मिडिल ईस्ट में भारी तनाव: अमेरिकी मध्यस्थता वाले युद्धविराम के बावजूद गाजा पर इजरायली हमला, 6 की मौत; ईरान ने अमेरिकी सैन्य बेस पर दागीं 10 बैलिस्टिक मिसाइलें

अमेरिका द्वारा कराए गए युद्धविराम समझौते के बावजूद गाजा पट्टी में नए इजरायली हमलों में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई है. इसी बीच, अमेरिका और ईरान के बीच भी संघर्ष चरम पर पहुंच गया है, जहां ईरान ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य बेस को 10 बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया है.

यरूशलेम/तेहरान: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) (Middle-East) में शांति स्थापित करने के अमेरिकी प्रयासों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है. संयुक्त राज्य अमेरिका (US) की मध्यस्थता में हुए हालिया युद्धविराम समझौते के बावजूद, गुरुवार को गाजा पट्टी में ताजा इजरायली सैन्य हमलों में कम से कम छह फिलिस्तीनियों की मौत हो गई. गाजा की सिविल डिफेंस एजेंसी और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने इन मौतों की पुष्टि की है. इस बीच, क्षेत्र में स्थिति तब और अधिक विस्फोटक हो गई जब अमेरिका और ईरान के बीच जारी सीधी सैन्य जंग के तहत ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने जॉर्डन में स्थित एक प्रमुख अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दीं. इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को एक बार फिर बड़े क्षेत्रीय युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है. यह भी पढ़ें: Russia-Ukraine War: रूस के मिसाइल और ड्रोन हमले से कीव में 9 मंजिला इमारत ढही, मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका

गाजा में युद्धविराम के बीच इजरायली ड्रोन हमला

गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार को हुए विभिन्न हमलों के शिकार लोगों के शव स्थानीय अस्पतालों में लाए गए हैं। इनमें से सबसे घातक हमला मध्य गाजा के नुसेरात शरणार्थी शिविर (Nuseirat refugee camp) में हुआ, जहां एक इजरायली ड्रोन ने सीधे तौर पर एक इलाके को निशाना बनाया। इस ड्रोन स्ट्राइक में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई.

इसके अलावा, गाजा पट्टी के अलग-अलग हिस्सों में हुए अन्य हवाई हमलों में चार और नागरिकों ने अपनी जान गंवाई. स्थानीय प्रशासन का कहना है कि यह हमला पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय नियमों और हालिया घोषित संघर्षविराम का खुला उल्लंघन है.

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा सीधा सैन्य टकराव

गाजा में जारी हिंसा के समानांतर, अमेरिका और ईरान के बीच भी बड़े पैमाने पर सैन्य टकराव तेज हो गया है. बुधवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने घोषणा की थी कि अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर अतिरिक्त हवाई हमले शुरू कर दिए हैं.

अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, कमांडर-इन-चीफ के सीधे निर्देश पर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया, ताकि होर्मुज जलडमरू मध्य (Strait of Hormuz) में अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने की ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर किया जा सके.

ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी एयर बेस को बनाया निशाना

अमेरिकी हवाई हमलों के सीधे जवाब में, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने गुरुवार को जॉर्डन के उत्तरी हिस्से में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने 'अल-अजराक एयर बेस' (Al-Azraq air base) पर एक के बाद एक 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागने की जिम्मेदारी ली.

ईरानी सेना ने इस एयर बेस को "पश्चिम एशिया में दुश्मन का मुख्य कमांड और कंट्रोल सेंटर" करार दिया. ईरानी सरकारी प्रसारक 'आईआरआईबी' (IRIB) द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह मिसाइल हमला तेहरान पर हुए अमेरिकी हमलों के खिलाफ उनके प्रतिशोध का "दूसरा चरण" है. ईरानी सैन्य समूह ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी सेना ने अपनी कार्रवाई दोबारा दोहराई, तो मध्य पूर्व में स्थित अन्य सभी अमेरिकी सैन्य अड्डों पर इससे भी भीषण हमले किए जाएंगे.

नाजुक दौर में राजनयिक प्रयास

राजनयिक स्तर पर इस ताजा घटनाक्रम को बेहद चिंताजनक माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका समर्थित संघर्षविराम के इतनी जल्दी टूटने से यह साफ हो गया है कि क्षेत्र में शांति बहाल करने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशें कितनी नाजुक स्थिति में हैं. गाजा के स्थानीय संघर्ष ने अब एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय रूप ले लिया है, जहां वैश्विक शक्तियों की सीधी भागीदारी से आने वाले दिनों में तनाव और अधिक बढ़ने की आशंका है.

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