सांपों की उत्पत्ति का रहस्य खोल सकता है यह दुर्लभ जीवाश्म
धरती पर सांप पहली बार डायनोसॉर के युग में आए थे.
धरती पर सांप पहली बार डायनोसॉर के युग में आए थे. शुरुआती दौर के सांपों की प्रजातियों के जीवाश्म अच्छी हालत में नहीं मिले हैं इसलिए वैज्ञानिकों को उनकी उत्पत्ति की कहानी बुनने में दिक्कत थी जो अब दूर हो गई है.दक्षिण पश्चिमी ब्राजील में वैज्ञानिकों को सांप का यह जीवाश्म मिला है जिसे 'तामेतारा मिरिम' नाम दिया गया है. यह क्रेटेशियस काल में 7.5-8.5 करोड़ साल के बीच इस धरती पर रहा था. करीब 17 इंच लंबा सांप हरे भरे वातावरण में दूसरे जीवों के साथ रहा था. तब वहां बहुत से लंबी गरदन वाले शाकाहारी डायनोसॉर, मगरमच्छ और पक्षी रह रहे थे.
इस जीवाश्म में तामेतारा का पूरा शरीर नहीं है लेकिन उसके सिर का हिस्सा इतनी अच्छी तरह से संरक्षित है कि वैज्ञानिक उसकी मदद से उसके दिमाग की संरचना तैयार कर लेंगे. दिमाग की आकृति, खोपड़ी और हड्डियों की सूक्ष्म संरचना ने दिखाया है कि यह प्रजाति जमीन में बिल खोद कर या सुरंग बना कर रहती थी. इस जीवनशैली को फसोरियल कहा जाता है. आज के दौर में कोरल स्नेक इसी तरह जीवन बिताते हैं.
कब और कहां से आए सांप
सांप की उत्पत्ति छिपकली जैसे उनके पूर्वजों से हुई थी. माना जाता है कि धरती पर सांप सबसे पहले करीब 17 करोड़ साल पहले जुरासिक काल में विकसित हुए थे. हालांकि उस दौर के सांपों का कोई संरक्षित जीवाश्म अब तक नहीं मिला है. सिर्फ क्रेटेशियस काल के मुट्ठी भर जीवाश्म हैं जो बहुत टूटे फूटे हैं. क्रेटेशियस काल में ही डायानोसॉर धरती से लुप्त हुए थे.
करोड़ों साल पहले धरती पर शुरुआती जीव कैसे चला?
तियागो सिमोएस न्यू जर्सी की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में विकासवादी जीवविज्ञान (इवॉल्यूशनरी बायोलॉजी) के प्रोफेसर और नेचर जर्नल में सांपों के बारे में बीते हफ्ते छपी रिसर्च रिपोर्ट के प्रमुख लेखक हैं. सिमोएस का कहना है, "सांप रीढ़ वाले यानी कशेरुकी जीवों में अत्यधिक शारीरिक योजना वाले जीवों के प्रतिनिधि हैं. इस असाधारण मगर काफी विविधता वाला यह समूह अब भी कशेरुकी जीवों की उत्पत्ति के सबसे बड़े रहस्यों में है."
सिमोएस का कहना है कि जीवाश्म में सांप की खोपड़ी का करीब 60 फीसदी हिस्सा और मेरुदंड का 70 फीसदी हिस्सा संरक्षित है. ब्राजील के साओ पाओलो स्टेट की प्रेसिडेंटे प्रुडेंटे म्युनिसिपल्टी में यह जीवाश्म मिला है. इसके सिर वाले हिस्से में सामने की तरफ दिमाग वाली जगह और खोपड़ी का उपरी हिस्से की हड्डियां संरक्षित हैं जबकि दूसरी तरफ वाले हिस्से में निचला जबड़ा इतनी अच्छी स्थिति में है जैसे कि सांप के जीवित रहते होता.
सांपों की उत्पत्ति का जटिल इतिहास
सिमोएस के मुताबिक तामेतारा जिस स्थिति में मिला है, क्रेटेशियस काल का उस तरह के जीवाश्म वैज्ञानिकों के पास कुल मिला कर सिर्फ चार और दूसरी प्रजातियों के हैं. सिमोएस का यह भी कहना है कि इस जीवाश्म से जो शुरुआती जीव के तंत्रिका तंत्र की जो जानकारी हमें मिलेगी उसे कुछ समय पहले तक जीवाश्म से हासिल कर पाना हमारे लिए असंभव जैसा था.
सिमोएस का कहना है, "यह शुरुआती सांपों की उत्पत्ति के ज्यादा जटिल इतिहास को दिखा रहा है: सांपों में तंत्रिका संवेदी अनुकूलनों की अलग वातावरणों के लिए एक विशाल शुरुआती विविधता जो ना तो जल्दी हुई ना ही सीधी. इसमें सांपों की उत्पत्ति के लंबे दौर में उनका अलग अलग वातावरणों में स्वतंत्र रूप से जाना शामिल है."
जीवाश्मों से ने दिखाया है कि क्रेटेशियस काल के सांप बिल बना कर रहने, जमीन पर और समुद्री जीवनशैली के लिए खुद को ढाल चुके थे. सिमोएस के मुताबिक सांपों के पूर्वजों को विकास के लिए एक ही तरह का वातावरण नहीं मिला था बल्कि वे कई वातावरणों में विकसित हुए.
पैर वाला सांप
सिमोएस का कहना है कि बहुत संभावना है कि तामेतारा ने कीटों को अपना आहार बनाया होगा हालाकि उसकी पोषण को लेकर सीधे सबूत नहीं मिले हैं. जीवाश्म के दांत नहीं हैं इसलिए यह पता नहीं चल सका है कि तामेतारा जहरीला था या नहीं.
वर्तमान में सांपों के हाथ पांव नहीं होते हालांकि जीवाश्म से पता चल रहा है कि शुरुआती सांपों के पास पिछला पैर था. तामेतारा का कूल्हे वाला हिस्सा संरक्षित नहीं है हालांकि सिमोएस के मुताबिक इसके पास पैर थे. तामेतारा का कोई सीधा वंशज इस वक्त धरती पर मौजूद नहीं है. सिर वाले हिस्से के जीवाश्म के आधार पर वैज्ञानिक ना सिर्फ तामेतारा बल्कि दूसरे क्रेटेशियस सांप 'डिनिलिसिया पैटागोनिका' के दिमाग का भी संरचना तैयार करेंगे. डिनिलिसिया करीब 2 मीटर तक लंबा था.
सिमोएस का कहन है कि आधुनिक सांपों की तुलना में तामेतारा के दिमाग का मस्तिष्क गोलार्ध तुलनात्मक रूप से छोटा है जो दिमाग का संज्ञानात्मक हिस्सा है, साथ ही ऑप्टिक टेक्टम भी छोटा ही है जो दिमाग का वह हिस्सा है जो देखने के लिए जिम्मेदार होता है. यह फर्क उसकी बिल खोद कर रहने की प्रवृत्ति को दिखाते हैं. जमीन के भीतर रहने के कारण ऐसे जीवों को देखने की जरूरत जमीन पर रहने वाले जीवों की तुलना में कम होती है.