H-1B Visa Rules: 'अमेरिकियों को नौकरी से निकाल कर विदेशी प्रतिभा नहीं ला सकते'; जेडी वेंस की अमेरिकी कंपनियों को दो टूक चेतावनी, भारतीय प्रोफेशनल्स की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने वर्क वीजा नियमों को और सख्त करने का स्पष्ट संकेत दिया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कंपनियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अपने अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी करने वाली कंपनियों को प्रतिभा की कमी का बहाना बनाकर H-1B वीजा के जरिए विदेशी कामगारों को नियुक्त करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.

JD Vance (Photo Credits: X\@jdvance)

वाशिंगटन: अमेरिकी कार्यबल में स्थानीय नागरिकों को प्राथमिकता देने और सस्ते विदेशी श्रम के कथित उपयोग को रोकने के लिए ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा व्यवस्था पर निगरानी बेहद कड़ी कर दी है. Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक वीडियो संदेश में कॉरपोरेट अमेरिका को दो टूक संदेश दिया है कि कंपनियों का पुराना हायरिंग और ले-ऑफ रिकॉर्ड अब उनके वीजा आवेदनों की पात्रता तय करेगा.

वेंस ने कंपनियों की दोहरी नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो कंपनियां हजारों घरेलू कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा रही हैं, वे बाद में यह दावा नहीं कर सकतीं कि उन्हें देश में कुशल कर्मचारी नहीं मिल रहे हैं.

जेडी वेंस का सख्त बयान: '5,000 लोग निकालने वाली कंपनियां बहाने न बनाएं'

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उन तौर-तरीकों को रेखांकित किया जिन्हें प्रशासन समाप्त करना चाहता है:

जेडी वेंस ने अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी करने वाली कंपनियों की कड़ी जांच के संकेत दिए

18 सितंबर का कार्यकारी आदेश: छंटनी के इतिहास की होगी जांच

यह बयान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 18 सितंबर 2026 को जारी किए गए आधिकारिक कार्यकारी आदेश की निरंतरता में आया है:

भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और कंपनियों पर क्या होगा असर?

इस नीतिगत बदलाव का सबसे व्यापक प्रभाव भारतीय प्रतिभाओं पर पड़ने की आशंका है:

क्या है आगे की राह?

अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, इन कड़े कदमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आउटसोर्सिंग फर्में वीजा प्रणाली का दुरुपयोग न कर सकें और केवल अत्यधिक कुशल 'असाधारण प्रतिभाओं' को ही अमेरिका लाया जाए. वहीं, अमेरिकी टेक उद्योग और इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक पाबंदियों से अमेरिकी कंपनियों में वैश्विक नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है. आने वाले महीनों में संघीय एजेंसियों द्वारा जारी होने वाले विस्तृत नियमों पर अंतरराष्ट्रीय टेक बिरादरी की नजरें टिकी रहेंगी.

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