India-Iran Ties: 'भारत और ईरान के बीच कोई ट्रेड डील नहीं', SCO बैठक के बाद बोले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो
किर्गिज गणराज्य के बिश्केक में 26वें शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक पर अमेरिका की प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि वॉशिंगटन को नहीं लगता कि भारत और ईरान किसी नए व्यापार समझौते पर आगे बढ़ रहे हैं. हालांकि, उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि कोई भी देश तेहरान पर लगे अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को दरकिनार करने में उसकी मदद न करे.
वॉशिंगटन/नई दिल्ली: किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में संपन्न हुए एससीओ (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान (Masoud Pezeshkian) की मुलाकात पर अमेरिका ने अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने कहा कि अमेरिका का यह मानना नहीं है कि भारत और ईरान के बीच कोई औपचारिक व्यापारिक समझौता (Trade Agreement) तैयार हो रहा है.
फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम 'द ब्रायन किल्मीड शो' में दिए साक्षात्कार में रुबियो ने कहा कि सभी संप्रभु देश अपनी विदेश नीति तय करने और तेहरान के साथ संवाद बनाए रखने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन प्रतिबंधों को दरकिनार करने वाले किसी भी कदम को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यह भी पढ़ें: Israel-Lebanon Conflict: दक्षिणी लेबनान में इजरायली हवाई हमले में 7 लोगों की मौत, 3 घायल
'प्रतिबंधों से बचने में मदद की, तो भुगतने होंगे नतीजे': मार्को रुबियो
अमेरिकी विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख का उल्लेख करते हुए साफ किया कि आर्थिक पाबंदियों का उल्लंघन करने वाले देशों पर द्वितीयक प्रतिबंध (Secondary Sanctions) लगाए जाएंगे:
- राजस्व जुटाने पर रोक: रुबियो ने कहा कि किसी भी देश को ईरान के लिए ऐसे वित्तीय तंत्र (Mechanisms) तैयार करने में मदद नहीं करनी चाहिए, जिससे तेहरान राजस्व जुटा सके. उन्होंने आरोप लगाया कि इस धन का उपयोग आतंकवाद के वित्तपोषण और परमाणु हथियार विकसित करने में किया जा सकता है.
- सीधे प्रतिबंधों की चेतावनी: रुबियो ने दो टूक शब्दों में कहा, "राष्ट्रपति ने बहुत स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी देश ईरान को प्रतिबंधों से बचने में मदद न करे. यदि कोई देश ऐसा करता है, तो हमें उन पर भी प्रतिबंध लगाने होंगे."
- संवाद का अधिकार: उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई देश ईरान के साथ संपर्क बनाए रखते हैं और अमेरिका ने भी पूर्व में ईरानी शासन के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की है.
बिश्केक में पीएम मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियान की वार्ता
इससे पहले बिश्केक में आयोजित द्विपक्षीय बैठक में भारत और ईरान के शीर्ष नेताओं ने आपसी संबंधों को मजबूत करने पर बल दिया था:
- ट्रेड बॉस्केट का विविधीकरण: बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा कि भारत विभिन्न क्षेत्रों में ईरान के साथ अपनी दीर्घकालिक मित्रता को गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और आने वाले समय में दोनों देश अपने व्यापारिक दायरे (Trade Basket) का विस्तार और विविधीकरण करना चाहते हैं.
- पश्चिम एशिया में शांति की अपील: दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य पर चर्चा की. भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस बैठक को 'सार्थक' बताया और दोहराया कि क्षेत्रीय तनाव और विवादों का समाधान कूटनीति व निरंतर संवाद के जरिए ही निकाला जाना चाहिए.
समुद्री सुरक्षा और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, बैठक में नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठा:
- व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा: खाड़ी और पश्चिम एशियाई जलक्षेत्र में जारी तनाव के बीच दोनों पक्षों ने वाणिज्यिक शिपिंग लेन और नाविकों (Seafarers) की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर सहमति जताई. भारत ने स्पष्ट किया कि नागरिक बुनियादी ढांचे और जहाजों को किसी भी परिस्थिति में निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए.
- ब्रिक्स सम्मेलन का निमंत्रण: पीएम मोदी ने ब्रिक्स (BRICS) और एससीओ जैसे बहुपक्षीय मंचों पर ईरान के साथ साझेदारी को रेखांकित किया. साथ ही, उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित होने वाले आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए ईरानी राष्ट्रपति को औपचारिक निमंत्रण भी दिया.