शहर के आसपास शिकारी जीव रहें तो फायदा भी होता है
पहाड़ी शेर जैसे शिकारी जानवरों से हम दूर भागते हैं लेकिन उनका हमारे आसपास रहना हमें फायदा भी पहुंचा सकता है.
पहाड़ी शेर जैसे शिकारी जानवरों से हम दूर भागते हैं लेकिन उनका हमारे आसपास रहना हमें फायदा भी पहुंचा सकता है. विज्ञान की एक रिसर्च ने इसे साबित किया है.एक नई रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक वॉशिंगटन राज्य के ओलंपिक प्रायद्वीप में हिरण के साथ गाड़ियों की टक्कर में काफी कमी आ गई जब इलाके में पहाड़ी शेरों की चहलकदमी बढ़ गई. पहली बार सुन कर लगता है शायद शेर हिरणों को खा गया होगा जिससे उनकी संख्या कम हो गई इसलिए ऐसा हुआ, लेकिन वजह कुछ और है. वन्यजीवों के हमारे जीवन पर असर का यह दिलचस्प मामला है.
करेंट बायोलॉजी में इसी हफ्ते छपी इस रिपोर्ट के मुताबिक गाड़ियों से हिरणों के टकराने की घटनाओं में कमी एक दो नहीं 76 फीसदी तक हुई. निश्चित रूप से वहां हिरणों की संख्या कम नहीं हुई है. टक्कर कम होने की वजह ये है कि डर के कारण से हिरणों ने अपना घूमना फिरना घटा दिया. वे सड़कों और विकसित इलाकों की तरफ कम गए, उन्होंने रात की अपनी गतिविधियां कम कर दीं.
मालकिन को बचाने के लिए शेर से भिड़ गई कुतिया
रिसर्च रिपोर्ट के प्रमख लेखक जस्टिन सुराची ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा, "मांसाहारी पशुओं का इंसानी बस्तियों के करीब रहने से साफ तौर पर यह फायदा हुआ. सुराची का कहना है, "अगर किसी पशु पालक की गाय कोई भेड़िया मार देता है तो लोग पैसे के लिहाज से यह अनुमान लगा सकते हैं कि कितना नुकसान हुआ, लेकिन अगर आप कुछ सेवाओं की कीमत ना बता सकें या फिर स्पष्ट रूप से उनके बारे में ना बता सकें तो फिर लोगों को लगता है कि उनका अस्तित्व नहीं है."
कैमरा और कॉलर
पहले एक रिसर्च मॉडल ने यह दिखाया कि अगर पहाड़ी शेरों को फिर से पूर्वी अमेरिका में बसा दिया जाए तो हिरण और गाड़ियों की टक्कर पर क्या असर होगा. शेर पहले इस जगह घूमा करते थे. बाद में शिकार और आवास घटने के कारण वो मोटे तौर पर पश्चिमी हिस्से में सिमट गए. इसके बाद एक और अध्ययन में इस बात की पड़ताल की गई कि विस्कोंसिन में भेड़ियों की वापसी का हिरण और कार की टक्कर पर क्या असर पड़ा.
सुराची और उनके साथियों ने इनकी बजाय ओलिंपिक प्रायद्वीप पर ध्यान दिया. यहां पहाड़ी शेर लंबे समय से बसे हुए हैं. इन्हें कूगर, प्यूमा या पैंथर भी कहा जाता है.
हिरण और एल्क के शिकार के साथ ये एक स्थायी संतुलन बना कर रहते हैं. इस वजह से रिसर्चरों की टीम शिकारियों का उनके शिकारों पर पड़ने वाले असर को ज्यादा बेहतर तरीके से अलग कर देख सकी. नहीं तो यही लगता कि बस शिकारी, हिरणों का शिकार कर उन्हें खा रहे हैं.
रिसर्च के लिए 503 कैमरा ट्रैप और 59 शेरों पर लगे कॉलरों से मिले डेटा का इस्तेमाल किया गया. दुनिया भर में शेरों के संरक्षण के लिए काम करने वाले संगठन पैंथेरा और अमेरिका की कई देसी कबीलों और देशों के सहयोग से लंबी अवधि की यह रिसर्च की गई.
पहाड़ी शेरों या प्यूमा का असर
जिन इलाकों में पहाड़ी शेर मौजूद थे वहां उन्होंने देखा कि हिरण वहां रात की बजाय दिन में ज्यादा सक्रिय थे. जिस तरफ ज्यादा सड़कें थीं उस तरफ उनकी मौजूदगी 15 फीसदी तक कम थी. विकसित इलाकों की तुलना में दूर दराज के इलाकों में उनकी मौजूदगी 86 फीसदी तक ज्यादा थी.
पूरे प्रायद्वीप को पांच-पांच किलोमीटर के टुकड़ों में बांट कर जब कार से हिरणों की टक्कर के आंकड़ों का उन्होंने विश्लेषण किया तो पता चला कि शेरों वाले इलाके में ऐसी टक्कर 76 फीसदी तक घट गई. इस प्रायद्वीप में ट्रैफिक बहुत ज्यादा नहीं है. इसके बावजूद 2020-2025 की अवधि में यहां 2 लोगों की मौत हुई, 80 से ज्यादा लोग घायल हुए और 1.47 करोड़ डॉलर का खर्च गाड़ियों की मरम्मत और लोगों के इलाज पर आया.
सुराची का कहना है कि पीछे जा कर इसका आकलन करना संभव नहीं है कि कितने लोगों की मौत और आर्थिक नुकसान को पहाड़ी शेरों की वजह से टाला जा सका. हालांकि सुराची कहते हैं, "यह काफी ज्यादा होता अगर सारे प्यूमा चले गए होते." उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य की रिसर्च में उन्हें उम्मीद है कि प्यूमा के गायब होने के पूरे आर्थिक असर, खर्च और फायदे का अंदाजा लगाने में वह सफल होंगे.
आर्थिक महत्व
पैंथेरा के प्यूमा प्रोग्राम डायरेक्टर मार्क एल्ब्रोष ने एएफपी से कहा कि कूगर बड़ा खतरा झेल रहे हैं और इसे देखते हुए यह काम जरूरी है. मवेशियों पर प्यूमा के हमले का जवाब देने या फिर उसे रोकने की कोसिश में पश्चिमी अमेरिका में हर साल वन अधिकारी करीब 1,000 प्यूमा को मार रहे हैं. उनका कहना है, "इस तरह की रिसर्च... उन लोगों की मदद कर सकती है जो प्यूमा के साथ रहना चाहते हैं."
सुराची ने जोर देकर कहा कि बड़े मांसभक्षी जीव किसी भी दूसरी प्रजाति की तरह इंसानों को सेवाएं दे रहे हैं. इसे आर्थिक नजरिए से नहीं देख पाने का मतलब उनके योगदान को भुलाना है.