सेउता त्रासदी: जीवंत सपनों से कब्र की गहराई तक
जवान बेटे को मां की सर्जरी के लिए पैसे की सख्त जरूरत थी.
जवान बेटे को मां की सर्जरी के लिए पैसे की सख्त जरूरत थी. उसे लगा कि स्पेन पहुंचकर वो ये पैसा जुटा लेगा. अब लोग कहते हैं कि अयूब एक बहुत भला इंसान था.मोरक्को के खेनिफ्रा कस्बे का अयूब अकबिली गरीबी के साथ ही बड़ा हुआ. तंगहाली से पार पाने के लिए उसने भौतिक विज्ञान से ग्रैजुएशन किया, लेकिन फिर भी उसे अपने फील्ड में कोई नौकरी नहीं मिली. इसके बाद अयूब अपने घर से दूर तंजीर शहर में कार पार्ट्स की एक फैक्ट्री में काम करने लगा. वहां उसकी तनख्वाह करीब 421 डॉलर प्रतिमाह थी. यह मोरक्को में मिलने वाले औसत वेतन से ज्यादा थी. धीमे धीमे वह गरीबी से पार पा रहा था, लेकिन अच्छी सैलरी के साथ उस पर कई बड़ी जिम्मेदारियां भी थीं. अयूब को अपनी मां के हार्निया के ऑपरेशन के लिए पैसे की जरूरत थी.
जुलाई के आखिर में अयूब दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक वाली शिफ्ट में काम कर रहा था. इसी दौरान उसकी नजर एक फेसबुक पोस्ट पर पड़ी. पोस्ट में कई लोग बॉर्डर पारकर स्पेन के सेउता जा रहे थे. देर रात किराये के अपार्टमेंट में लौटकर अयूब ने अपने रूम पार्टनर और रिश्तेदार अब्देलहाकिम सादाई को यह बात बताई.
अब्देलहाकिम के मुताबिक, फेसबुक पोस्ट ने "उसकी दिमाग पूरी तरह बदल दिया. एक ऐसा इंसान जो कभी भी गैरकानूनी तरीके से विदेश जाने की नहीं सोचता था, अचानक किसी भी तरह विदेश पहुंचने के लिए बेचैन हो उठा."
अयूब ने अब्देलहाकिम को भी साथ चलने के लिए राजी कर लिया. 31 जुलाई को दोनों ने एक ड्राइवर को सेउता बॉर्डर के पास पहुंचाने के लिए 129 डॉलर दिए. ये रकम उनके अपार्टमेंट के दो महीने के किराये के बराबर थी.
सेउता बॉर्डर के पास पहुंचने पर, दोनों ने भारी अफरातफरी देखी है. दूर देखने पर लोग चींटियों की तरह रेंगते दिख रहे थे. उनका हूजूम बॉर्डर की तरफ बढ़ रहा था. भीड़ को रोकने के लिए पुलिस आंसू गैस के स्टन ग्रैनेड इस्तेमाल कर रही थी. ये सब देख अब्देलहाकिम ने यूरोप ना जाने का फैसला किया, लेकिन अयूब, सेउता के लिए निकल पड़ा. इसके बाद दोनों टेलिफोन के जरिए संपर्क में रहे. फिर कई घंटों बाद, अयूब ने टेलिफोन पर जवाब देना पूरी तरह बंद कर दिया.
अब खेनिफ्रा के एक कब्रिस्तान में अयूब अकिबिली के नाम की एक कब्र है. समाचार एजेंसी एपी के पास मोरक्को के गृह मंत्रालय के कुछ दस्तावेज हैं. इनमें से कुछ डॉक्यूमेंट्स कहते हैं कि अयूब अकबिली 31 जुलाई की मध्य रात्रि को मारा गया. मौत का कारण "अप्राकृतिक" है. उसके सिर पर चोटों के कई घाव थे. परिवार को बताया गया कि अयूब की मौत चट्टान से गिरने के कारण हुई.
सेउता त्रासदी के दौरान क्या हुआ
मोरक्को के गृह मंत्रालय के मुताबिक, मोरक्को की तरफ मौजूद चट्टान से गिरने के कारण कम से कम 11 लोगों की मौत हुई. मृतकों की ब्लैक एंड व्हाइट सूची में हमजा हाइबोरी का भी नाम है. 28 साल के हमजा मोरक्को में सेकेंड डिविजन के क्लब केनित्रा एथेलेटिक क्लब का पेशेवर फुटबॉलर था. सेउता त्रासदी के दौरान हमजा, मार्तिल में समंदर किनारे छुट्टी बिता रहा था. इसी दौरान उसने लोगों को सेउता की तरफ जाते हुए देखा और लोगों के उसे रेले में वह भी शामिल हो गया.
उसके बचपन के दोस्त बिलाल रातिब के मुताबिक, हमजा यूरोप में बड़े क्लबों के लिए फुटबॉल खेलने का सपना देखता था. वह बचपन में एक बार फ्रांस जा चुका था, और उसके बाद ही वहां जाकर फुटबॉल खेलना चाहता था, "वह फ्रांस जाकर विदेश में बसना चाहता था ताकि उसे फुटबॉल खेलने और जीवन जीने का बेहतर अवसर मिले."
हमजा को याद करते हुए बिलाल कहता है, "जब हम किशोर और बहुत ही बेसब्र थे, तब भी वह एक शानदार इंसान था."
30 जुलाई से 1 अगस्त 2026 के बीच स्पेन और मोरक्को के बीच पैदा हुए इस आप्रवासी संकट के दौरान कम से कम 90 लोग मारे गए. इंटरनेट के जरिए फैली अफवाहों, गरीबी और बेरोजगारी ने इस घातक मिश्रण के कारण जुलाई के आखिर में 70,000 से ज्यादा लोग स्पेन के सेउता की तरफ बढ़े. सेउता, स्पेन की मुख्य भूमि से दूर, समंदर पार बसा ये स्पैनिश एक्लेक्व, मोरक्को के साथ जमीनी सीमा साझा करता है.
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियोज में दिख रहा था कि हजारों लोग तारबाड़ पारकर सेउता पहुंच रहे हैं. कई लोगों ने जमीनी बॉर्डर के बजाए समंदर के जरिए सेउता पहुंचने की कोशिश की. स्पेन और मोरक्को के प्रशासन ने इस त्रासदी के लिए सोशल मीडिया की अफवाहों और कबूतरबाजों के गिरोहों को जिम्मेदार ठहराया है.
अब शव के लिए धक्के खाते प्रियजन
बिलाल रातिब के मुताबिक, अब मृतकों के कई परिवारजनों से सेउता से शव वापस लाने के लिए करीब 2,500 डॉलर मांगे जा रहे हैं. समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, सेउता से शव वापस लाने के लिए मोरक्को के कॉन्सुलेट की अनुमति चाहिए और स्पैनिश शवगृह का ट्रांजिट डॉक्यूमेंट भी. मोरक्को के नियमों के मुताबिक, शव सीलबंद ताबूत में होना चाहिए और डेथ सर्टिफिकेट में यह स्पष्ट लिखा होना चाहिए कि मौत किसी संक्रामक बीमारी से नहीं हुई है.
सेउता सरकार के प्रवक्ता ने बीते शुक्रवार को कहा कि शवों को लौटाने संबंधी कागजी प्रक्रिया उनकी तरफ से पूरी हो चुकी है, लेकिन मोरक्को सरकार ने ये दस्तावेज अभी तक स्वीकार नहीं किए हैं.
समाचार एजेंसी एपी ने जब मोरक्को सरकार से यह पूछा कि शवों को लाने के लिए क्या सरकार कुछ आर्थिक मदद देगी, तो कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.
हमजा का शव अब भी सेउता में है. हमजा की बहन ने वहां जाकर डीएनए टेस्ट के जरिए इसकी पुष्टि भी की है. प्रशासन ने बहन को भाई का आई कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस कार्ड भी सौंपा, लेकिन शव का मुंह देखने की अनुमति नहीं दी.
बिलाल के मुताबिक, "अभी 20 दिन या इससे ज्यादा भी, और लगेंगे."
वहीं, तंजीर के अपार्टमेंट अयूब के सूने कमरे को देख अब अब्देलहाकिम कहते हैं, "बॉर्डर पर उसने मुझसे कहा था कि अब वह कभी दोबारा यहां नहीं लौटेगा. और सही में, अब वो कभी नहीं लौटेगा."
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 18, 2026 05:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

