150 साल बाद डार्विन के मांसाहारी पौधे का अनुमान साबित हुआ
दक्षिण पश्चिमी चीन में उगने वाले जंगली पौधे को वैज्ञानिकों ने मांसाहारी बताया है.
दक्षिण पश्चिमी चीन में उगने वाले जंगली पौधे को वैज्ञानिकों ने मांसाहारी बताया है. करीब 150 साल बाद चार्ल्स डार्विन का अनुमान सच साबित हुआ है.ज्यादातर कीट सोच भी नहीं सकते कि फूलों वाला अल्पाइन पौधा उनका शिकार कर सकता है. हालांकि रिसर्चरों ने पता लगाया है कि दक्षिण पश्चिमी चीन के चट्टानी पर्वतों पर उगने वाला एक नाजुक जंगली फूल कीटों को खा जाता है.
अपने चिपचिपे बालों से यह कीटों को लुभा कर उनका शिकार करता है और फिर उनके शरीर को पचा कर पोषक तत्वों का अवशोषण कर लेता है. इस वनस्पतीय समूह में पहली बार किसी पौधे के मांसाहारी होने की पुष्टि हुई है.
इस पौधे का वैज्ञानिक नाम सैक्सीफ्रागा काडेलब्राउम है और यह साक्रप्रागेल्स समूह का सदस्य है. इस वनस्पति समूह में करीब 200 प्रजातियां हैं.
यह पौधा चिंगाई-तिब्बत पठार और चीन के हेंगदुआन पर्वतों के चट्टानी इलाकों में उगता है जहां बहुत पोषक तत्व नहीं होते. इसका विस्तार मध्य और उत्तरी युन्नान प्रांत से लेकर दक्षिण पश्चिमी सिचुआन प्रांत तक 2,500 से 3,000 मीटर की ऊंचाई पर है. यह पौधा चिपचिपे लाल ग्रंथिल बालों से भरा होता है. इन्हीं बालों का इस्तेमाल कर यह छोटे कीटों को फंसा लेता है.
मांसाहारी पौधे ज्यादातर कीचड़ और दलदली इलाकों में होते हैं. इन इलाकों में वीनस फ्लाइट्रैप, पिचर प्लांट और सनड्यू पोषण की कमी को पूरा करने के लिए शिकार करते हैं. मांसाहारी पौधों की श्रेणी में आने के लिए पौधों का सिर्फ कभी कभी कीटों का शिकार करना काफी नहीं है. उन्हें शिकार किए गए जीवों से पोषण को अवशोषित करना होता है. ये पौधे खाासतौर से इस तरह अनुकूलित होते हैं कि जीवों को लुभा कर उन्हें फांस लें और फिर उन्हें आहार बना कर पोषण को अवशोषित करें.
डार्विन का अनुमान
1875 में चार्ल्स डार्विन ने कहा था कि यूरोपीय सैक्सीफ्रागा की दो प्रजाति मांसाहारी हो सकती हैं. डार्विन ने उनके चिपचिपे बालों और कभी कभार कीटों को शिकार बनाना देख कर यह बात कही थी. हालांकि प्रयोगशाला में वह इसे साबित नहीं कर सके.
अभी जिस पौधे को मांसाहारी बताया गया है वह डार्विन के पौधों से अलग है. हालांकि इसका उन पौधों से करीबी संबंध है और यह कीटों को फंसाने के उसी तंत्र का इस्तेमाल करता है जिसने इस सिद्धांत को जन्म दिया था.
चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के कुनमिंग इंस्टीट्यूट ऑफ बॉटनी के प्रोफेसर हांग सुन का कहना है, "हमने पौधे पर कई टेस्ट किए और आखिर में इस बात की पुष्टि हुई कि यह सचमुच कीटों को खाने वाला पौधा है. इससे डार्विन के अनुमान की पुष्टि हुई है और यह भी पता चला है कि उनकी सोच कितनी वैज्ञानिक थी." इस पौधे के बारे में नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल ने एक रिसर्च रिपोर्ट छापी है. हांग सुन इस रिसर्च का नेतृत्व करने वालों में हैं.
यह पौधा सचमुच कीटों को आहार बनाता है इसकी जांच के लिए रिसर्चरों ने फ्रूट फ्लाई का इस्तेमाल किया जिसे नाइट्रोजन के स्थाई प्रारूप वाले भोजन पर पाला गया था. सुन का कहना है, "नाइट्रोजन पौधों के विकास के लिए बेहद जरूरी है. ज्यादातर मांसाहारी पौधे कम नाइट्रोजन वाले इलाकों में रहते हैं और वे कीटों को खा कर उनसे नाइट्रोजन हासिल करते हैं."
कीटों को पौधे के चिपचिपे बालों पर रखने के बाद उन्होंने पौधे में नाइट्रोजन के प्रवाह को देखा. उन्होंने देखा कि नाइट्रोजन आखिरकार पौधे में गया और यह पौधे के ऊतकों से गुजरा.
अस्तित्व के लिए जरूरी
पौधे में पोषक तत्वों का बंटवारा हर जगह एक जैसा नहीं था. शिकार से मिला नाइॉट्रोजन सैक्सीफ्रागा काडेलब्राउम के फूलों में गया. यह प्रजाति अपने पूरे जीवनकाल में केवल एक बार प्रजनन करती है. रिसर्चरों का कहना है कि संभवतया उसे इनकी जरूरत प्रजनन के लिए होती है क्योंकि अस्तित्व बचाने के लिए प्रजनन जरूरी है.
रिसर्चरों को इस बात के भी सबूत मिले हैं कि प्लांट बहुत सक्रियता से शिकार को आकर्षित करता है. प्रयोगों से पता चला है कि फूलों की ओर कीटों को आकर्षित करने में गंध भी अहम भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा इसके चिपचिपे बालों में पचाने वाले एंजाइम की गतिविधियां भी दिखी हैं. इससे यह साफ हो जाता है कि पौधा पकड़े गए शिकारों को तोड़ सकता है.
कीटों को पकड़ने का एक संभावित नुकसान भी है. बहुत से मांसाहारी पौधे परागण के लिए कीटों पर निर्भर है ऐसे में उन कीटों के भी शिकार बनने की आशंका रहती है जो उनका परागण कराते हैं.
सुन का कहना है, "इनमें प्रमुख रूप से मक्खी जैसे बड़े कीटों के जरिए परागण होता है. इन कीटों को चिपचिपे बालों के जरिए मजबूती से नहीं पकड़ा जा सकता और ये आसानी से भाग सकते हैं. केवल छोटी कीट ही फंसते हैं. पौधा इन छोटे कीटों से अतिरिक्त पोषण हासिल कर लेता है और परागण करने वाले कीटों का नुकसान नहीं करता है."
यह पौधा अपने वर्ग में अकेला है जो मांसाहारी है. हालांकि मुमकिन है कि दूसरे मांसाहारी पौधों की अभी पहचान नहीं हुई हो. चिंगाई तिब्बत का पठार दसियों हजार फूलों वाले पौधों की प्रजातियों का घर है. सुन का कहना है कि कुछ और पौधों में कीटों के शिकार की क्षमता हो सकती है जिसका अभी पता चलना बाकी है.