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असली रंग में तालिबान! अमेरिकी सेना की मदद करने वालों के दरवाजों पर चिपकाई धमकी भरी चिट्ठी, सरेंडर नहीं करने पर सजा-ए-मौत

तालिबान (Taliban) ने ऐसे लोगों के घरों के दरवाजों पर नाइट लेटर्स (Night Letters) (धमकी भरी चिट्ठियां) चिपकाने शुरू कर दिए हैं, जिन्होंने कभी किसी भी रूप में अमेरिकी सेना (America Army) की मदद की थी.

असली रंग में तालिबान! अमेरिकी सेना की मदद करने वालों के दरवाजों पर चिपकाई धमकी भरी चिट्ठी, सरेंडर नहीं करने पर सजा-ए-मौत
तालिबान (Photo Credits: Getty images)

नई दिल्ली, 31 अगस्त: तालिबान (Taliban) ने ऐसे लोगों के घरों के दरवाजों पर नाइट लेटर्स (Night Letters) (धमकी भरी चिट्ठियां) चिपकाने शुरू कर दिए हैं, जिन्होंने कभी किसी भी रूप में अमेरिकी सेना (America Army) की मदद की थी. दरवाजों पर चिपकाए गए इन नाइट लेटर्स कहा गया है कि अगर वो सरेंडर नहीं करते हैं तो फिर उन्हें मौत की सजा दी जाएगी. डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, धमकी भरी चिट्ठियों में तालिबान द्वारा उन्हें अदालत में उपस्थित होने का फरमान सुनाया गया हैं. यही नहीं, इनमें यह चेतावनी भी दी गई है कि ऐसा करने में विफलता के परिणामस्वरूप मौत की सजा होगी. पत्र डराने-धमकाने का एक पारंपरिक अफगान (Afghan) तरीका है. बता दें कि चिट्ठी भेजकर कोर्ट में बुलाना और फिर कत्ल कर देना, ये तालिबान का पारंपरिक तरीका रहा है और पिछले शासनकाल के दौरान भी तालिबान ने भी यही किया था. यह भी पढे: Afghanistan: अफगानिस्तान में 20 साल बाद अमेरिका की सैन्य मौजूदगी समाप्त : जो बाइडन

जब अफगानिस्तान (Afghanistan) पर सोवियत संघ का कब्जा था, उस वक्त भी मुजाहिदीन (mujahideen)  चिट्ठियों का ही इस्तेमाल किया करते थे. अक्सर ग्रामीण समुदायों में इसका उपयोग किया जाता रहा है, मगर अब इस तरीके को शहरों में भी व्यापक रूप से परिचालित किया जा रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसी ही एक धमकी भरी चिट्ठी 34 साल के अफगानी नागरिक नाज को मिली है, जिन्होंने ब्रिटिश निर्माण कंपनी और ब्रिटिश सेना को हेलमंड में सड़कों और कैंप के बैशन में रनवे बनाने में मदद की थी. उन्होंने अफगान पुनर्वास कार्यक्रम के तहत ब्रिटेन में शरण लेने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन उनके आवेदन को खारिज कर दिया गया और अब उन्हें तालिबान ने कोर्ट में हाजिर होने या फिर मरने के लिए तैयार होने के लिए कहा है.

नाज ने कहा कि उनके घर के दरवाजे पर तालिबान ने चिट्ठी चिपकाई है और वो चिट्ठी तालिबान की तरफ से भेजा गया एक तरह का आधिकारिक पत्र है, जिस पर तालिबान की मुहर भी लगी हुई है. नाज ने कहा, "पत्र आधिकारिक था और तालिबान द्वारा मुहर लगाई गई थी। यह स्पष्ट संदेश है कि वे मुझे मारना चाहते हैं. अगर मैं अदालत में जाता हूं, तो मुझे मौत की सजा दी जाएगी. "तालिबान से भयभीत नाज ने मदद की अपील करते हुए कहा, "मैं अदालत जाऊं या नहीं जाऊं, वो मुझे मारेंगे ही, इसीलिए मैं बचने का कोई रास्ता खोज रहा हूं. मैं छिपने के लिए रास्ता खोज रहा हूं, मुझे मदद चाहिए." यह भी पढे: Afghanistan को मझधार में छोड़ लौटा अमेरिका, 20 साल में गंवाए 2500 सैनिक, तालिबान ने गोलियां चलाकर मनाया जश्न (Watch Video)

डेली मेल की रिपोर्ट में कहा गया है कि एक और पीड़ित अफगान, जो ब्रिटिश सैनिकों के लिए अनुवादक का काम करता था, उसे तालिबान ने काफिरों का जासूस करार दिया और कहा है कि या तो वो खुद अपने लिए मौत चुन ले, या फिर अदालत में उसे मौत की सजा दी जाएगी. रिपोर्ट के अनुसार, 47 वर्षीय शिर ने बताया कि उन्होंने हेलमंद प्रांत में ब्रिटिश सेना के साथ फ्रंटलाइन में काम किया था और उन्होंने अफगानिस्तान से बाहर निकलने के ब्रिटेन की तरफ से इजाजत भी मिल गई थी, लेकिन वो एक निकासी उड़ान में सवार होने के लिए हवाई अड्डे तक नहीं पहुंच सके.

जिसके बाद उनकी बेटी को दरवाजे पर कील लगा हुआ तालिबान का एक चिट्ठी मिला है, जिसमें शिर को इस्लामिक अमीरात ऑफ तालिबान के कोर्ट में पेश होने के लिए कहा गया है. शिर ने कहा, "मेरी बेटी को हमारे दरवाजे पर एक कील के साथ लगा हुआ पत्र मिला. इसमें मुझे इस्लामिक अमीरात ऑफ तालिबान की अदालत के फैसले के लिए खुद को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया है".शिर ने आगे कहा कि तालिबान के लोग शिकारी कुत्तों की तरफ उन्हें खोज रहे हैं और वो छिपते फिर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर वो सरेंडर भी कर देते हैं, तब भी कोई फायदा नहीं होने वाला है, क्योंकि फिर भी उन्हें मार दिया जाएगा. यह चिट्ठी मिलते ही अब शिर तालिबान के डर से छिप गए हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 31, 2021 05:26 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).