ब्लैक डेथ से हंटावायरस तक, जब समुद्र बना महामारी फैलने का रास्ता
समुद्र में चलने वाले जहाज सिर्फ यात्रियों और सामान को ही नहीं, बल्कि संक्रमणों को भी एक जगह से दूसरी जगह ले जाते रहे हैं.
समुद्र में चलने वाले जहाज सिर्फ यात्रियों और सामान को ही नहीं, बल्कि संक्रमणों को भी एक जगह से दूसरी जगह ले जाते रहे हैं. पहले भी कई बार कई बीमारियों के फैलने में पानी के जहाज अहम कड़ी बने हैं.क्रूज जहाज, एयरक्राफ्ट कैरियर और पुरानी लकड़ी की नावों पर संक्रमण फैलने का खतरा हमेशा ज्यादा रहता है. तंग जगहों में ज्यादा लोगों के साथ रहने से संक्रमण तेजी से फैलता है. समुद्र के बीच मदद पहुंचाना भी मुश्किल होता है. इतिहास गवाह है कि ब्लैक डेथ से लेकर कोविड महामारी तक कई बीमारियां जहाजों के जरिए फैलीं.
हाल ही में एमवी होंडियस नामक क्रूज जहाज पर हंटावायरस के संक्रमण से तीन लोगों की मौत हो गई. इसके बाद सभी यात्रियों को क्वारंटीन में रखा गया. इसी बीच फ्रांस के बोर्डो शहर में एक अन्य जहाज पर बुजुर्ग यात्री की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई. जिसके बाद 1,700 से ज्यादा यात्रियों को अंदर ही रहने को कहा गया. कई यात्रियों में पेट की बीमारी जैसे लक्षण भी दिखे. बाद में अधिकारियों ने बताया कि इसका हंटावायरस से कोई संबंध नहीं है. जांच में जहाजों पर फैलने वाला सबसे सामान्य संक्रमण 'नोरोवायरस' भी नहीं मिला.
क्या महामारी के लिए जहाज सबसे खतरनाक जगह हैं?
1918 की स्पेनिश फ्लू महामारी पर लिखते हुए अमेरिकी इतिहासकार अल्फ्रेड क्रॉस्बी ने कहा था कि महामारी के लिए जहाज सबसे खतरनाक जगह है. फ्रेंच सोसायटी ऑफ मैरीटाइम मेडिसिन के मानद अध्यक्ष ज्यां-प्येर ओफ्रे ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि समुद्री जहाजों पर बीमारी फैलने का खतरा दोहरी चुनौती पैदा करता है. पहला, यात्री और क्रू सदस्य एक-दूसरे को संक्रमित करते हैं. दूसरा, वे जब अन्य शहरों या देशों में जाते हैं, तो बीमारी वहां भी पहुंच सकती है.
ओफ्रे ने कहा कि फ्लू और कोविड-19 जैसे हवा से फैलने वाले वायरस और नोरोवायरस जैसी छूने या खाने से फैलने वाली बीमारियां जहाज पर तेजी से फैल सकती हैं. बंद जगह और लोगों के लगातार संपर्क में रहने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. ओफ्रे की समुद्री संक्रमणों पर लिखी किताब अगले महीने प्रकाशित होगी.
शोध में सामने आया है कि होंडियस क्रूज जहाज पर फैले हंटावायरस का एंडीज स्ट्रेन भी हवा में मौजूद छोटे कणों के जरिए फैल सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि हंटावायरस के और मामले सामने आ सकते हैं. लेकिन फिलहाल बड़े स्तर पर संक्रमण फैलने के संकेत नहीं मिले हैं.
जहाज पर तैयारी रखना जरुरी
साल 2020 में महामारी के चरम के दौरान कोविड ने कई जहाजों को अपनी चपेट में ले लिया था. लक्जरी क्रूज जहाज जानडाम और उस पर मौजूद बीमार यात्रियों को कई लैटिन अमेरिकी देशों ने प्रवेश देने से मना कर दिया था. बाद में उसे अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य में रुकने की अनुमति मिली.
फ्रांस के युद्धपोत 'शार्ल द गॉल' पर भी सैकड़ों नाविक कोविड से ग्रस्त हो गए थे. हालांकि सैन्य जहाजों पर काम करने वाले नाविक आमतौर पर युवा और फिट होते हैं. लेकिन क्रूज जहाजों के यात्री अक्सर बुजुर्ग और अधिक संवेदनशील होते हैं.
दोनों तरह के जहाजों में वायरस एक जैसे माहौल में फैलते हैं, जहां लोग तंग जगहों में साथ रहते हैं और रोजमर्रा का सामान व उपकरण साझा करते हैं. ओफ्रे कहते हैं, "हमने कोविड महामारी से बहुत कुछ सीखा है. क्रूज जहाजों पर कई सुधार किए गए हैं. वेंटिलेशन सिस्टम को बेहतर बनाया है जिससे हवा के जरिए फैलने वाले संक्रमण को रोकने में ज्यादा मदद मिलती है. जहाज पर मौजूद डॉक्टरों को अब पहले से बेहतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है."
दूसरा खतरा तब पैदा होता है जब संक्रमित यात्री जहाज से उतरते हैं. होंडियस के कैनरी द्वीप पहुंचने से पहले वहां की स्थानीय सरकार ने शुरुआत में उसके आने का विरोध किया था. पिछली सदियों में संक्रमित जहाजों को बंदरगाहों से दूर रखा जाता था. कई बार उन्हें छोटे अलग-थलग द्वीपों पर रोक दिया जाता. इन द्वापों को 'लाजारेट्टो' भी कहते हैं.
ओफ्रे बताते हैं, "उस समय नैतिक सोच अलग थी. क्वारंटीन का मतलब होता था- तुम अपने जहाज पर ही मर जाओ. यहां मत आना.'
अब एमवी होंडियस जैसे जहाजों के यात्रियों पर नजर रखी जाती है. यह सुनिश्चित किया जाता है कि वे अपने देशों में बीमारी लेकर न जाएं. जिन लोगों का सिर्फ यात्रियों के संपर्क में आना भी हुआ था, उन्हें कई देशों में क्वारंटीन कर हंटावायरस की जांच की जा रही है.
ब्लैक डेथ ने ली थीं करोड़ों जाने
आज बीमारियां हवाई जहाजों के जरिए तेजी से एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक पहुंच सकती हैं. लेकिन मानव इतिहास में ज्यादातर घटनाओं में संक्रमण समुद्र के रास्ते जहाजों से फैलता रहा.
1340 के दशक में सबसे भयानक महामारी मानी जाने वाली 'ब्लैक डेथ' भी जहाज के जरिए ही यूरोप पहुंची थी. जेनोआ के नाविक प्राचीन क्रीमियाई व्यापारिक केंद्र कफ्फा की घेराबंदी कर रहे थे. उसी दौरान मंगोल सेना, जिसे गोल्डन होर्ड कहा जाता था, ने प्लेग से संक्रमित लाशें दीवारों के ऊपर से फेंकीं. इससे नाविक संक्रमित हो गए.
जब ये नाविक भूमध्यसागर पार कर वापस लौटे, तो वे अपने साथ ऐसी महामारी लेकर आए जिसने यूरोप के कई हिस्सों में करीब 60 प्रतिशत आबादी को खत्म कर दिया. उस समय इतालवी नोटरी गैब्रियल दी मुस्सिस ने लिखा था, "हमारे लिए दुख की बात है कि हमने उन पर मौत के तीर फेंके.”
उन्होंने आगे लिखा, "जब हम उनसे बात करते थे, वे हमें गले लगाते थे और चूमते थे, तब हम अपने होंठों से जहर फैला रहे थे.'
(The above story first appeared on LatestLY on May 21, 2026 05:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

