The above story first appeared on LatestLY on Nov 27, 2025 09:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).