सेना के बाद खुफिया एजेंसियों को ताकतवर बनाने में जुटा जर्मनी
जर्मन सरकार ने देश की खुफिया एजेंसियों में बड़े सुधारों की तैयारी की है.
जर्मन सरकार ने देश की खुफिया एजेंसियों में बड़े सुधारों की तैयारी की है. विदेशी खतरों के खिलाफ कदम उठाने के लिए उन्हें ज्यादा अधिकार दिए जा रहे हैं.जर्मनी की खुफिया सेवाओं को सीआईए और मोसाद जैसे अधिकार नहीं हैं. देश की खुफिया सेवाओं में सुधार के लिए बीते कई महीनों से चर्चा चल रही है. यहां खुफिया सेवाओं के लिए जानकारी जुटाने और रिपोर्ट तैयार करने पर कई तरह की पाबंदियां और रुकावटें हैं. अब इन मामलों में रोक हटा कर उन्हें ज्यादा अधिकार दिए जा रहे हैं.
ताकतवर खुफिया एजेंसियों की जरूरत
चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की गठबंधन सरकार की दलील है कि जर्मनी को ज्यादा ताकतवर खुफिया एजेंसियों की जरूरत है जिससे कि बाहरी विदेशी ताकतों, आतंकवादी गुटों और साइबर अपराधियों से पैदा हुए खतरों का सामना किया जा सके.
जर्मनी रूस संबंधों पर जासूसी का साया
जर्मन अधिकारियों ने रूस पर तोड़फोड़, जासूसी और देश के खिलाफ दुष्प्रचार का अभियान चलाने का आरोप लगाया है. यूक्रेन के खिलाफ रूसी जंग में जर्मनी यूक्रेन को सबसे अधिक सैन्य सहायता देने वाले देशों में है.
जर्मन संसद की खुफिया निरीक्षण कमेटी के प्रमुख मार्क हेनरिषमान ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा, "हम ना सिर्फ रूस बल्कि दूसरों के साथ भी एक गहरे हाइब्रिड संघर्ष में हैं. हमारी खुफिया सेवाओं को समय के साथ चलना होगा और चुनौतियों से एक कदम आगे रहना होगा." उन्होंने दलील दी कि जर्मनी के सतर्क रवैये ने इसे "चुनौतियों के पीछे" कर दिया है और यह यूरोपीय सुरक्षा में ठीक से योगदान नहीं कर पा रहा है.
हर दिन 'हाइब्रिड' युद्ध के डर का सामना कर रहा है जर्मनी
बदलावों की जरूरत पर बल देते हुए हेनरिषमान ने हाल की कुछ घटनाओं का जिक्र किया जिसमें पिछले हफ्ते लाइपजिष एयरपोर्ट पर विस्फोटकों से भरा ड्रोन मिलना शामिल है. उनका कहना है, "हम ऐसे विरोधियों का सामना कर रहे हैं जो किसी नियम को नहीं मानते. उनमें कानून और व्यवस्था के लिए कोई इज्जत नहीं है. उनका लक्ष्य ना सिर्फ पश्चिमी देशों, यूरोपीय संघ और जर्मनी पर दबाव डालना है बल्कि वे चाहते हैं कि ये झुक कर घुटनों पर आ जाएं."
घातक अभियान नहीं
कई दशकों से जर्मनी ने अपनी विदेशी खुफिया एजेंसी बीएनडी और घरेलू खुफिया एजेंसी बीएफवी को सख्त पाबंदियों में जकड़ रखा है और मोटे तौर पर उन्हें सीआईए या मोसाद की तरह गुप्त जासूसी अभियानों की अनुमति नहीं मिलती.
जर्मन खुफिया एजेंसी में पहला विदेशी मूल का अधिकारी
ये नियम लागू करने की एक वजह नाजी तानाशाही और कम्युनिस्ट पूर्वी जर्मनी में अधिकारों का दुरुपयोग है. इसके साथ ही जर्मन लोगों में निजता के अधिकारों को लेकर ज्यादा मजबूत अहसास भी एक बड़ा कारण है.
लंदन के किंग्स कॉलेज के प्रोफेसर पीटर नॉयमान ने एएफपी से कहा, "जर्मन खुफिया सेवाएं हाल तक महज जानकारी जुटाने वाली एजेंसियां रही हैं. उनके पास जानकारी जुटाने और नीति निर्माताओं को एक साफ परिदृश्य दिखाने के लिए कुछ अधिकार हैं लेकिन उन जानकारियों के उपयोग को लेकर उन पर बहुत सारी पाबंदियां हैं."
2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद जर्मनी ने अपनी सेना को मजबूत करने के लिए रिकॉर्ड मात्रा में धन खर्च किया है. हेनरिषमान और दूसरे लोगों की दलील है कि इसके साथ ही खुफिया सेवाओं का विस्तार की भी जरूरत है.
खुफिया सेवाओं को क्या अधिकार मिलेगा
सरकार ने जो प्रस्ताव तैयार किया उनमें खुफिया एजेंसियों को अब खुद साइबर हमले करने के भी अधिकार मिलेंगे. विदेशी आइटी सिस्टम का इस्तेमाल अगर बाहरी करते हैं तो उन्हें बेकार करने या फिर धन के बहाव को रोकने के लिए एजेंसियों को ऐसे हमले करने के अधिकार मिलेंगे.
दोनों एजेंसियों के लिए जानकारी जुटाने और आंकड़ों का विश्लेषण करने के अधिकार का भी विस्तार किया जा रहा है. इनमें ज्यादा बड़े आंकड़ों के विश्लेषण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कुछ आंकड़ों को ज्यादा लंबे समय तक अपने पास रखने के अधिकार भी शामिल होंगे. 700 पन्नों में इस सुधार पैकेज का ब्यौरा है जिसमें ऑनलाइन सर्विलांस और ट्रैकिंग जैसे विवादित उपायों के अधिकार के लिए नियमावली भी शामिल है.
विदेशी खुफिया एजेंसियों को दुर्लभ मामलों में विदेशों में तोड़फोड़ के अभियान की मंजूरी हासिल करने का भी प्रावधान किया गया है. हालांकि किसी को मारने या दूसरे घातक अभियानों पर जर्मन कानूनों के तहत अब भी सख्त पाबंदी लागू रहेगी.
वास्तविक खुफिया सेवा
जर्मनी के गृह मंत्री आलेक्जांडर डोबरिंट ने बिल्ड अखबार से कहा है, "हम अपनी खुफिया एजेंसियों को वास्तविक खुफिया एजेंसियों में बदल रहे हैं. हम हाइब्रिड खतरों और तोड़फोड़, जासूसी, साइबर हमलों के जरिए अस्थिरता फैलाने की विदेशी ताकतों की कोशिशों का जवाब दे रहे हैं."
जर्मनी में यूरोप की सबसे ताकतवर सेना बनाएंगे मैर्त्स
डोबरिंट ने यह भी कहा कि ये सुधार जर्मनी को "दुनिया में हमारी सहयोगी एजेंसियों के साथ बराबरी में ले आएंगे."
नॉयमान का कहना है कि ब्रिटेन, फ्रांस और नीदरलैड्स जैसे जर्मनी के कई यूरोपीय सहयोगी देशों में जासूसी संस्थाओं को पहले से ही "काफी ज्यादा अधिकार हैं." नॉयमान के मुताबिक कई बार गुप्त अभियानों की सख्त सीमाएं मित्र देशों की खुफिया एजेंसियों के साथ सहयोग को मुश्किल और संयुक्त अभियानों को दुर्लभ बना देती हैं. उन्होंने एएफपी से कहा, "अब समय आ गया है कि जर्मन खुफिया एजेंसियों के पास दूसरे यूरोपीय लोकतंत्रों के समान ही अधिकार हों."
बुनियादी अधिकारों के उल्लंघन की आशंका
इन अधिकारों को लेकर कुछ लोग आशंकाएं भी जता रहे हैं. ग्रीन पार्टी के सांसद कोन्सटांटिन फॉन नॉत्स खुफिया निरीक्षण कमेटी के उप प्रमुख हैं. उनका कहना है, "नए और सुदृढ़ अधिकार मौजूदा चुनौतीपूर्ण सुरक्षा वातावरण के लिहाज से उपयुक्त हैं."
हालांकि उनकी यह भी दलील है कि मौजूदा प्रस्तावित विधेयक "बहुत आगे" चला गया है जो एजेंसियों की स्वतंत्र निगरानी को मजबूत करने में नाकाम है. इसके साथ ही जर्मनी के संविधान में खुफिया एजेंसियों को किसी तरह के पुलिस अधिकार देने की जो पाबंदी है उसके उल्लंघन का खतरा है.
सोसाइटी फॉर सिविल राइट्स ने भी दलील दी है कि डिजिटल सर्विलांस के अधिकार "बुनियादी अधिकारों का गहरा उल्लंघन कर सकते हैं."