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Pune PMC Recruitment Scam: पुणे मनपा भर्ती घोटाले में जेजुरी देवस्थान ट्रस्टी डॉ. राजेंद्र खेड़ेकर गिरफ्तार; 2.75 करोड़ की ठगी, 3 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड

पुणे महानगर पालिका (PMC) में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले फर्जी भर्ती रैकेट में शिवाजीनगर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. पुलिस ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को जेजुरी स्थित प्रसिद्ध खंडोबा मार्तंड देवस्थान ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. राजेंद्र बबनराव खेड़ेकर को गिरफ्तार कर लिया है.

Pune PMC Recruitment Scam: पुणे मनपा भर्ती घोटाले में जेजुरी देवस्थान ट्रस्टी डॉ. राजेंद्र खेड़ेकर गिरफ्तार; 2.75 करोड़ की ठगी, 3 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

पुणे: महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी पुणे में सरकारी विभागों में नौकरी के नाम पर चल रहे बड़े भर्ती घोटाले का भंडाफोड़ हुआ है. Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार, शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन की टीम ने पुणे नगर निगम भर्ती फर्जीवाड़े के मुख्य संदिग्धों में शामिल जेजुरी देवस्थान के ट्रस्टी डॉ. राजेंद्र बबनराव खेड़ेकर को गिरफ्तार कर लिया है.

वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक गिरीश दिघावकर के नेतृत्व में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर पुणे की सत्र अदालत में पेश किया, जहां अदालत ने मामले की गहन वित्तीय जांच और साक्ष्य जुटाने के लिए आरोपी को 3 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश दिया.

फर्जी लेटरहेड, सील और जाली सर्विस बुक से दिया धोखा

The Free Press Journal की रिपोर्ट के अनुसार, मई 2022 से मई 2025 के बीच यह गिरोह बेहद शातिराना तरीके से काम कर रहा था:

  • असली जैसे दिखने वाले दस्तावेज: बेरोजगार उम्मीदवारों को झांसा देने के लिए पीएमसी के जाली लेटरहेड, नकली मुहरें और वरिष्ठ नगर निगम अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर तैयार किए गए थे.
  • फर्जी सर्विस रिकॉर्ड: पीड़ितों को बाकायदा जाली नियुक्ति पत्र (Appointment Letters), फर्जी आई-कार्ड, मेडिकल सर्टिफिकेट और सर्विस बुक तक जारी की जाती थीं.
  • अकाउंट में फर्जी सैलरी का नाटक: गिरोह का नेटवर्क इतना शातिर था कि कुछ मामलों में उम्मीदवारों को यकीन दिलाने के लिए उनके बैंक खातों में वेतन जमा होने जैसी फर्जी प्रविष्टियां और नकली सैलरी स्लिप भी तैयार करके दी गईं.

₹45 लाख की शुरुआती शिकायत से ₹2.75 करोड़ तक पहुंचा घोटाला

इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश सतारा निवासी धर्मचंद्र अरुण देवकांत की शिकायत से हुआ:

  • पीड़ित ने आरोप लगाया था कि मनपा में जूनियर इंजीनियर पद पर पक्की नौकरी दिलाने के बदले उससे ₹45 लाख ऐंठे गए थे.
  • Punekar News की रिपोर्ट के अनुसार, जब पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो सामने आया कि गिरोह ने 14 से अधिक उम्मीदवारों से कुल मिलाकर ₹2.75 करोड़ से अधिक की ठगी की है.
  • पुलिस का अंदेशा है कि इस रैकेट का शिकार बनने वाले युवाओं की संख्या 100 से अधिक हो सकती है, जिसकी अलग-अलग शिकायतों की जांच की जा रही है.

मनपा का निलंबित चपरासी भी आरोपी

इस सिंडिकेट में नगर निगम का अंदरूनी तंत्र भी लिप्त पाया गया है:

  • मामले में पीएमसी के शिक्षा विभाग से जुड़े चपरासी शिवानंद बालासाहेब पाटिल और नमिता गोवर्धन बंसोडे सहित कई अन्य सहयोगियों के नाम सामने आए थे.
  • नगर निगम द्वारा कराई गई प्राथमिक आंतरिक जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद पाटिल को पहले ही निलंबित कर दिया गया था और मनपा प्रशासन ने पुलिस में औपचारिक एफआईआर दर्ज कराई थी.

अदालत ने पहले खारिज कर दी थी अग्रिम जमानत याचिका

गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी राजेंद्र खेड़ेकर ने पुणे सत्र अदालत में अग्रिम जमानत की गुहार लगाई थी:

  • अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ए.के. शर्मा ने अगस्त में उसकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि यह बेरोजगार युवाओं को धोखा देने वाला एक संगठित अपराध है, जिसमें पैसे के लेन-देन (Money Trail) और अन्य पीड़ितों की पहचान के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है.
  • पिछले दो महीनों से पुलिस आरोपी की तलाश कर रही थी, जिसे पुख्ता सूचना के आधार पर शिवाजीनगर पुलिस ने अंततः दबोच लिया.

पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों, कॉल रिकॉर्ड्स और जब्त किए गए कंप्यूटर डेटा की पड़ताल कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ठगी की रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर की गई थी.

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 30, 2026 06:31 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).