प्राइड परेड के साथ बर्लिन के जीवन मूल्यों पर हमला हुआ है
लोगों का कहना है बर्लिन के प्राइड फेस्टिवल पर हमला इस शहर और उन सारे मूल्यों पर हमला है जिनके लिए बर्लिन मुस्तैदी से डटा है.
लोगों का कहना है बर्लिन के प्राइड फेस्टिवल पर हमला इस शहर और उन सारे मूल्यों पर हमला है जिनके लिए बर्लिन मुस्तैदी से डटा है. इसकी विविधता, इसकी उदारता और आजादी में भरोसा, इन सब पर हमला हुआ है.अली दरविश के लिए निजी तौर पर यह हमला उन सब चीजों पर है जिनसे मिल कर बर्लिन बना है. बड़ी मुश्किल से अपने आंसू रोकते हुए कहते हैं, "पैदाइशी मुसलमान, समलैंगिक का जीवन और पुलिस अधिकारी का काम, यह हमला कई सारे पहलुओं को छूता है जिनसे मैं हूं."
शनिवार की रात बर्लिन की प्राइड परेड फेस्टिवल के पास भीड़ पर चढ़ी वैन और फिर चाकू से हमले में एक आदमी की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए. बर्लिन में यह परेड 1979 से ही हर साल हो रही है. इसका नाम है क्रिस्टोफर स्ट्रीट डे, बर्लिन या बर्लिन प्राइड परेड.
इस्लामी चरमपंथी हमला
अधिकारियों का मानना है कि यह एक इस्लामी चरमपंथी हमला था. रविवार शाम संदिग्ध को बर्लिन के उपनगर में पुलिस की कार्रवाई में हमले के संदिग्ध की मौत हो गई. अधिकारियों के मुताबिक 21 साल का अबुल बी. लेबनानी मूल का जर्मन नागरिक था. वह अधिकारियों की तरफ हाथ में धारदार हथियार लेकर दौड़ा था तब पुलिस ने कम से कम एक गोली उसके पैर में मारी.
रविवार को 34 साल के दरविश बड़ी उदासी से एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोगों को टियरगार्टेन पार्क में एक-एक कर आते देख रहे थे. हमला यहीं हुआ था. लोग फूल रख रहे थे एक दूसरे को गले लगाते हुए अविश्वास भरी नजरों से उस वैन की तरफ देख रहे थे जो भीड़ से टकराई थी. पुलिस ने अब भी वहां घेराबंदी कर रखी है और दर्जनों पुलिस वाले पहरे पर थे.
प्यार के जश्न पर हमला
दरविश की तरह ही बहुत सारे लोग कुछ घंटे पहले जीवन और प्यार का जश्न मना रहे थे. बराबरी के लिए प्रदर्शन करते हुए लोग अपने समुदाय के प्रति बढ़ती नफरत के खिलाफ चेतावनी दे रहे थे. दरविश ने कहा, "मैं अपनी सतरंगी शर्ट पहने एक बैनर लेकर परेड में गया था जिस पर लिखा था, 'कुछ लोग प्यार से क्यों डरते हैं मगर नफरत से नहीं?' और उसके बाद बीती रात मैं एक पार्टी में जाने वाला था, जब दोस्तों ने मुझे यह पूछने के लिए फोन करना शुरू किया कि क्या मैं ठीक हूं."
जब उन्हें हमले का पता चला तो उन्होंने पार्टी में जाना रद्द कर दिया दुखी हो कर घर चले गए. हालांकि रविवार सुबह जब वह जगे तब उन्हें हमले की गंभीरता समझ में आई." दरविश कहते हैं, "मैंने खुद से पूछा एक पुलिस अधिकारी के रूप में मैं टक्कर वाली जगह क्यों नहीं गया ताकि दोस्तों की मदद कर सकूं. मैंने अपने आप से पूछा कि समलैंगिक के रूप में क्या हमें और ज्यादा डर में जीना होगा, वो भी तब जबकि पहले से ही हम नफरत और उत्पीड़न सह रहे हैं. मैंने पूछा कि क्या मुसलमान होने की वजह से हमारा समुदाय अब नस्लभेद के और खतरों का सामना करेगा."
ध्रुवीकरण का खतरा
बर्लिन में जन्में दरविश की जड़ें लेबनान और फलस्तीन में हैं. उन्हें इस बात की चिंता है कि इन हमलों से जर्मन समाज का ध्रुवीकरण और बढ़ेगा. उन्होंने कहा, "सचमुच आज सुबह से मैं बहुत बेचैन हूं." वह मुसलमान समलैंगिक एनफ्लुएंसर भी हैं और सोशल मीडिया पर खूब सारे पोस्ट डालते हैं जिनमें अकसर सकारात्मक बातें रखने की कोशिश होती है. उनका कहना है, "हम लोगों के मन में मौजूद नफरत से छुटकारा नहीं पा सकते, यह बुरे से और बुरा होता जा रहा है."
हालांकि वह नहीं चाहते कि नफरत जीते और उनके मन की गहराई में अब भी उम्मीद है, "बर्लिन के लोग इसका सदुपयोग करेंगे, वे साथ मिल कर काम करेंगे और शायद यहां से एक और बेहतर बर्लिन की शुरुआत होगी."
टियरगार्टेन में पहुंचे दूसरे लोग भी नाराजगी और हैरत के साथ दृढ़ता भी दिखा रहे हैं. जर्मनी में एलजीबीटीक्यू समुदाय के प्रमुख संगठन एलएसवीडी+ के शीर्ष अधिकारी आंद्रे लेहमान का कहना है, "कल (शनिवार को) जो हुआ उससे हम स्तब्ध हैं, इस संदिघ हमले ने क्वीयर समुदाय के दिल पर चोट किया है."
उन्होंने यह भी कहा हमला, "उन लोगों पर असर डालता है जो इस सप्ताहांत अपने अधिकारों, अपनी विविधता के लिए संघर्ष में बर्लिन की सड़कों पर उतरे थे, निश्चित रूप से यह एक राजनीतिक हरकत है और लोगों के उत्सव को प्रभावित नहीं कर सकता."
बढ़ रही है नफरत
लेहमान ने बताया, "जर्मनी में समुदाय के प्रति नफरत बीते कुछ सालों में ही दस गुना बढ़ गई है. ईमानदारी से कहूं तो कई सालों तक समाज की तरफ से कोई हो-हल्ला नहीं था."
26 साल के एशले जंप यूके में रहते हैं और शनिवार की प्राइड परेड में हिस्सा लेने बर्लिन आए थे. हमले से थोड़ी देर पहले ही वह वहां से बाहर निकल गए थे. जंप अभी भी हैरत में हैं. रविवार को वह हमले वाली जगह के पास मेमोरियल पर फूल रखने आए. उन्होंने कांपती आवाज में समाचार एजेंसी एपी से कहा, "वे हमें कभी मिटा नहीं सकेंगे, हम कभी खत्म नहीं होंगे. जब तक मानवता है, हमारा अस्तित्व रहेगा. हमें हटाया नहीं जा सकेगा."