आखिरकार जर्मनी में भी पिछड़ गया नगद भुगतान
कई दशकों तक जर्मनी में भुगतान का राजा रहा नगद अब पिछड़ गया है.
कई दशकों तक जर्मनी में भुगतान का राजा रहा नगद अब पिछड़ गया है. डेबिट कार्ड और मोबाइल फोन से डिजिटल भुगतान की सुविधा ने अब सबको अपना मुरीद बना लिया है.तकनीकी दुनिया में मजबूत होने के बावजूद जर्मनी में लोग भुगतान के लिए नगद पैसा देना ही पसंद करते आए थे. यहां भारत की तरह भुगतान करने वाले यूपीआई ऐप उतने अधिक इस्तेमाल में नहीं हैं.हालांकि अब स्थिति बदल गई है. बुधवार को जर्मनी के केंद्रीय बैंक ने बताया कि ज्यादातर लेन देन अब कैशलेस यानी बिना नगदी के होने लगे हैं. जर्मन अर्थव्यवस्था के लिए यह नई बात है.
नगद भुगतान कम हुआ
इस मामले में जर्मनी अब तक अपने यूरोपीय पड़ोसियों से काफी पीछे रहा था. करंसी नोट और सिक्के यहां भुगतान के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहे थे. दूसरे देशों से आने वाले लोग यहां नगदी का इस्तेमाल देख हैरान होते थे. बस, ट्रेन की टिकट से लेकर दुकानों, रेस्त्रां या बार में भी छोटी-मोटी या फिर बड़ी खरीदारी और सेवाओं के लिए लोग नगद भुगतान ही करते थे.
लेकिन जर्मनी के लोग भी अब कम नगदी का इस्तेमाल करने वाले समाज में बदल रहे हैं. जर्मनी के केंद्रीय बैंक यानी बुंडेसबांक ने भुगतान के तरीकों के बारे में हर दो साल पर अपनी रिपोर्ट जारी करता है. बुधवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल 45 फीसदी भुगतान में ही नगदी का इस्तेमाल किया गया. 2023 में 51 फीसदी भुगतान नगदी से हुए थे.
डिजिटल भुगतान बनी पसंद
यह रिपोर्ट सर्वे में दिए सवालों के जवाब और सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच जमा किए गए भुगतान के आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है. इसमें पता चला है कि करीब 26 फीसदी भुगतान डेबिट कार्ड से किए गए जबकि मोबाइल फोन या स्मार्टफोन से भुगतान की हिस्सेदारी 10 फीसदी है. यह दो साल पहले की तुलना में चार फीसदी ज्यादा है.
भुगतान के आकार को देखें तो नगदी दूसरे नंबर पर संयुक्त रूप से बैंक से सीधे डेबिट होने वाले भुगतान के साथ है. डेबिट कार्ड से होने वाला भुगतान यहां भी शीर्ष पर है. बुजुर्ग लोग खास तौर से जिनकी सेहत अच्छी नहीं या फिर जो कम आय वर्ग के हैं और जिनके पास डिजिटल अनुभव नहीं है, ज्यादातर वही लोग अब नगदी का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं.
नगद भुगतान बंद होने की चिंता
बुंडेसबांक के अधिकारी बुर्कहाल्ड बाल्त्स ने समझाया, "निजी पसंद चाहे जो हो, सर्वे में शामिल 80 फीसदी लोगों ने माना कि नगद भुगतान करने में सक्षम होना जरूरी है." हालांकि एटीएम और बैंक की शाखाओं के बंद होने से अब नगदी हासिल करना मुश्किल होता जा रहा है. खासतौर से ग्रामीण इलाकों में तो इसकी बहुत दिक्कत है.
सर्वे में शामिल लोगों ने बताया कि वे स्थानीय खरीदारी के लिए नगद भुगतान करने में 94 फीसदी तक सफल होते हैं. जिन जगहों पर भुगतान के लिए नगदी स्वीकार नहीं हो रही है उनमें सार्वजनिक परिवहन और दुकानों के सेल्फ सर्विस चेकआउट काउंटर हैं. बहुत से लोगों को यह चिंता भी है कि जिस तेजी से डिजिटल भुगतान अपने पैर फैला रहा है, कहीं एक दिन नगद भुगतान पूरी तरह बंद ना हो जाए.
यूरोपीय संघ में कैशलेस भुगतान का चलन बहुत तेजी से बढ़ रहा है. हालांकि यूरोपीय आयोग और यूरोपीय सेंट्रल बैंक दोनों ने उन आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की है कि नगद भुगतान पूरी तरह से खत्म हो सकता है.