Siberia Lab Scare: रूस की एंटी-प्लेग लैब में रिसर्च वर्कर की रहस्यमयी संक्रमण से मौत; सैकड़ों लोग क्वारंटाइन, क्या न्यूमोनिक प्लेग फैलने का है खतरा?

रूस के साइबेरिया क्षेत्र स्थित इर्कुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करने वाली 28 वर्षीय शोधकर्ता दारिया शिपीलोवा की गंभीर निमोनिया के चलते मौत के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लैब में जीवित बैक्टीरिया से भरी टेस्ट ट्यूब टूटने के बाद महिला संक्रमित हुई थीं, जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया लेकिन दो दिन के भीतर उन्होंने दम तोड़ दिया.

Representational Image (Photo Credits: Pixabay)

मॉस्को/इर्कुत्स्क: रूस के साइबेरियाई शहर इर्कुत्स्क में एक उच्च सुरक्षा वाली एंटी-प्लेग प्रयोगशाला से जुड़े रहस्यमयी संक्रमण ने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. इर्कुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में बतौर लैबोरेटरी तकनीशियन कार्यरत 28 वर्षीय दारिया शिपीलोवा की गंभीर न्यूमोनिया के बाद अस्पताल में मौत हो गई.

इस घटना के बाद इलाके में न्यूमोनिक प्लेग (Pneumonic Plague) के संभावित संक्रमण को लेकर आशंकाएं गहरा गई हैं, जिसके चलते अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से कड़े क्वारंटाइन नियम और निगरानी प्रोटोकॉल लागू कर दिए हैं.

क्या हुआ था लैब में? टेस्ट ट्यूब टूटने का दावा

रूसी मीडिया और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना लैब में काम के दौरान हुई कथित लापरवाही या दुर्घटना से जुड़ी है:

करीब 200 लोग क्वारंटाइन, तीन अस्पतालों में अलर्ट

शोधकर्ता की मौत के बाद स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन ने किसी भी जोखिम से बचने के लिए व्यापक रोकथाम अभियान शुरू किया:

क्या यह प्लेग था? बयानों में अंतर्विरोध

इस पूरे मामले में संक्रमण के वास्तविक कारण को लेकर रूसी अधिकारियों के बयानों में भिन्नता देखी गई है:

कितना खतरनाक होता है न्यूमोनिक प्लेग?

यह घटना इसलिए भी संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि शिपीलोवा प्लेग अनुसंधान संस्थान में कार्यरत थीं:

फिलहाल रूसी जांच एजेंसियां सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और संक्रमण के सटीक स्रोत का पता लगाने के लिए मामले की तकनीकी और कानूनी जांच कर रही हैं.

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