H-1B Visa Rules: 'अमेरिकियों को नौकरी से निकाल कर विदेशी प्रतिभा नहीं ला सकते'; जेडी वेंस की अमेरिकी कंपनियों को दो टूक चेतावनी, भारतीय प्रोफेशनल्स की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने वर्क वीजा नियमों को और सख्त करने का स्पष्ट संकेत दिया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कंपनियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अपने अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी करने वाली कंपनियों को प्रतिभा की कमी का बहाना बनाकर H-1B वीजा के जरिए विदेशी कामगारों को नियुक्त करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.
वाशिंगटन: अमेरिकी कार्यबल में स्थानीय नागरिकों को प्राथमिकता देने और सस्ते विदेशी श्रम के कथित उपयोग को रोकने के लिए ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा व्यवस्था पर निगरानी बेहद कड़ी कर दी है. Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक वीडियो संदेश में कॉरपोरेट अमेरिका को दो टूक संदेश दिया है कि कंपनियों का पुराना हायरिंग और ले-ऑफ रिकॉर्ड अब उनके वीजा आवेदनों की पात्रता तय करेगा.
वेंस ने कंपनियों की दोहरी नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो कंपनियां हजारों घरेलू कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा रही हैं, वे बाद में यह दावा नहीं कर सकतीं कि उन्हें देश में कुशल कर्मचारी नहीं मिल रहे हैं.
जेडी वेंस का सख्त बयान: '5,000 लोग निकालने वाली कंपनियां बहाने न बनाएं'
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उन तौर-तरीकों को रेखांकित किया जिन्हें प्रशासन समाप्त करना चाहता है:
- वेंस का तर्क: वेंस ने कहा, "ऐसी कंपनियां हैं जो H-1B के लिए आवेदन करती हैं और कहती हैं, 'अरे, हमें कर्मचारियों की सख्त जरूरत है, हमें लोग नहीं मिल रहे.' लेकिन जब आप उनका इतिहास देखते हैं, तो पता चलता है कि उन्होंने हाल ही में 5,000 लोगों की छंटनी की है. यह पूरी तरह अनुचित है."
- प्रतिस्थापन पर रोक: उन्होंने स्पष्ट किया, "यदि आप अमेरिकी कामगारों को नौकरी से निकाल रहे हैं, तो आपको उनकी जगह कम वेतन वाले विदेशी कामगारों को नियुक्त करने के लिए बाजार में नहीं जाना चाहिए. H-1B कार्यक्रम अमेरिकी अर्थव्यवस्था को समृद्ध बनाने के लिए है, न कि घरेलू कर्मचारियों को बदलने के लिए."
जेडी वेंस ने अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी करने वाली कंपनियों की कड़ी जांच के संकेत दिए
18 सितंबर का कार्यकारी आदेश: छंटनी के इतिहास की होगी जांच
यह बयान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 18 सितंबर 2026 को जारी किए गए आधिकारिक कार्यकारी आदेश की निरंतरता में आया है:
- एजेंसियों को निर्देश: इस आदेश के तहत श्रम विभाग (Department of Labor), होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) और विदेश विभाग (State Department) को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी कंपनी की H-1B याचिका को मंजूरी देने से पहले यह देखें कि क्या उस पद या विभाग में हाल ही में या निकट भविष्य में अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की गई है.
- पुराने आवेदनों का ऑडिट: श्रम विभाग के वेज एंड ऑवर डिवीजन को पूर्व में स्वीकृत लेबर कंडीशन एप्लिकेशन्स (LCAs) की भी समीक्षा करने का जिम्मा सौंपा गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ.
- अतिरिक्त शुल्क प्रावधान: प्रशासन ने कुछ H-1B श्रेणियों के लिए 100,000 डॉलर तक के विशेष शुल्क और लॉटरी के बजाय वेतन-आधारित आवंटन (Wage-based selection) पर भी जोर दिया है.
भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और कंपनियों पर क्या होगा असर?
इस नीतिगत बदलाव का सबसे व्यापक प्रभाव भारतीय प्रतिभाओं पर पड़ने की आशंका है:
- 70% हिस्सेदारी भारतीयों की: यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में स्वीकृत कुल H-1B वीजा में से करीब 70 प्रतिशत भारतीय मूल के पेशेवरों को मिले थे.
- टेक्नोलॉजी और हेल्थकेयर सेक्टर: अमेरिकी कंपनियां प्रौद्योगिकी, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, डेटा साइंस और स्वास्थ्य सेवा जैसे विशेष क्षेत्रों (Specialty Occupations) में दक्ष पेशेवरों के लिए बड़े पैमाने पर H-1B वीजा प्रायोजित (Sponsor) करती हैं.
- कड़े अनुपालन से बढ़ेगा समय: हालांकि प्रशासन ने इस वीजा पर पूर्ण प्रतिबंध (Blanket Ban) नहीं लगाया है, लेकिन कंपनियों की आंतरिक छंटनी और वेतन संरचना की कड़ी जांच के चलते भारतीय युवाओं के वीजा अप्रूवल में अधिक समय लगेगा और स्पॉन्सरशिप पाना पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगा.
क्या है आगे की राह?
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, इन कड़े कदमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आउटसोर्सिंग फर्में वीजा प्रणाली का दुरुपयोग न कर सकें और केवल अत्यधिक कुशल 'असाधारण प्रतिभाओं' को ही अमेरिका लाया जाए. वहीं, अमेरिकी टेक उद्योग और इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक पाबंदियों से अमेरिकी कंपनियों में वैश्विक नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है. आने वाले महीनों में संघीय एजेंसियों द्वारा जारी होने वाले विस्तृत नियमों पर अंतरराष्ट्रीय टेक बिरादरी की नजरें टिकी रहेंगी.