शवों में नाक के बाल गिनने वाले को मिला इग्नोबेल
मजेदार और लीक से हट कर खोज करने वाले वैज्ञानिकों को दिये जाने वाले इग्नोबेल पुरस्कारों का ऐलान हो गया है.
मजेदार और लीक से हट कर खोज करने वाले वैज्ञानिकों को दिये जाने वाले इग्नोबेल पुरस्कारों का ऐलान हो गया है.लोगों को हंसाने वाली खोज करने वाले वैज्ञानिकों को दिये जाने वाले इग्नोबेल पुरस्कारों का ऐलान हो गया है. जिन खोजों को इस साल पुरस्कृत किया गया है उनमें शवों के नाक के बालों की गिनती, मरी हुई मकड़ियों का दोबारा इस्तेमाल और चट्टानों को चाटने की वजह बताने जैसी खोजें शामिल हैं.
गुरुवार को इन पुरस्कारों का ऐलान किया गया, जो हर साल मजाकिया वैज्ञानिक खोजों के लिए दिये जाते हैं. 33वां इग्नोबेल पुरस्कार समारोह ऑनलाइन जारी किया गया और इसे पहले से ही रिकॉर्ड कर लिया गया था.
कोविड महामारी के दौरान पहली बार यह समारोह ऑनलाइन हुआ था और तब से हर साल यह समारोह इंटरनेट के जरिये प्रसारित किया जाता है. समारोह में दस खोजों को सम्मानित किया गया.
कैसी-कैसी खोज
जीतने वालों में पोलैंड के यान सालासीविच शामिल हैं जिन्हें केमिस्ट्री और जियोलॉजी के लिए पुरस्कार मिला. उन्होंने अपने शोध में इस सवाल का जवाब खोजा है कि बहुत से वैज्ञानिक चट्टानों को क्यों चाटते हैं.
2017 में सालासीविच ने पैलिओंटोलॉजिकल एसोसिएशन के पत्र में प्रकाशित अपने शोध पत्र में लिखा था, "चट्टानों को चाटना किसी भी भूवैज्ञानिक और जीवाश्म वैज्ञानिक के तरकश का जरूरी हिस्सा होता है. यह एक आजमायी हुई तकनीक है जो जमीन पर काम करते हुए बचाव में काम आती है. सतह को गीला करने से जीवाश्म और खनिज चमक जाते हैं और सूखी सतह की माइक्रो-रिफ्लेक्शन और माइक्रो-रिफ्रेक्शन के कारण धुंधले नहीं पड़ते.”
मकैनिकल इंजीनियरिंग में पुरस्कार भारत, चीन, मलयेशिया और अमेरिका के वैज्ञानिकों के एक दल को मिला है जिन्होंने मृत मकड़ियों को पकड़ने के औजार के रूप में इस्तेमाल करने की तकनीक विकसित की है.
जुलाई 2022 ‘अडवांस्ड साइंस' पत्रिका में प्रकाशित अपने शोध पत्र में उन्होंने लिखा, "कुदरत द्वारा तैयार किये गये बायोटिक मटिरियल्स का गुण इन औजारों को बनाने की जरूरत खत्म करता है. इसकी मिसाल हमें अपने पूर्वजों के जीवन में देखने को मिलती है जो जानवरों की खाल को कपड़ों की तरह पहनते थे और हड्डियों से औजार बनाते थे.
उन्होंने यह भी लिखा, "हमारा प्रस्ताव है कि बायोटिक मटीरियल को काम के लिए तैयार रोबोटिक उपकरणों की तरह इस्तेमाल करके फायदा उठाया जाए क्योंकि उन्हें हासिल और इस्तेमाल करना आसान है.” अपने इस सिद्धांत को साबित करने के लिए उन्होंने रोबोट के पकड़ने वाले हिस्सों को बनाने के लिए मकड़ियों का इस्तेमाल किया.
बोरियत से स्वाद तक
जीतने वाली अन्य टीमों में से एक ने इस बात पर शोध किया है कि शिक्षक अगर बोर हो जाता है उसका छात्रों के बोर होने पर कितना असर पड़ता है.
एक टीम ने पता लगाया कि एंकोवी मछलियों के सेक्स करने से समुद्री पानी के स्वाद पर क्या असर होता है. एक पुरस्कार इस खोज को मिला है कि चॉपस्टिक और पीने के लिए प्रयोग होने वाली नली यानी स्ट्रॉ में करंट छोड़ने का खाने के स्वाद पर क्या असर होता है.
ये पुरस्कार ‘एनल्स ऑफ इंप्रोबेबल रिसर्च' मैग्जीन द्वारा दिये जाते हैं. हार्वर्ड-रेडक्लिफ साइंस फिक्सॉन एसोसिएशन और हार्वर्ड-रेडक्लिफ सोसायटी ऑफ फिजिक्स स्टूडेंट्स इन्हें प्रायोजित करती है.
‘एनल्स ऑफ इंप्रोबेबल रिसर्च' मैग्जीन ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है, "हर विजेता ने कुछ ना कुछ ऐसा किया है जो पहले लोगों को हंसाता है और फिर सोचने पर मजबूर करता है.”
वीके/एए (रॉयटर्स)
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 15, 2023 12:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

