पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर ने खुद को ही दे दिया बहादुरी का मेडल, सोशल मीडिया पर उड़ रही खिल्ली
पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर (Asim Munir) इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं. वजह है उन्होंने खुद को ही पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा युद्धकालीन बहादुरी सम्मान हिलाल-ए-जुर्रत (Hilal-e-Jurat) दे डाला.
पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर (Asim Munir) इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं. वजह है उन्होंने खुद को ही पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा युद्धकालीन बहादुरी सम्मान हिलाल-ए-जुर्रत (Hilal-e-Jurat) दे डाला. यह सम्मान आमतौर पर युद्ध में असाधारण साहस दिखाने वालों को दिया जाता है. जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर यूजर्स ने जमकर चुटकी ली. एक यूजर ने लिखा, “वाह! असीम मुनीर का खुद को दिया हिलाल-ए-जुर्रत अल्टीमेट फ्लेक्स है. जब खुद से वैलिडेशन मिल सकता है, तो दूसरों की क्या जरूरत?”
दूसरे ने ताना मारा, “अब नोबेल प्राइज की भी क्या जरूरत है, खुद को ही अवॉर्ड दे दो!” एक अन्य यूजर ने मजाक उड़ाते हुए कहा, “ये तो ऐसे है जैसे हारकर भी ‘पार्टिसिपेशन ट्रॉफी’ ले ली हो.”
सरकारी बयान में कहा गया कि असीम मुनीर को यह सम्मान 22 अप्रैल से 10 मई के संघर्ष के दौरान “अटूट साहस, सैन्य दक्षता, मजबूत विश्वास और अटूट देशभक्ति” दिखाने के लिए दिया गया. उसी समारोह में एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्दू, नेवल चीफ एडमिरल नदीद अशरफ और जॉइंट चीफ़्स चेयरमैन जनरल साहिर शामशाद मिर्जा को निशान-ए-इम्तियाज (मिलिट्री) दिया गया. इसके अलावा ISI चीफ ले जनरल मुहम्मद असीम मलिक समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को हिलाल-ए-इम्तियाज (मिलिट्री) से सम्मानित किया गया.
खुद को सम्मान देने की नई परंपरा?
इस घटना ने पाकिस्तान में खुद को सम्मान देने की एक अनोखी और विवादित परंपरा पर बहस छेड़ दी है. कुछ लोगों के लिए यह आत्मविश्वास की निशानी हो सकती है, लेकिन आलोचकों का मानना है कि ऐसे कदम से सम्मान की गंभीरता और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो जाते हैं.