विदेश

मंदिर के वार्षिकोत्सव में पहुंचे जर्मन राष्ट्रपति

जर्मन राष्ट्रपति को यह मंदिर कई वर्षों से आमंत्रित कर रहा था लेकिन हर बार राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से विनम्रता से इंकार कर दिया जाता था.

मंदिर के वार्षिकोत्सव में पहुंचे जर्मन राष्ट्रपति
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

जर्मन राष्ट्रपति को यह मंदिर कई वर्षों से आमंत्रित कर रहा था लेकिन हर बार राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से विनम्रता से इंकार कर दिया जाता था. इस बार बात कुछ अलग रही. इस बार जर्मन राष्ट्रपति मंदिर में आए.जर्मनी के एक तमिल मंदिर के पुजारी ने जर्मन राष्ट्रपति को मंदिर के वार्षिकोत्सव में बुलाया और जर्मन राष्ट्रपति आ भी गए. जर्मनी के हाम शहर के कामाक्षी अंबाल मंदिर के प्रांगण के जब जर्मन राष्ट्रपति फ्रांक वाल्टर श्टाइनमायर अपनी कार से उतरे तो उनका स्वागत किसी फिल्म स्टार की तरह हुआ. उनके स्वागत के लिए जुटे लोग काफी देर तक तालियां बजाते रहे.

जर्मनी में पैदा हुईं और अब लंदन की एक फाइनेंस कंपनी में काम कर रहीं 25 साल की लियोनी दो हफ्ते की छुट्टियां लेकर मंदिर के उत्सव का हिस्सा बनने आई हैं. उन्होंने डीडब्ल्यू को बताया कि यह उनके, तमिल समुदाय, मंदिर और हाम शहर सभी के लिए बहुत खुशी का अवसर है. हर साल वो अपने परिवार के साथ इस उत्सव का हिस्सा बनती हैं. उनके पिता उत्सव में मंदिर के वॉलंटियर होते हैं और वो आगे भी इस परंपरा को जारी रखने के लिए हर साल आती रहेंगी.

बहुत समय से था इंतजार

जर्मन राष्ट्रपति को मंदिर में ले आने का कमाल किया है, मंदिर के प्रधान पुजारी शिवा श्री आरुमुगम भास्करकुरुक्कल ने. वह वर्षों से राष्ट्रपति कार्यालय को मंदिर के वार्षिकोत्सव में शामिल होने का निमंत्रण भेजते आ रहे थे लेकिन यह स्वीकार नहीं होता था. फिर भी उन्होंने निमंत्रण भेजना नहीं छोड़ा. इस साल राष्ट्रपति कार्यालय ने इसे स्वीकार कर लिया.

डीडब्ल्यू से बातचीत में प्रधान पुजारी ने इसे देवी की कृपा बताया. भास्करकुरुक्कल कहते हैं कि मंदिर कोई अपनी इच्छा से नहीं आता, देवी जिसे बुलाती हैं, वही यहां पहुंचता है. इसी विश्वास ने उन्हें लगातार प्रयास करने की प्रेरणा दी. वो राष्ट्रपति के आगमन की वजह आस्था को मानते हैं लेकिन श्रद्धालु इसे लेकर बेहद उत्साहित हैं.

चेन्नई से आने वाली एक श्रद्धालु जो 25 वर्षों से जर्मन शहर डोर्टमुंड में रह रही हैं, जर्मन राष्ट्रपति को मंदिर परिसर में देख भावुक हो गईं. डीडब्ल्यू से बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी हिंदी भाषा पर सीमित पकड़ के साथ कहा, "बहुत अच्छा लग रहा, बहुत खुशी हो रही.”

विशेष है हाम की रथ यात्रा

राष्ट्रपति के दौरे के चलते मंदिर के बाहर विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई. राष्ट्रपति जब मंदिर परिसर में पहुंचे तो सबसे पहले उन्हें प्रधान पुजारी की ओर से मंदिर के धार्मिक महत्व की जानकारी दी गई. जर्मन राष्ट्रपति ने श्रद्धालुओं को छोटा सा संबोधन भी दिया. वह शोभायात्रा की शुरुआत तक रुके. इसमें मंदिर से एक रथयात्रा निकाली जाती है.

करीब दो हफ्ते चलने वाले इस मंदिर उत्सव की शुरुआत 16 जुलाई को ध्वजारोहण के साथ हुई थी. इसके बाद कई धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए. इस उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण देवी की भव्य रथयात्रा ही होती है. यह उत्सव का आखिरी चरण है. इसके साथ ही उत्सव के समापन के कार्यक्रम शुरू हो गए हैं.

हर साल हजारों श्रद्धालु यूरोप के अलग-अलग देशों से इसमें शामिल होने पहुंचते हैं लेकिन इस साल जर्मन राष्ट्रपति के उत्सव में शामिल होने के चलते संख्या में और बढ़ोतरी हुई है. हाम जर्मनी के सबसे प्रमुख शहरों में से एक नहीं है. यहां जर्मन राष्ट्रपति का दौरा बेहद दुर्लभ माना जाता है. 1949 के बाद केवल तीन राष्ट्रपतियों ने यहां आधिकारिक दौरा किया है. अब फ्रांक वाल्टर श्टाइनमायर हाम आने वाले चौथे जर्मन राष्ट्रपति बन गए हैं.

हाम का श्री कामाक्षी अंबाल मंदिर यूरोप के सबसे बड़े हिंदू मंदिरों में गिना जाता है. यह तमिल हिंदू समुदाय का महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र है. मंदिर वर्षों से सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र रहा है. तमिल समुदाय के लोगों का कहना है कि यह जर्मनी की धार्मिक विविधता का प्रतीक है और यह मंदिर तमिल लोगों के लिए अंतर-सांस्कृतिक गतिविधियों का भी बड़ा केंद्र बन चुका है. आयोजकों का मानना है कि इससे मंदिर की पहचान और बढ़ेगी.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 26, 2026 07:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).